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NCERT Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 2 Physical Features of India (Hindi Medium)



 NCERT Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 2 Physical Features of India (Hindi Medium)


These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 9 Social Science in Hindi Medium. Here we have given NCERT Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 2 Physical Features of India.

प्रश्न अभ्यास

पाठ्यपुस्तक से

प्रश्न 1. निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए ।

(i) एक स्थलीय भाग जो तीन ओर से समुद्र से घिरा हो

(क) तट

(ख) प्रायद्वीप

(ग) द्वीप

(घ) इनमें से कोई नहीं ।

(ii) भारत के पूर्वी भाग में म्यांमार की सीमा का निर्धारण करने वाले पर्वतों का संयुक्त नाम

(क) हिमाचल

(ख) पूर्वांचल

(ग) उत्तराखण्ड

(घ) इनमें से कोई नहीं।

(iii) गोवा के दक्षिण में स्थित पश्चिम तटीय पट्टी

(क) कोरोमंडल

(ख) कन्नड

(ग) कोंकण

(घ) उत्तरी सरकार

(iv) पूवी घाट का सर्वोच्च शिखर

(क) अनाईमुडी

(ख) महेंद्रगिरि

(ग) कंचनजंगा।

(घ) खासी

उत्तर :

(i) (ग)

(ii) (ग)

(iii) (ग)

(iv) (ग)

प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर दीजिए


भूगर्भीय प्लेटें क्या हैं?


आज के कौन से महाद्वीप गोंडवाना लैंड के भाग थे?


‘भाबर’ क्या है?


हिमालय के तीन प्रमुख विभागों के नाम उत्तर से दक्षिण के क्रम में बताइए?


अरावली और विंध्याचल की पहाड़ियों में कौन-सा पठार स्थित है?


भारत के उन द्वीपों के नाम बताइए जो प्रवाल भित्ति के हैं।


उत्तर :

(i) भूगर्भीय प्लेटें पृथ्वी की ठोस परत के नीचे मौजूद पारंपरिक धाराएं इसकी पर्पटी या स्थलमंडल को कई बड़े भागों में बांटती हैं। इन भागों को टेक्टोनिक या स्थलमंडल प्लेट कहा जाता है।

(ii) गोंडवाना भूमि में वर्तमान भारत, आस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका एवं दक्षिण अमेरिका एक ही भूखंड में शामिल थे। यह दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित था।

(iii) ‘भाबर’ वह तंग पट्टी है जिसका निर्माण कंकड़ों के जमा होने से होता है जो शिवालिक की ढलान

के समानांतर सिन्धु एवं तिस्ता नदियों के बीच पाई जाती हैं। इस पट्टी का निर्माण पहाड़ियों से नीचे उतरते समय विभिन्न नदियों द्वारा किया जाता है। सभी नदियाँ भाबर पट्टी में आकर विलुप्त हो जाती हैं।

(iv) हिमालय विश्व की सर्वाधिक ऊँची एवं मजबूत बाधाओं को प्रतिनिधित्व करता है। उत्तर दिशा से दक्षिण की ओर इसे 3 मुख्य भागों में बांटा जा सकता है:


महान या आंतरिक हिमालय अथवा हिमाद्री : सबसे उत्तरी भाग जिसे महान या आंतरिक हिमालय अथवा ‘हिमाद्री’ कहा जाता है।


हिमाचल या निम्न हिमालय : हिमाद्री के दक्षिण में स्थित श्रृंखला हिमाचल या निम्न हिमालय के नाम से जानी जाती है। यह श्रृंखला मुख्यतः अत्यधिक संपीड़ित कायांतरित चट्टानों से बनी हैं। पीर पंजाल श्रृंखला सबसे बड़ी एवं सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण श्रृंखला का निर्माण करती है। कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण श्रृंखलाएँ धौलाधार और महाभारत शृंखलाएँ हैं।


