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NCERT Solutions for Class 7 Social Science SST in Hindi Medium and English Medium

Class 7 Social Science NCERT Solutions in Hindi Medium

NCERT Solutions for Class 7 Social Science History: Our Pasts – II (इकाई 1: इतिहास – हमारे अतीत – II)

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Geography: Our Environment (इकाई 2: भूगोल – हमारा पर्यावरण)

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics: Social & Political Life – II (इकाई 3: नागरिक शास्त्र-सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन – II)


Class 7 Social Science NCERT Solutions in English Medium




NCERT Solutions for Class 7 Social Science Geography

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Geography : Our Environment

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 10 (Hindi Medium)

 

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 10 Struggle for Equality (Hindi Medium)

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 7 Social Science in Hindi Medium. Here we have given NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 10 Struggle for Equality.

पाठगत प्रश्न

1. ‘मताधिकार की ताकत’ से आप क्या समझते हैं? इस पर आपस में विचार कीजिए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-115)
उत्तर : भारत के संविधान में भारत के सभी नागरिकों को जो वयस्क हैं या 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं, उन्हें एक गुप्त मत देने का अधिकार है। भारत के प्रत्येक नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करके अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं और कई चुने हुए प्रतिनिधि मिलकर ही सरकार का गठन करते हैं। नागरिकों के मताधिकार के कारण ही भारतीय लोकतंत्र की सर्वोच्च शक्ति जनता में निहित है।

2. क्या आप अपने परिवार, समुदाय, गाँव या शहर में किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोच सकते हैं, जिनका आप इसलिए सम्मान करते हैं, क्योंकि उन्होंने न्याय और समानता के लिए लड़ाई लड़ी? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-116)
उत्तर : हम अपने गाँव के ग्राम प्रधान उदय नारायण सिंह के बारे में जानते हैं। जो शिवनगर ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान के साथ-साथ एक समाज सेवी भी हैं। कई बार ग्राम पंचायत में एक जाति के लोग दूसरे जाति के साथ अन्याय और असमानता का व्यवहार करते थे तो वे अन्याय करने वाले व्यक्ति को समझाते थे। लोग उनका सम्मान करते हैं, इसलिए उनकी बातों को जल्द मान लेते हैं। इस तरह से उनके प्रयास के कारण ग्राम पंचायत के लोगों में सौहार्द का वातावरण उत्पन्न हुआ है।

3. ‘तवा मत्स्य संघ’ के संघर्ष का मुद्दा क्या था? ( एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-118)
उत्तर : तवा मत्स्य संघ के संघर्ष का मुद्दा : संघ ने सरकार से माँग की कि लोगों के जीवन-निर्वाह के लिए बाँध में मछलियाँ पकड़ने के काम को जारी रखने की अनुमति दी जाए, जो कि 1994 से तवा बाँध के क्षेत्र में मछली पकड़ने का काम निजी ठेकेदारों को सौंप दिया गया था।

4. गाँव वालों ने यह संगठन बनाने की जरूरत क्यों महसूस की? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-118)
उत्तर : 1994 में सरकार ने तवा बाँध के क्षेत्र में मछली पकड़ने का काम निजी ठेकेदारों को सौंप दिया। इन ठेकेदारों ने स्थानीय लोगों को काम से अलग कर दिया और बाहरी क्षेत्र से सस्ते श्रमिकों को ले आए। ठेकेदारों ने गुंडे बुलाकर गाँव वालों को धमकियाँ देना भी आरंभ कर दिया, क्योंकि लोग वहाँ से हटने को तैयार नहीं थे। गाँव वालों ने एकजुट होकर तय किया कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ने और संगठन बनाकर सामने खड़े होने का वक्त आ गया है। इस तरह ‘तवा मत्स्य संघ’ नाम के संगठन को बनाया गया।

5. क्या आप सोचते हैं कि ‘तवा मत्स्य संघ’ की सफलता का कारण था, ग्रामीणों की बड़ी संख्या में भागीदारी? इस संबंध में दो पंक्तियाँ लिखिए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-118)
उत्तर : यह बात सही है कि ‘तवा मत्स्य संघ’ की सफलता का कारण था, ग्रामीणों की बड़ी संख्या में भागीदारी। ग्रामीणों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए एकजुटता का परिचय दिया। ग्रामीण लोगों ने चक्का जाम अभियान शुरू किया। उनके प्रतिरोध को देखकर सरकार ने पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की। । समिति ने गाँव वालों के जीवनयापन के लिए उनको मछली पकड़ने का अधिकार देने की अनुशंसा की।

6. समानता के लिए लोगों के संघर्ष में हमारे संविधान की क्या भूमिका हो सकती है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-121)
उत्तर : संविधान भी भारत के सभी नागरिकों को एक समान मानता है। संविधान जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र, लिंग के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं करता। इसलिए तब लोग समानता के लिए संघर्ष करते हैं, संवैधानिक कानून उनके पक्ष में होता है। जब भी समानता के लिए संघर्ष का मामला न्यायालय में जाता है। न्यायालय संविधान को ध्यान में रखते हुए फैसला संघर्ष करने वालों के पक्ष में देता है। इसलिए समानता के लिए लोगों के संघर्ष में संविधान की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 9 (Hindi Medium)

 

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 9 A Shirt in the Market (Hindi Medium)

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 7 Social Science in Hindi Medium. Here we have given NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 9 A Shirt in the Market.