शिवालिक : हिमालय की सबसे बाहरी श्रृंखला को शिवालिक कहा जाता है। यह गिरीपद श्रृंखला है तथा हिमालय के सबसे दक्षिणी भाग का प्रतिनिधित्व करती है।


(v) मालवा का पठार।

(vi) लक्षद्वीप समूह।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए


अपसारी तथा अभिसारी भूगर्भीय प्लेटें


बांगर और खादर


पूर्वी घाट तथा पश्चिमी घाट


उत्तर :

(i) अपसारी तथा अभिसारी भूगर्भीय प्लेटें

(ii) बांगर और खादर

(iii) पूर्वी घाट तथा पश्चिमी घाट

प्रश्न 4. बताइए हिमालय का निर्माण कैसे हुआ था ?

उत्तर : दक्षिणी गोलार्द्ध के विशाल महाद्वीप का काल्पनिक नाम गोंडवाना भूमि है। ऐसा माना जाता है कि लाखों वर्ष पहले भारत एक बड़े महाद्वीप गोंडवाना भूमि का भाग था। सबसे प्राचीन भूखंड (प्रायद्वीपीय भाग) गोंडवाना भूमि का हिस्सा था । वर्तमान आस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका एवं दक्षिण अमेरिका भी इसी भूखंड में शामिल थे। यह दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित था।

संवहनीय धाराओं के कारण इसकी भू-पर्पटी कई टुकड़ों में टूट गई जिससे इंडो-आस्ट्रेलियाई प्लेट गोंडवानालैण्ड से अलग होकर उत्तर की ओर सरक गई। प्लेट विवर्तन सिद्धांत के अनुसार भू-पर्पटी पहले एक ही विशालकाय महाद्वीप था जिसे पैंजिया कहा जाता था। उत्तरी भाग में अंगारा भूमि थी। दक्षिणी भाग में गोंडवाना भूमि। भूपर्पटी के नीचे मौजूद पिघले हुए पदार्थ ने भूपर्पटी या लीथोस्फीयर को कई बड़े टुकड़ों में बाँट दिया जिन्हें लीथोस्फेरिक या टैक्टोनिक प्लेट कहा जाता है। जो अवसादी

चट्टान टक्कर के कारण वलित होकर इकट्ठे हो गए उन्हें टेथीस के नाम से जाना जाता है। गोंडवाना भूमि से अलग होने के बाद इंडो-आस्ट्रेलियाई प्लेट उत्तर में यूरेशियन प्लेट की ओर खिसक गई। यह दो प्लेटों में टकराव का कारण बना और इस टकराव के कारण टेथीस की अवसादी चट्टानें वलित होकर पश्चिमी एशिया की पर्वतीय श्रृंखला तथा हिमालय के रूप में उभर गई।

प्रश्न 5. भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग कौन से हैं? हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीप पठार के उच्चावच लक्षणों में क्या अंतर है?

उत्तर :


हिमालयी पर्वत


उत्तर के मैदान


प्रायद्वीपीय पठार


भारतीय मरुस्थल


तटीय मैदान


द्वीप समूह


हिमालयी क्षेत्र तथा प्रायद्वीपीय पठार के उच्चावच लक्षणों में अंतर नीचे दिया गया है।

प्रश्न 6. भारत के उत्तरी मैदान का वर्णन कीजिए।

उत्तर : यह मैदान जलोढ मृदा से बना हुआ है। लाखों वर्षों में हिमालय के गिरीपदों पर एक विशाल बेसिन में जलोढ का निक्षेप होने से इस उपजाऊ मैदान का निर्माण हुआ है। यह मैदान 7 लाख वर्ग कि0मी0 में फैला हुआ है। यह मैदान 2400 कि0मी0 लंबा तथा 240-320 कि0मी0 चौड़ा है। समृद्ध मृदा के आवरण, भरपूर पानी की आपूर्ति एवं अनुकूल जलवायु ने उत्तरी मैदान को कृषि की दृष्टि से भारत का अत्यधिक उपजाऊ भाग बना दिया है। इसी कारण यहाँ का जनसंख्या घनत्व भारत के सभी भौगोलिक विभाजनों की अपेक्षा इस क्षेत्र में सर्वाधिक है। उत्तरी मैदान के पश्चिमी भाग को पंजाब कहा जाता है। गंगा का मैदान घग्घर एवं तिस्ता नदियों के बीच स्थित है। यह उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों जैसे हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा झारखंड के कुछ भाग एंव पश्चिम बंगाल के पूर्व में फैला हुआ है।

प्रश्न 7. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए


भारतीय मरुस्थल


मध्य उच्च भूमि


भारत के द्वीप समूह


उत्तर :

(i) भारतीय मरुस्थल को थार मरुस्थल के नाम से भी जाना जाता है। यह अरावली की पहाड़ियों के दक्षिणी किनारे की ओर स्थित है। यह बालू के टिब्बों से भरा हुआ रेतीला मैदान है। यहाँ पूरे वर्ष में 150 मि0मि0 से भी कम वर्षा होती है। यह पूरे राजस्थान में फैला हुआ है। इसकी जलवायु शुष्क है और यहाँ वनस्पति भी बहुत कम है। वर्षा ऋतु में कुछ समय तक कई सरिताएँ नजर आती हैं जो वर्षा रुकने के साथ ही विलुप्त हो जाती हैं। ‘लूनी’ इस क्षेत्र की एकमात्र बड़ी नदी है। अर्धचंद्राकार रेत के टिब्बे जिन्हें बरकान कहा जाता है, भारतीय मरुस्थल की प्रमुख विशेषता है। ऊँट मरुस्थल का सबसे महत्त्वपूर्ण जानवर है।

(ii) मध्य उच्च भूमि : प्रायद्वीपीय क्षेत्र का वह भाग जो नर्मदा नदी के उत्तर में पड़ता है और मालवा के पठार के एक बड़े हिस्से पर फैला है उसे मध्य उच्चभूमि कहा जाता है। यह दक्षिण में विंध्य श्रेणी और उत्तर-पश्चिम में अरावली की पहाड़ियों से घिरा है। आगे जाकर यह पश्चिम में भारतीय मरुस्थल से मिल जाता है जबकि पूर्व दिशा में इसका विस्तार छोटानागपुर के पठार द्वारा प्रकट होता है। इस क्षेत्र में नदियाँ दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर बहती हैं। इस क्षेत्र के पूर्वी विस्तार को स्थानीय रूप से बुन्देलखण्ड, बाघेलखण्ड और छोटानागपुर पठार कहा जाता है। छोटानागपुर पठार आग्नेय चट्टानों से बना है। आग्नेय चट्टानों में खनिज भरपूर मात्रा में होते हैं और इसलिए इस पठार को खनिजों का भण्डार कहा जाता है।

(iii) भारत के द्वीप समूह : लक्षद्वीप मुख्यभूमि के दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर में केरल के मालाबार तट के पास स्थित है। पहले इनको लकादीव, मीनीकाय तथा एमीनदीव के नाम से जाना जाता था। 1973 में इनका नाम लक्षद्वीप रखा गया। लक्षद्वीप का प्रशासनिक मुख्यालय कावारती में है। यह द्वीप समूह छोटे प्रवाल द्वीपों से बना है। यह 32 वर्ग कि0मी0 के छोटे से क्षेत्र में फैला हुआ है। इस द्वीप समूह पर पौधों एवं जीवों की बहुत सी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

NCERT Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 1 India-Size and Location (Hindi Medium)



NCERT Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 1 India-Size and Location (Hindi Medium)


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प्रश्न अभ्यास

पाठ्यपुस्तक से

प्रश्न 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

(i) कर्क रेखा किस राज्य से नहीं गुजरती?