पाठगत प्रश्न

1. क्या स्वप्ना को रूई का उचित मूल्य प्राप्त हुआ? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-105)
उत्तर : स्वप्नों को रूई का उचित मूल्य प्राप्त नहीं हुआ क्योंकि स्वप्ना ने एक व्यापारी से ऊँची ब्याज दर पर 2500 रुपये कर्ज पर लिए थे। उस समय स्थानीय व्यापारी ने स्वप्ना को एक शर्त मानने के लिए सहमत कर लिया था। उसने स्वप्ना से वादा करवा लिया था कि वह अपनी सारी रूई उसे ही बेचेगी। व्यापारी ने स्वप्ना को 1500 रुपये प्रति क्विटल के हिसाब से रूई के 6000 रुपये दिए, जबकि रूई का बाजार भाव 1800 रुपये किंवटल था।

2. व्यापारी ने स्वप्ना को कम मूल्य क्यों दिया? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-105)
उत्तर : क्योंकि स्वप्ना ने व्यापारी से ऊँची ब्याज दर पर 2500 रुपये कर्ज लिया था। व्यापारी ने स्वप्ना से वादा करवा लिया था कि वह अपनी सारी रूई उसे ही बेचेगी। अतः स्वप्ना को रूई व्यापारी को ही बेचना पड़ा। इसलिए व्यापारी ने स्वप्ना को कम मूल्य दिया। |

3. आपके विचार से बड़े किसान अपनी रूई कहाँ बेचेंगे? उनकी स्थिति किस प्रकार स्वप्ना से भिन्न (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-105)
उत्तर : हमारे विचार से बड़े किसान अपनी रूई मंडी में जाकर अधिक दाम में बेचेंगे। वे मंडी में किसी भी व्यापारी । को रूई बेचने के लिए स्वतंत्र हैं, जबकि स्वप्ना कर्ज लेने वाले व्यापारी को ही रूई बेच सकती थी।

4. इरोड के कपड़ा बाजार में निम्नलिखित लोग क्या काम कर रहे हैं-व्यापारी, बुनकर, निर्यातक? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-107)
उत्तर : इरोड के कपड़ा बाज़ार में व्यापारी का कार्य-इरोड के कपड़ा बाजार में कई प्रकार का कपड़ा बेचा जाता है। आस-पास के गाँवों से बुनकर द्वारा बनाया गया कपड़ा भी इस बाज़ार में बिकने के लिए आता है। बाज़ार के पास कपड़ा व्यापारियों के कार्यालय हैं, जो इस कपड़े को खरीदते हैं। दक्षिणी भारत के शहरों के अन्य व्यापारी भी इस बाजार में कपड़ा खरीदने आते हैं। बुनकर-बाजार के दिनों में बुनकर व्यापारियों के ऑर्डर के अनुसार कपड़ा बनाकर यहाँ लाते हैं। बुनकर व्यापारी से सूत लेते हैं और तैयार कपड़ा देते हैं। निर्यातक का कार्य-इरोड का व्यापारी, बुनकरों द्वारा निर्मित कपड़ा दिल्ली के पास बने-बनाए वस्त्र निर्यात करने वाले एक कारखाने को भेजता है। वस्त्र निर्यात करने वाली फैक्टरी इसका उपयोग कमीजें बनाने के लिए करती है। ये कमीनें विदेशी खरीददारों को निर्यात की जाती हैं।

5. बुनकर, व्यापारियों पर किस-किस तरह से निर्भर हैं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-107)
उत्तर : बुनकर व्यापारियों के ऑर्डर के अनुसार कपड़ी बनाकर लाते हैं। बुनकर व्यापारी से सूत लेते हैं और तैयार कपड़ा देते हैं। बुनकर व्यापारियों से ऊँचे ब्याज दर पर ऋण लेकर करघे खरीदते हैं। एक करघे का मूल्य 20,000 रुपये हैं।

6. यदि बुनकर खुद सूत खरीदकर बने हुए कपड़े बेचते हैं, तो उन्हें तीन गुना ज्यादा कमाई होती है। क्या यह संभव है? चर्चा कीजिए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-108)
उत्तर : यदि बुनकर खुद सूत खरीदकर बने हुए कपड़े बेचते हैं, तो उन्हें तीन गुना ज्यादा कमाई होती है लेकिन यह संभव नहीं है, क्योंकि बुनकरों को कच्चा माल व्यापारियों से प्राप्त होता है और बेचने के लिए भी व्यापारियों पर निर्भर रहना पड़ता है। बुनकरों के पास यह जानने का कोई साधन नहीं है कि वे किसके लिए कपड़ा बना रहे हैं और वह किस कीमत पर बेचा जाएगा।

7. क्या इसी तरह की दादन व्यवस्था पापड़, बीड़ी और मसाले बनाने में भी देखने को मिलती है? अपने इलाके से इस संबंध में जानकारी इकट्ठी कीजिए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-108)
उत्तर : दादन व्यवस्था में जहाँ व्यापारी कच्चा माल देता है और तैयार माल प्राप्त करता है। हमारे इलाके में भी इस तरह की व्यवस्था देखने को मिलती है। पापड़ के लिए आलू एवं अन्य सामान, बीड़ी के लिए बीड़ी पत्ता और धागा, मसालों के लिए हल्दी, धनियाँ, काली मिर्च, जीरा, सोंठ एवं अन्य गर्म मसाले कारीगर को दे दिए जाते हैं। वे पापड, बीडी और मसालें बनाकर व्यापारी को दे देते हैं।

8. आपने अपने इलाके में सहकारी संस्थाओं के बारे में सुना होगा, जैसे-दूध, किराना, धान आदि के व्यवसाय में। पता लगाइए कि ये किसके लाभ के लिए स्थापित की गई थीं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-108)
उत्तर : हमारे इलाके में कई दूधियों ने मिलकर दूध की एक सहकारी संस्था बनाई है और इस संस्था से दूध सरकार द्वारा स्थापित डेयरी द्वारा खरीदा जाता है। इसी तरह से कई किसान भाई मिलकर किराना और धान को एकत्रित | करते हैं और ये किराना और धान को किसी वाहन पर लादकर सरकार द्वारा स्थापित बाजार समिति में ले जाकर बेचते हैं।

9. विदेशों में खरीदार वस्त्र निर्यात करने वालों से क्या-क्या अपेक्षाएँ रखते हैं? वस्त्र निर्यातक इन शर्तो को क्यों स्वीकार कर लेते हैं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-109)
उत्तर : कमीजों के विदेशी ग्राहकों में अमेरिका और यूरोप के ऐसे व्यवसायी भी हैं, जो स्टोर्स की श्रृंखला चलाते हैं। ये बड़े-बड़े स्टोर्स के स्वामी केवल अपनी शर्तों पर ही व्यापार करते हैं। वे माल देने वालों से न्यूनतम मूल्य पर माल खरीदने की माँग करते हैं। साथ ही वे सामान की उच्चतम स्तर की गुणवत्ता और समय पर सामान देने की शर्त भी रखते हैं। सामान ज़रा सा भी दोषयुक्त होने पर या माल देने में जरा भी विलंब होने । पर वे बड़ा सख्त ऐतराज करते हैं। इसलिए निर्यातक इन शक्तिशाली ग्राहकों द्वारा निश्चित की गई शर्तों को भरसक पूरा करने की कोशिश करते हैं।

10. वस्त्र निर्यातक विदेशी खरीदारों की शर्तों को किस प्रकार पूरा करते हैं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-109)
उत्तर : वस्त्र निर्यातक विदेशी खरीदारों की शर्तों को निम्न प्रकार से पूरा करते हैं

  1. निर्यातक विदेशी खरीदारों को न्यूनतम कीमत पर वस्त्र उपलब्ध कराते हैं।
  2. निर्यातक वस्त्रों की उच्च गुणवत्ता पर अधिक ध्यान देते हैं।
  3. वस्त्रों को एक निश्चित अवधि में विदेशी खरीदारों के पास निर्यात कर दिया जाता है।

11. इम्पेक्स गार्मेंट फैक्टरी में अधिक संख्या में महिलाओं को काम पर क्यों रखा गया होगा? चर्चा कीजिए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-110)
उत्तर : इम्पेक्स गारमेंट फैक्टरी में अधिक संख्या में महिलाओं को काम पर रखने के कारण

  1. इम्पेक्स गार्मेंट फैक्टरी में अधिकांश कर्मचारी अस्थायी हैं और महिलाओं को जब भी फैक्टरी में जरूरत होती है, काम के लिए बुला लिया जाता है।
  2. स्त्रियों को दर्जी के सहायक के रूप में धागे काटने, बटन टाँकने, इस्तरी करने और पैकिंग करने के लिए काम पर रखा जाता है। इन कामों के लिए न्यूनतम मजदूरी दी जाती है।

12. व्यवसायी बाज़ार में ऊँचा मुनाफा कमा पाता है। इसका क्या कारण है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-111)
उत्तर : व्यवसायी बाज़ार में ऊँचा मुनाफा निम्न कारणों से कमा पाते हैं

  1. व्यवसायी मजदूरों से न्यूनतम मजदूरी पर काम करवाते हैं।
  2. व्यवसायी बुनकरों से कम कीमत पर कपड़े खरीदते हैं।
  3. व्यवसायी वस्त्र निर्यात करने वाले कारखाने के खर्चे में कटौती करने का प्रयत्न करते हैं।

प्रश्न-अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

1. स्वप्ना ने अपनी रूई कुर्नूल के रूई-बाज़ार में न बेचकर व्यापारी को क्यों बेच दी?
उत्तर : स्वप्ना ने अपनी रूई कुर्नूल के रूई बाज़ार में न बेचकर व्यापारी को निम्न कारणों से बेच दी स्वप्ना ने एक व्यापारी से ऊँची ब्याज दर पर 2500 रुपये कर्ज पर लिए थे। उस समय स्थानीय व्यापारी ने स्वप्ना को एक शर्त मानने के लिए सहमत कर लिया था। उसने स्वप्ना से वादा करवा लिया था कि वह अपनी सारी रूई उसे ही बेचेगी।

2. वस्त्र निर्यातक कारखाने में काम करने वाले मजदूरों के काम के हालात और उन्हें दी जाने वाली मज़दूरी का वर्णन कीजिए। क्या आप सोचते हैं कि मजदूरों के साथ न्याय होता है?
उत्तर : वस्त्र निर्यातक कारखाने में काम करने वाले मजदूरों के काम के हालात और उन्हें दी जाने वाली मजदूरी

  1. वस्त्र निर्यातक कारखाने में काम करने वाले मज़दूर अस्थायी कर्मचारी हैं। अर्थात् जब भी फैक्टरी | मालिक को लगे कि कामगार की आवश्यकता नहीं है, वह उसे जाने को कह सकता है।
  2. कामगारों की मज़दूरी उनके कार्य कुशलता के अनुसार तय की जाती है। काम करने वालों में अधिकतम वेतन दर्जी को मिलता है, जो लगभग 3000 रुपये प्रतिमाह होता है।
  3. स्त्रियों को सहायक के रूप में धागे काटने, बटन टॉकने, इस्तरी करने और पैकिंग करने के लिए काम | पर रखा जाता है। इन कामों के लिए न्यूनतम मजदूरी दी जाती है। कमीज़ की इस्तरी करने की मज़दूरी 1 रुपये 50 पैसे, कमीज़ की जाँच करने वाले की मज़दूरी 2000 रुपये महीना है, धागे काटने व बटन लगाने वाले का वेतन 1500 रुपये महीना है।