(क) राजस्थान

(ख) उड़ीसा

(ग) छत्तीसगढ़

(घ) त्रिपुरा

(ii) भारत को सबसे पूर्वी देशांतर कौन सा है ?

(क) 97° 25′ पू0

(ख) 77°6′ पू0

(ग) 68° 7′ पू0

(घ) 82° 32′ पू0

(iii) उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम की सीमाएँ किस देश को छूती हैं?

(क) चीन

(ख) भूटान

(ग) नेपाल

(घ) म्यांमार

(iv) ग्रीष्मावकाश में आप यदि कवरत्ती जाना चाहते हैं तो किस केंद्र शासित क्षेत्र में जाएँगे?

(क) पुडुच्चेरी।

(ख) लक्षद्वीप

(ग) अंडमान और निकोबार

(घ) दीव और दमन

(v) मेरे मित्र एक ऐसे देश के निवासी हैं जिस देश की सीमा भारत के साथ नहीं लगती है। आप बताइए, वह कौन-सा देश है?

(क) भूटान

(ख) ताजिकिस्तान

(ग) बांग्लादेश

(घ) नेपाल

उत्तर :

(i) (ख)

(ii) (क)

(iii) (ग)

(iv) (ख)

(v) (ख)

प्रश्न 2. नीचे दिए गए प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर दें।


अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूह के नाम बताइए। दक्षिण में कौन-कौन से द्वीपीय देश हमारे पड़ोसी हैं?


उन देशों के नाम बताइए जो क्षेत्रफल में भारत से बड़े हैं?


हमारे उत्तर-पश्चिमी, उत्तरी तथा उत्तर-पूर्वी पड़ोसी देशों के नाम बताइए।


भारत में किन-किन राज्यों से कर्क रेखा गुजरती है, उनके नाम बताइए।


उत्तर :


अरब सागर में लक्षद्वीप तथा बंगाल की खाड़ी में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह स्थित हैं। दक्षिण में श्रीलंका तथा मालदीव द्वीपीय देश हमारे पड़ोसी हैं।


रूस, कनाडा, अमेरिका, चीन, ब्राजील और आस्ट्रेलिया क्षेत्रफल में भारत से बड़े हैं।


हमारे उत्तर-पश्चिमी पड़ोसी देश : पाकिस्तान, अफगानिस्तान

हमारे उत्तरी पड़ोसी देश : चीन (तिब्बत), नेपाल एवं भूटान।

हमारे उत्तर-पूर्वी पड़ोसी : म्यांमार और बाग्लादेश।


कर्क रेखा गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा एवं मिजोरम राज्यों से होकर गुजरती है।


प्रश्न 3. सूर्योदय अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग में गुजरात के पश्चिमी भाग की अपेक्षा 2 घंटे पहले क्यों होता है, जबकि दोनों राज्यों में घड़ी एक ही समय दर्शाती है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : गुजरात और अरूणाचल प्रदेश में समय का 2 घण्टे का अंतर है। गुजरात की अपेक्षा अरूणाचल प्रदेश में सूर्य 2 घण्टे पहले उदय होता है किन्तु फिर भी दोनों राज्यों में घड़ियाँ एक ही समय दिखाती हैं। पृथ्वी एक अक्षांश घूमने में 4 मिनट का समय लेती है। इसलिए, 15 अक्षांश घूमने में पृथ्वी को 1 घण्टा लगता है। भारत का अक्षांशीय विस्तार 30° है। और इसलिए देश के सबसे पूर्वी तथा सबसे पश्चिमी भाग के बीच समय का 2 घण्टे का अंतर है। किन्तु भारत के सभी भागों में घड़ियाँ एक ही समय दिखाती हैं क्योंकि भारतीय मानक समय 82, अक्षांश के अनुसार निर्धारित किया गया है। इसलिए गुजरात और अरूणाचल प्रदेश दोनों ही राज्यों में घड़ियाँ एक ही समय दिखाती हैं।

प्रश्न 4. हिंद महासागर में भारत की केंद्रीय स्थिति से इसे किस प्रकार लाभ प्राप्त हुआ है?

उत्तर : भारतीय भूखंड पूर्वी एवं पश्चिमी एशिया के केन्द्र में स्थित है। जो भाग एशिया महाद्वीप से जुड़ा है। (भू-मार्ग एवं पर्वतीय दरों की सहायता से) वही भाग इसे उत्तर, पश्चिम एवं पूर्व दिशा में इसके पड़ोसी देशों से जोड़ता है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भाग हिन्द महासागर के अंदर दूर तक चला गया है जिससे भारत को पश्चिमी तट से पश्चिम एशियाई, अफ्रीका और यूरोप तथा दक्षिणपूर्वी एवं पूर्वी तट से पूर्व एशिया के देशों के साथ नजदीकी संबंध बनाने में मदद मिलती है।

भारत की सामरिक स्थिति ने प्राचीन समय से ही जल एवं थल मार्ग से विचारों एवं सामान के आदान-प्रदान में सहायता प्रदान की है। यही कारण है कि हिन्द महासागर में भारत की स्थिति अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

उत्तर में पर्वतों के आर-पार जाने वाले विभिन्न दरों से प्राचीन यात्रियों को आने-जाने का मार्ग मिलता था। उपनिषदों, रामायण, पंचतंत्र की कहानियों, भारतीय अंकों और देश्मलव प्रणाली संबंधित विचार इसी माध्यम से विश्व के अन्य भागों में पहुँचा था।

मसाले, मलमल और व्यापार का अन्य सामान भारत से अन्य देशों में ले जाया जाता था। दूसरी ओर यूनानी मूर्तिकला, पश्चिम एशिया से विभिन्न प्रकार के गुंबद एवं मीनार बनाने की भवननिर्माण कला देश के विभिन्न भागों में देखी जा सकती है।

हिन्द महासागर में किसी भी अन्य देश का समुद्र तट भारत जितना बड़ा नहीं हैं और वास्तव में हिन्द महासागर में भारत की महत्त्वपूर्ण स्थिति के कारण ही इस महासागर का नामकरण भारत के नाम पर किए जाने को सही ठहराता है।

मानचित्र कौशल

प्रश्न 1: दिए गए की मानचित्र की सहायता से पहचान कीजिए :


अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूह


भारतीय उपमहाद्वीप किन देशों से मिलकर बनता है?


कर्क रेखा कौन-कौन से राज्यों से गुजरती हैं?


भारतीय मुख्य भूभाग का दक्षिणी शीर्ष बिंदु।


भारत का सबसे उत्तरी अक्षांश।


भारत का सबसे पूर्वी और पश्चिमी देशांतर।


सबसे लंबी तट रेखा वाला राज्य।


भारत और श्रीलंका को अलग करने वाली जलसंधि।


भारत के केंद्र शासित क्षेत्र।


उत्तर :


लक्षद्वीप एवं अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह।


पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन (तिब्बत), नेपाल एवं भूटान, म्यांमार और बाग्लादेश


गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा एवं मिजोरम


37°6′


8°4′


68°7′ एवं 97°25


कन्याकुमारी


पाक जलडमरू


अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ, दादरा एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव, लक्षद्वीप, पांडीचेरी, दिल्ली।

NCERT Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 3 Drainage (Hindi Medium)



 NCERT Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 3 Drainage (Hindi Medium)


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प्रश्न अभ्यास

पाठ्यपुस्तक से

प्रश्न 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें।

(i) निम्नलिखित में से कौन सा वृक्ष की शाखाओं के समान अपवाह प्रतिरूप प्रणाली को दर्शाता है ?

(क) अरीय

(ख) केंद्राभिमुख

(ग) द्रुमाकृतिक

(घ) जालीनुमा

(ii) वूलर झील निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित है?