3. ऐसी किसी चीज़ के बारे में सोचिए, जिसे हम सब इस्तेमाल करते हैं। वह चीनी, चाय, दूध, पेन, कागज़, पेंसिल आदि कुछ भी हो सकती है। चर्चा कीजिए कि यह वस्तु बाजारों की किस श्रृंखला से होती हुई, आप तक पहुँचती है। क्या आप उन सब लोगों के बारे में सोच सकते हैं, जिन्होंने इस वस्तु के उत्पादन व व्यापार में मदद की होगी?
उत्तर : जिसे हम इस्तेमाल करते हैं वह उत्पादक द्वारा निर्मित होने के बाद या उससे पहले, कई प्रक्रियाओं से गुजरता हुआ हमारे पास पहुँचता हैचीनी के उत्पादन की प्रक्रिया से लेकर उपभोक्ता तक पहुँचने तकगन्ना उत्पादक-किसान जो चीनी मील मालिकों को गन्ना उपलब्ध कराते हैं। चीनी मिल मालिकों से चीनी वितरक तथा थोक विक्रेताओं के पास पहुँचता है। थोक विक्रेता से खुदरा विक्रेताओं तक और खुदरा विक्रेताओं से हमारे पास तक चीनी पहुँचती है। इस प्रक्रिया में कई लोगों का सहयोग होता है; जैसे-किसान, मिल मालिक, मजदूर, थोक व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, फुट विक्रेता आदि। चीनी के अतिरिक्त अन्य उत्पादों; जैसे–चाय, दूध, कागज, पेन, पेंसिल आदि भी इन्हीं प्रक्रियाओं से गुजरकर आम जनता तक पहुँचती है।

4. यहाँ दिए गए नौ कथनों को सही क्रम में कीजिए और फिर नीचे बनी कपास की डोडियों के चित्रों में सही कथन के अंक भर दीजिए। पहले दो चित्रों में आपके लिए अंक पहले से ही भर दिए गए हैं।

1. स्वप्ना, व्यापारी को रूई बेचती है।
2. ग्राहक, सुपरमार्केट में इन कमीजों को खरीदते हैं।
3. व्यापार, जिनिंग मिलों को रूई बेचते हैं।
4. गार्मेट निर्यातक, कमीज़ों बनाने के लिए व्यापारियों से कपड़ा खरीदते हैं।
5. सूत के व्यापारी, बुनकरों को सूत देते हैं।
6. वस्त्र निर्यातक, संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यवसायी को कमीजें बेचता है।
7. सूत कातने वाली मिलें, रूई खरीदती हैं और सूत के व्यापारी को सूत बेचती हैं।
8. बुनकर कपड़ा तैयार करके लाते हैं।
9. जिनिंग मिलें रूई को साफ़ करती हैं और उनके गट्ठर बनाती हैं।
प्रश्न
NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 9 (Hindi Medium) 1
उत्तर :
NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 9 (Hindi Medium) 2

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 8 (Hindi Medium)

 

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 8 Markets Around us (Hindi Medium)

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पाठगत प्रश्न

1. लोग साप्ताहिक बाजारों में क्यों जाते हैं? तीन कारण बताइए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-96)
उत्तर :
लोगों के साप्ताहिक बाजारों में जाने के तीन कारण

  1. साप्ताहिक बाजारों में बहुत-सी चीजें सस्ते दामों पर मिल जाती हैं।
  2. जरूरत का सभी सामान एक ही जगह पर मिल जाता है।
  3. खरीदारों के पास यह भी अवसर होता है कि वे मोल-तोल करके भाव कम करवा सकें।

2. साप्ताहिक बाज़ारों में दुकानदार कौन होते हैं? बड़े व्यापारी इन बाजारों में क्यों नहीं दिखते? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-96)
उत्तर : साप्ताहिक बाजारों में प्रतिदिन खुलनेवाली पक्की दुकानें नहीं होती हैं। दुकानदार दिन में दुकान लगाते हैं और शाम होने पर उन्हें समेट लेते हैं। अगले दिन वे अपनी दुकानें किसी और जगह पर लगाते हैं। बड़े व्यापारी । को अपने स्थायी दुकानों से ही फुरसत नहीं मिलती, इसलिए वे साप्ताहिक बाजारों में नहीं दिखते।।

3. साप्ताहिक बाजारों में सामान सस्ते दामों में क्यों मिल जाता है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-96)
उत्तर : साप्ताहिक बाजारों में बहुत-सी चीजें सस्ते दामों पर मिल जाती हैं। ऐसा इसलिए कि जो पक्की दुकानें होती।हैं, उन्हें अपनी दुकानों के कई तरह के खर्चे जोड़ने होते हैं। उन्हें दुकानों का किराया, बिजली का बिल, सरकारी शुल्क आदि देना पड़ता है। इन दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों की तनख्वाह भी इन्हीं खर्ची में जोड़नी होती है। साप्ताहिक बाजारों में बेची जाने वाली चीजों को दुकानदार अपने घरों में ही जमा करके रखते हैं। इन दुकानदारों के घर के लोग अकसर इनकी सहायता करते हैं, जिससे इन्हें अलग से कर्मचारी नहीं रखने पड़ते। साप्ताहिक बाजार में एक ही तरह के सामानों के लिए कई दुकानें होती हैं, जिससे उनमें आपस में प्रतियोगिता भी होती है। यदि एक दुकानदार किसी वस्तु के लिए अधिक कीमत माँगता है, तो लोगों के पास यह विकल्प होता है कि वे अगली दुकानों पर वही सामान देख लें, जहाँ संभव है कि वही वस्तु कम कीमत में मिल जाए। ऐसी स्थितियों में खरीदारों के पास यह अवसर भी होता है कि वे मोल-तोल करके भाव कम करवा सकें।

4. एक उदाहरण देकर समझाइए कि लोग बाज़ारों में कैसे मोल-तोल करते हैं? क्या आप ऐसी स्थिति के बारे में सोच सकते हैं, जहाँ मोल-तोल करना अन्यायपूर्ण होगा? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-96)
उत्तर :
जब ग्राहक किसी सामान को लेने के लिए दुकानदार के पास जाता है और वह किसी सामान की कीमतपूछता है और जब दुकानदार द्वारा वस्तु की कीमत बतलाई जाती है, इसके बाद जब ग्राहक उस कीमत से संतुष्ट नहीं होता तो वह दुकानदार से मोल-तोल करने लगता है और जिस कीमत पर दुकानदार और ग्राहक वस्तु को देने और लेने के लिए सहमत हो जाते हैं, वस्तु की कीमत वहीं पर निर्धारित हो जाती है।

जिन वस्तुओं की कीमत सरकार द्वारा निश्चित की जाती है तथा बड़ी-बड़ी कम्पनियों की कीमत एक निश्चित होती है, वहाँ पर वस्तुओं की कीमत का मोल-तोल करना उचित नहीं होगा।

5. सुजाता नोटबुक लेकर दुकान क्यों गई? क्या यह तरीका उपयोगी है? क्या इसमें कोई समस्या भी। आ सकती है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-97)
उत्तर :
सुजाता एक दिन अपने मोहल्ले की दुकान से कुछ सामान खरीदने पहुँची। दुकानदार सुजाता को जानने वाला था जो सुजाता को उधार सामान भी दिया करता था और उस उधार सामान की कीमत सुजाता के नोटबुक पर लिख देता था। इसलिए सुजाता को दुकानदार से जब उधार सामान लेना होता है, उसे अपने साथ नोटबुक लेकर जाना पड़ता था। यह तरीका काफी उपयोगी है, क्योंकि कभी किसी ग्राहक के पास पैसा न होने परभी उसे दुकानदार द्वारा सामान उपलब्ध करा दिया जाता है। इससे दुकानदार को भी फायदा होता है कि ग्राहक जुड़ा रहता है और सारा सामान उसी से लेता है।

इसमें कई बार दुकानदारों का पैसा डूब सकता है। दुकानदार भी ऐसे ग्राहकों को अधिक कीमत पर सामान उपलब्ध करवाता है।

6. आपके मोहल्ले में अलग-अलग प्रकार की कौन-सी दुकानें हैं? आप उनसे क्या-क्या खरीदते हैं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-97)
उत्तर : हमारे मोहल्ले में कई तरह की दुकानें हैं, जो कि निम्न हैं

  1. किराने की दुकान ।
  2. कपड़े की दुकान
  3. जनरल स्टोर ।
  4. मोबाइल की दुकान
  5. मिठाई की दुकान ।
  6. सोने-चाँदी ज्वैलरी की दुकान
  7. स्टेशनरी की दुकान
    हम इन दुकानों से खाने-पीने का सामान, पहनने का सामान, पढ़ने-लिखने के सामान एवं अन्य सामानों एवं सेवाओं को खरीदते हैं।

7. सड़क किनारे की दुकानों या साप्ताहिक बाज़ार में मिलने वाले सामान की तुलना में पक्की दुकानों से मिलने वाला सामान महँगा क्यों होता है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-97)
उत्तर : सड़क किनारे की दुकानों या साप्ताहिक बाजार में मिलने वाले सामान की तुलना में पक्की दुकानों से मिलने वाला सामान महँगा होने के कारण

  1. पक्की दुकानों को कई तरह के खर्चे; जैसे-दुकानों का किराया, बिजली का बिल, सरकारी शुल्क आदि देना पड़ता है।
  2. इन दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों की तनख्वाह भी इन्हीं खर्चे में जोड़नी होती है।
  3. पक्की दुकानों पर स्थानीय उत्पाद कम और ब्रांडेड कम्पनी के सामान अधिक मिलते हैं। स्थानीय उत्पाद वस्तुओं की अपेक्षा ब्रांडेड कम्पनी की वस्तुएँ महँगी होती हैं।

8. आप क्या सोचते हैं, सुरक्षा कर्मचारी ने सुजाता और कविता को अंदर जाने से रोकना क्यों चाहा होगा? यदि कहीं किसी बाज़ार में कोई आपको ऐसी ही दुकान में अंदर जाने से रोके तो आप क्या कहेंगे? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-98)
उत्तर : सुजाता और कविता अंजल मॉल में गयी थीं, जो कि एक पाँच मंजिला शॉपिंग कॉम्पलेक्स है। कविता और सुजाता इसमें लिफ्ट से ऊपर जाने और नीचे आने का आनंद ले रही थीं। इसमें से बाहर का नजारा देखती हुई ऊपर नीचे जा रही थीं। उन्हें यहाँ आईसक्रीम, बर्गर, पिज्जा आदि खाने की चीजें, घरेलू उपयोग का सामान, चमड़े के जूते, किताबें आदि तरह-तरह की दुकानों को देखना अद्भुत लग रहा था। जब वे लोग रेडिमेड कपड़े की दुकान पर पहुँची तो सुरक्षा कर्मचारी ने उन्हें रोकना चाहा, इसका मुख्य कारण यह था कि वे दोनों मॉल में सामान लेने नहीं, बल्कि घूमने के इरादे से गई थीं और वे मॉल में स्थित विभिन्न दुकानों को आश्चर्यचकित होकर देख रही थीं, इसलिए सुरक्षाकर्मी को उनके इरादों पर संदेह हो रहा था।

हमें ऐसी दुकान के अंदर जाने से रोकने पर हम उन सुरक्षाकर्मी को मॉल में आने के उद्देश्य बतलाएँगे अर्थात सामानों को खरीदने के बारे में बतलाएँगे।

9. ऐसा क्यों होता है कि लोग मॉल में दुकानदारों से मोल-तोल नहीं करते हैं, जबकि साप्ताहिक बाज़ारों में ऐसा खूब किया जाता है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-99)
उत्तर :
लोग मॉल में दुकानदारों से मोल-तोल करना अपनी शख्सियत के खिलाफ मानते हैं। साथ-ही-साथ मॉल में कई दुकानों की कीमत निश्चित होती है। ऐसी स्थिति में लोग मॉल में दुकानदारों से मोल-तोल नहीं करते हैं।