(क) राजस्थान

(ख) पंजाब

(ग) उत्तर प्रदेश

(घ) जम्मू-कश्मीर

(iii) नर्मदा नदी का उद्गम कहाँ से है?

(क) सतपुड़ा

(ख) अमरकंटक

(ग) ब्रह्मगिरी

(घ) पश्चिमी घाट के ढाल

(iv) निम्नलिखित में से कौन-सी लवणीय झील है?

(क) सांभर

(ख) वूलर

(ग) डल

(घ) गोबिंद सागर

(v) निम्नलिखित में से कौन-सी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी है ?

(क) नर्मदा

(ख) गोदावरी

(ग) कृष्णा

(घ) महानदी

(vi) निम्नलिखत नदियों में से कौन-सी नदी भ्रंश घाटी में होकर बहती है ?

(क) महानदी

(ख) कृष्णा

(ग) तुंगभद्रा

(घ) तापी

उत्तर :

(i) (ख)

(ii) (घ)

(iii) (ग)

(iv) (क)

(v) (ग)

(vi) (घ)

प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त में दीजिए –


जल विभाजक का क्या अर्थ है? एक उदाहरण दीजिए।


भारत में सबसे विशाल नदी द्रोणी कौन सी है?


सिंधु एवं गंगा नदियाँ कहाँ से निकलती हैं?


गंगा की दो मुख्य धाराओं के नाम लिखिए? ये कहाँ पर एक-दूसरे से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं?


लंबी धारा होने के बावजूद तिब्बत के क्षेत्रों में ब्रह्मपुत्र में कम गाद क्यों है?


कौन-सी दो प्रायद्वीपीय नदियाँ गर्त से होकर बहती हैं? समुद्र में प्रवेश करने के पहले वे किस प्रकार की आकृतियों का निर्माण करती हैं?


नदियों तथा झीलों के कुछ आर्थिक महत्त्व को बताएँ ।


उत्तर :

(i) कोई उच्चभूमि जैसे पर्वत जो दो पड़ोसी अपवाह द्रोणियों को अलग करता है उसे जल विभाजक कहा जाता है। उदाहरणतः सिंधु और गंगा नदी तंत्र के बीच का जल विभाजक। अंबाला इसके जल विभाजक पर स्थित है।

(ii) गंगा नदी की द्रोणी जो कि 2,500 कि0मी0 से अधिक लंबी है; भारत में सबसे बड़ी है।

(iii) सिंधु नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास से निकलती है। गंगा नदी गंगोत्री नामक हिमानी से निकलती है जो हिमालय की दक्षिणी ढलान पर स्थित है।

(iv) गंगा नदी की दो मुख्य धाराएँ भागीरथी और अलकनंदा हैं। ये उत्तराखंड के देवप्रयाग नामक स्थान पर एक-दूसरे से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं।

(v) तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी को सांपो कहा जाता है तथा तिब्बत में इसे बहुत कम पानी प्राप्त होता है इसलिए इसमें तिब्बत के क्षेत्रों में कम गाद पाई जाती है। इसके विपरीत जब यह नदी भारत में प्रवेश करती है तो यह ऐसे क्षेत्रों से गुजरती है जहाँ बहुत अधिक वर्षा होती है। यहाँ नदी बहुत अधिक पानी लेकर जाती है और इसी कारण इसमें गाद की मात्रा भी बढ़ जाती है। क्योंकि तिब्बत का मौसम ठण्डा व शुष्क है, इसलिए तिब्बत में इसे बहुत कम पानी प्राप्त होता है और इस क्षेत्र में गाद भी कम पाई जाती है।

(vi) नर्मदा एवं तापी नदियाँ दो ऐसी नदियाँ हैं जो गर्त से होकर बहती हैं तथा ज्वारनदमुख का निर्माण करती हैं।