साप्ताहिक बाजारों में ब्रांडेड कम्पनी के सामान नहीं मिलते हैं, जिसकी कीमत निश्चित होती है, बल्कि इन बाजारों में स्थानीय उत्पाद वाली वस्तुएँ मिलती हैं, जिसकी कीमत निश्चित नहीं होती। ऐसी स्थिति में लोग इन वस्तुओं के मोल-तोल करते हैं।

10. आपको क्या लगता है, आपके मुहल्ले की दुकान में सामान कैसे आता है? पता लगाइए और कुछ उदाहरणों से समझाइए। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-99)
उत्तर : हमारे मुहल्ले की दुकान में सामान थोक विक्रेताओं से आता है। उदाहरणस्वरूप-हर शहर में थोक बाज़ार का एक क्षेत्र होता है। थोक व्यापारी या विक्रेता अपना सामान वितरक या उत्पादक से काफी मात्रा में खरीदता | है। थोक विक्रेता अपना सामान खुदरा विक्रेता को बेचते हैं। खुदरा विक्रेता ही मोहल्ले में सामान बेचते हैं, जिसे उपभोक्ता खरीदते हैं।

11. थोक व्यापारी की भूमिका जरूरी क्यों होती है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-99)
उत्तर : बाज़ार में थोक व्यापारी की भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण होती है। थोक व्यापारी वितरक तथा उत्पादक से काफी मात्रा में वस्तु खरीदते हैं। उस वस्तु को थोक व्यापारी खुदरा व्यापारी को उपलब्ध कराते हैं। कई खुदरा व्यापारी के पास इतने अधिक पैसे नहीं होते कि वे वितरक तथा उत्पादक से काफी मात्रा में सामान खरीद सकें। खुदरा व्यापारी ही उपभोक्ता तक सामान को उपलब्ध कराता है।

प्रश्न-अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

1. एक फेरीवाला, किसी दुकानदार से कैसे भिन्न है?
उत्तर : एक फेरीवाला दुकानदार से कई दृष्टि से भिन्न है

  1. फेरीवालों की कोई निश्चित या स्थायी दुकान नहीं होती है। वे घूम-घूमकर अपना सामान बेचते हैं, जबकि दुकानदार की अपनी एक निश्चित दुकान होती है।
  2. फेरीवाला अपने सामान को आवाज़ लगाकर बेचता है, जबकि दुकानदार को अपने सामान को बेचने के लिए आवाज़ नहीं लगानी पड़ती।
  3. फेरीवाले के पास सामान बहुत कम होता है, जिसके कारण पूँजी भी कम लगती है। इसकी अपेक्षा दुकानदार के पास सामान अधिक होता है और पूँजी भी अधिक लगती है।
  4. फेरीवाला स्थानीय उत्पाद का सामान बेचता है, जबकि दुकानदार स्थानीय उत्पाद का सामान और ब्रांडेड दोनों तरह के सामान बेचता है।।

2. निम्न तालिका के आधार पर एक साप्ताहिक बाज़ार और एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की तुलना करते हुए उनका अंतर स्पष्ट कीजिए।
NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 8 (Hindi Medium) 1
उत्तर :
NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 8 (Hindi Medium) 2

3. स्पष्ट कीजिए कि बाजारों की श्रृंखला कैसे बनती है? इससे किन उद्देश्यों की पूर्ति होती है?
उत्तर : एक उत्पादक वस्तुओं का उत्पादन करता है। उत्पादक द्वारा वस्तुएँ वितरक तथा थोक व्यापारियों को बेचा जाता है। कई बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ अपना सामान थोक विक्रेताओं को न देकर वितरकों को देते हैं और वितरक के माध्यम से थोक विक्रेताओं के पास सामान पहुँचता है। थोक विक्रेता खुदरा विक्रेता को सामान बेचता है। खुदरा विक्रेता उन वस्तुओं को स्थानीय ग्राहकों को बेचते हैं।
बाज़ार श्रृंखला द्वारा निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति होती है-

  1. उत्पादक के लिए सीधे रूप में ग्राहकों को सामान बेचना संभव नहीं होता, इसलिए बाज़ार श्रृंखला की आवश्यकता होती है।
  2. छोटे व्यवसायी एवं खुदरा विक्रेता उत्पादक का सारा सामान खरीदने में असमर्थ होते हैं, इसलिए उन्हें भी बाज़ार श्रृंखला की आवश्यकता होती है।
  3. बाजार श्रृंखला के कारण ही उत्पादक से उपभोक्ता तक सामान आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

4. सब लोगों को बाजार में किसी भी दुकान पर जाने का समान अधिकार है। क्या आपके विचार से महँगे उत्पादों की दुकानों के बारे में यह बात सत्य है? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : सब लोगों को बाज़ार में किसी भी दुकान पर जाने का समान अधिकार है। यह बात महँगे उत्पादों की दुकानों के बारे में भी सत्य है, परंतु महँगे उत्पाद प्रायः उच्च आय वाले ही खरीद पाते हैं। गरीब लोग महँगे उत्पादों की दुकानों के सामान को नहीं खरीद सकते। वे सिर्फ साप्ताहिक बाज़ारों, स्थानीय दुकानों तथा फेरीवालों से ही सामान खरीदते हैं।

उदाहरणस्वरूप-उच्च आय वर्ग के लोग ब्रांडेड सामान शॉपिंग मॉल से खरीदते हैं, जबकि निम्न आय वर्ग के लोग इसे खरीदने में असमर्थ होते हैं।

5. बाज़ार में जाए बिना भी खरीदना और बेचना हो सकता है। उदाहरण देकर इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर : आज के वर्तमान युग में बाजार में जाए बिना भी खरीदना और बेचना संभव है। इसे उदाहरणों के माध्यम से समझा जा सकता है। उदाहरणस्वरूप-कोई उपभोक्ता अपने घर की आवश्यकता के लिए कुछ सामान खरीदना चाहता है उसके लिए वह सबसे पहले अपनी आवश्यक सामानों की सूची बनाएगा। इसके बाद वह नजदीक के डिपार्टमेंटल स्टोर को फोन अथवा ई-मेल द्वारा सामान की सूची को नोट कराएगा और साथ-ही-साथ उसे अपना फोन नम्बर। ई-मेल नम्बर और घर का पता भी बतलाएगा। डिपार्टमेंटल स्टोर के कर्मचारी उस पते पर सारे सामान को पहुँचा देगा और उपभोक्ता से सामान की कीमत वसूल कर वापस चला जाएगा।

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 7 (Hindi Medium)

 

NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 7 Understanding Advertising (Hindi Medium)

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 7 Social Science in Hindi Medium. Here we have given NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 7 Understanding Advertising.

पाठगत प्रश्न

1. केयर साबुन के विज्ञापन में यह प्रतीत होता है कि बच्चे की देखभाल केवल माँ ही करती है। क्या इस छवि में आपको कोई समस्या नज़र आती है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-81)
उत्तर : केयर साबुन के विज्ञापन में यह प्रतीत होता है कि बच्चे की देखभाल केवल माँ ही करती है, यह सही नहीं है। किसी बच्चे की देखभाल माता-पिता दोनों मिलकर करते हैं। यह अलग बात है कि उसमें माँ का योगदान अधिक होता है।

2. विज्ञापन हमें ब्रांड का सामान इस्तेमाल पर क्या अनुभव कराना चाहता है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-84)
उत्तर : विज्ञापन अधिकतर हमारी व्यक्तिगत भावनाओं को केंद्र बनाने की कोशिश करते हैं। हमारी व्यक्तिगत भावनाओं को उत्पादों के साथ जोड़कर वे इस बात को भी प्रभावित करने की कोशिश करते हैं कि हमें अपना मूल्य कैसे आँकते हैं। विज्ञापन ब्रांड को उच्च स्तरीय उत्पाद बतलाने की कोशिश करता है और यह भी बताता है। कि वे उत्पाद खरीदने योग्य हैं। साथ ही विज्ञापन हमें अधिकांशतः धनाढ्य लोगों की जीवन शैली के चित्र दिखाते हैं।

3. यदि आपके पास विज्ञापित उत्पादों को खरीदने के लिए पैसा हो, तो आपको इन्हें देखकर कैसा महसूस होगा? यदि आपके पास पैसा न हो, तब कैसा अनुभव होगा? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-84)
उत्तर : विज्ञापित उत्पाद अधिकांशत: बड़ी कंपनियों की होती है, जो अपनी उत्पादों की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए तकनीकी पर करोड़ों रुपये खर्च करती है। ऐसी स्थिति में स्वाभाविक है कि इन कंपनियों का उत्पाद उच्च कोटि का होगा। इन वस्तुओं को खरीदकर हमें अच्छा महसूस होगा। यदि इन वस्तुओं को हमें खरीदने की क्षमता नहीं होगी तो हम बिना विज्ञापित उत्पादों को ही खरीदेंगे और विज्ञापित वस्तुओं के प्रति हमारी धारणा यह होगी कि ये वस्तुएँ विज्ञापन के कारण ही महँगी हैं। इनमें और हमारे द्वारा खरीदे गए वस्तुओं में ज्यादा अंतर नहीं है।

4. आपके विचार में सामाजिक विज्ञापन में किस श्रोता को संबोधित या ‘लक्षित किया गया है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-88)
उत्तर : हमारे विचार में सामाजिक विज्ञापन में उन सभी श्रोताओं को संबोधित या लक्षित किया गया है, जो समाज के अंग हैं; जैसे-विकलांग बच्चों के शैक्षणिक अधिकारों से संबंधित विज्ञापन, असुरक्षित रेलवे क्रॉसिंग को पार करने से संबंधित विज्ञापन, उपभोक्ताओं के अधिकार से संबंधित विज्ञापन आदि।

5. राज्य शासन के अध्याय में आपने हैजा की महामारी फैलने के बारे में पढ़ा। इसे पढ़ने के बाद क्या आप एक सामाजिक विज्ञापन बना सकते हैं जिसमें हैजा की बीमारी से बचाव के उपायों के बारे में बताया गया हो। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-88)
उत्तर : “पानी को किसी बर्तन से ढककर रखें या पानी को उबालकर पीयें पानी में किसी तरह की अस्वच्छता
आपके घर में हैजा को दस्तक दे सकता है। । हैजा की बीमारी अस्वच्छ जल से ही फैलती है इसलिए ऊपर में विज्ञापन लोगों को स्वच्छ जल के
प्रति जागरूकता के लिए दिया गया है।

6. पाठ्यपुस्तक में से प्रत्येक सामाजिक विज्ञापन क्या संदेश पहुँचाना चाह रहा है? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-88)
उत्तर : पाठ्यपुस्तक में दिए गए प्रत्येक सामाजिक विज्ञापन लोगों की सुरक्षा और अधिकार से संबंधित संदेश पहुँचाना चाहते हैं; जैसे-असुरक्षित रेलवे क्रॉसिंग को पार करने से संबंधित सामाजिक विज्ञापन। विकलांग बच्चों के शैक्षणिक अधिकारों से संबंधित सामाजिक विज्ञापन।

प्रश्न-अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

1. ‘ब्रांड’ शब्द से आप क्या समझते हैं? विज्ञापन के लिए ब्रांड निर्मित करने के दो मुख्य कारण बताइए।
उत्तर : ‘ब्रांड’ शब्द का आशय उत्पाद के विशेष नाम या पहचान से है। इस पहचान का निर्माण विज्ञापन प्रक्रिया द्वारा होता है। विज्ञापन के लिए ब्रांड निर्मित करने के कारण|

  1. प्रायः निर्माता अपने उत्पाद को बाजार में प्रचलित अन्य उत्पादों से भिन्न दिखाने के लिए विशेष नाम अथवा चिन्ह का प्रयोग करते हैं।
  2. निर्माता, ग्राहकों को अपने उत्पादों की ओर आकर्षित करने के लिए भी अपने उत्पादों को नाम देते हैं।

2. अपनी पसंद के दो छपे हुए विज्ञापन चुनिए। इन्हें देखकर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

  • आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए इन विज्ञापनों में कैसी भाषा और चित्रों का उपयोग किया गया है?
  • इन विज्ञापनों से किन मूल्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है?
  • यह विज्ञापन किन लोगों से संवाद कर रहा है और किन्हें छोड़ रहा है?
  • यदि आप विज्ञापित ब्रांड खरीदने में समर्थ नहीं होंगे, तो आपको कैसा लगेगा?

उत्तर :

  • हमारा ध्यान आकर्षित करने के लिए इन विज्ञापनों में सरल भाषा और चित्रों को आकर्षित रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे उपभोक्ता देखकर और पढ़कर खरीदने के लिए तत्पर हो जाएँ।
  • इन विज्ञापनों के द्वारा अपने उत्पाद की विशेषताओं को बतलाया जा रहा है, जो सबसे अच्छी और बाज़ार में उचित मूल्य पर उपलब्ध है।
  • यह विज्ञापन उन लोगों से संवाद कर रहा है जो इन उत्पादों को खरीदने पर विचार कर रहे हैं या इन उत्पादों को खरीदने में रुचि रखते हैं और उन लोगों को छोड़ रहा है जिनकी बजट इन उत्पादों को खरीदने में सक्षम नहीं है।
  • यदि हम उन उत्पादों को खरीदने में सक्षम नहीं होंगे तो हमें लगेगा कि इन उत्पादों में कई तरह की खूबियाँ हैं, अगर मौका मिलेगा तो इन उत्पादों NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 7 (Hindi Medium) 1

3. क्या आप ऐसे दो तरीके बता सकते हैं, जिनके द्वारा आप सोचते हैं कि विज्ञापन का प्रभाव लोकतंत्र में समानता के मुद्दे पर पड़ता है?
उत्तर : विज्ञापन का प्रभाव लोकतंत्र में समानता के मुद्दे पर पड़ता है। विज्ञापन के ऐसे दो तरीके निम्न हैं

  1. ब्रांड या उत्पाद के विज्ञापन की कीमत भी वस्तु के मूल्य में शामिल होने से उसकी कीमत बढ़ जाती | है, जिसके कारण वह वस्तु निम्न आय वर्ग की पहुँच से बाहर हो जाती है।
  2. केवल बड़ी कंपनियाँ ही बड़े स्तर पर अपने ब्रांड का विज्ञापन कर सकती हैं। छोटे व्यापारी या उत्पादक | उद्यमी अपने अच्छे उत्पाद को भी सस्ते मूल्य पर बेचने में भी असफल रहते हैं। इस प्रकार लोकतंत्र में जहाँ सब लोग समान हैं और जहाँ सभी को सम्मानीय जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए। विज्ञापन के कारण समाज में दो तरह के उत्पाद उपलब्ध होते हैं। एक ब्रांड उत्पाद और दूसरा स्थानीय उत्पाद। ब्रांडेड उत्पाद को अच्छा माना जाता है और स्थानीय उत्पाद को ब्रांडेड उत्पाद की अपेक्षा कम अच्छा माना जाता है।

4. विज्ञापन बनाने में रचनात्मकता की बहुत आवश्यकता होती है। आइए, हम एक ऐसी स्थिति की कल्पना करें, जहाँ एक निर्मात्री ने एक नयी घड़ी बनाई है। निर्मात्री कहती है कि वह यह घड़ी स्कूल के बच्चों को बेचना चाहती है। वह आपकी कक्षा में आकर आप सबसे घड़ी के लिए एक ब्रांड का नाम और विज्ञापन बनाने को कहती है। कक्षा को छोटे-छोटे समूहों में बाँट दीजिए। हर समूह इस घड़ी के लिए एक विज्ञापन और तैयार करेगा। अब आपस में अपने बनाए कच्चे-पक्के विज्ञापनों और नाम को कक्षा के सामने रखिए।
उत्तर एक घड़ी के विज्ञापन तैयार करने के लिए कक्षा के छात्रों को चार भागों में बाँटें
घड़ी के ब्रांड का नाम-‘टाइम वॉच’:
NCERT Solutions for Class 7 Social Science Civics Chapter 7 (Hindi Medium) 2

पहले समूह का विज्ञापन : ‘टाइम वॉच’ एक सस्ती और टिकाऊ घड़ी है, जो सालों-साल चलती है। यह घड़ी काफी आकर्षित भी है और बच्चों के लिए सबसे उपयोगी घड़ी है, कीमत मात्र : 325 रुपये है।
दूसरे समूह का विज्ञापन-टाइम वॉच” दुनिया की सबसे बेहतरीन घड़ी है। जिसे लाखों-करोड़ों की संख्या में लोगों नेआजमाया है और इसकी सराहना की है। अब आपके लिए भी उपलब्ध है। कीमत मात्र : 325 रुपये।
तीसरे समूह का विज्ञापन : ‘टाइम वॉच’ ‘‘सभी घड़ियों से अलग खूबियों वाली” इसकी खूबियाँ जो अन्य घड़ियों से इसे अलग करती हैं

  1. डायमंड लगा हुआ फ्रैंक बलूची वॉच
  2. 1 साल की मैन्युफेक्चरर वॉरन्टी
  3. वाटर प्रूफ
  4. बच्चों को ध्यान में रखकर बनाया गया।चौथे समूह का विज्ञापन : “टाइम वॉच” पर 20% की ।छूट। बच्चों के लिए यह छूट 25% तक की है। यह मौका आपके हाथ से कहीं निकल न जाए।