(vii) नदियाँ एवं झीलें नदी के बहाव को नियंत्रित करती हैं। ये अति-वृष्टि के समय बाढ़ को रोकती हैं। अनावृष्टि के समय ये पानी के बहाव को बनाए रखती हैं। इनका उपयोग जलविद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। ये आस-पास की जलवायु को मृदु बनाती हैं तथा जलीय परितंत्र का संतुलन बनाए रखती हैं। ये प्राकृतिक सौंदर्य में वृद्धि करती हैं तथा पर्यटन का विकास करने में सहायता प्रदान करती हैं और मनोरंजन करती हैं।

प्रश्न 3. नीचे भारत की कुछ झीलों के नाम दिए गए हैं। इन्हें प्राकृतिक एवं मानव निर्मित वर्गों में बांटिए।

(क) वूलर

(ख) डल

(ग) नैनीताल

(घ) भीमताल

(ड.) गोविन्द सागर

(च) लोकताक

(छ) बारापानी

(ज) चिल्का

(झ) सांभर

(ञ) राणा प्रताप सागर

(ट) निजाम सागर

(ठ) पुलीकट

(ड) नागार्जुन सागर

(ढ) हीराकुण्ड

उत्तर :

प्रश्न 4. हिमालयी एवं प्रायद्वीपीय नदियों के मुख्य अंतरों को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :

प्रश्न 5. प्रायद्वीपीय पठार की पूर्व एवं पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों की तुलना कीजिए।

उत्तर : पूर्व एवं पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में अंतरः

प्रश्न 6. किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए नदियाँ महत्त्वपूर्ण क्यों हैं?

उत्तर : नदियाँ किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। कुछ बिन्दु जो नदियों की महत्ता को प्रदर्शित करते हैं वे नीचे दिए गए हैं :


नदियों से हमें प्राकृतिक ताजा मीठा पानी मिलता है जो मनुष्य सहित अधिकतर जीव-जंतुओं के जीवन के लिए आवश्यक है।


ये नई मृदा बिछाकर उसे खेती योग्य बनाती हैं जिससे बिना अधिक मेहनत के इस पर खेती की जा सके।


नदियों के तटों ने प्राचीनकाल से ही आदिवासियों को आकर्षित किया है। ये बस्तियाँ कालांतर में बड़े शहर बन गए।


ये जल के बहाव को नियंत्रित करने में सहायता करती हैं।


ये भारी वर्षा के समय बाढ़ को रोकती हैं।


ये शुष्क मौसम के दौरान पानी का एक समान बहाव बनाए रखती हैं।


इनकी सहायता से जल-विद्युत पैदा की जाती है।


ये आस-पास के वातावरण को मृदु बना देती हैं।


ये जलीय परितंत्र को बनाए रखती हैं।


ये प्राकृतिक सौन्दर्य में वृद्धि करती हैं।


ये पर्यटन का विकास करने में सहायता प्रदान करती हैं और मनोरंजन करती हैं।


मानचित्र कौशल


भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित नदियों को नामांकित कीजिए गंगा, सतलुज, दामोदर, कृष्णा, नर्मदा, तापी, महानदी एवं ब्रह्मपुत्र।


भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित झीलों को नामांकित कीजिए चिल्का, वूलर, पुलीकट, कोलेरु।


उत्तर :

क्रियाकलाप


नीचे दी गई वर्ग पहेली को हल करें ।


बाएं से दाएं:


नागार्जुन सागर नदी परियोजना किस नदी पर है?


भारत की सबसे लंबी नदी ।


ब्यास कुण्ड से उत्पन्न होने वाली नदी।


मध्य प्रदेश के बेतुल जिले से उत्पन्न होकर पश्चिम की ओर बहने वाली नदी।


पश्चिम बंगाल का ‘शोक’ के नाम से जानी जाने वाली नदी।


किस नदी से इंदिरा गांधी नहर निकाली गई है?


रोहतांग दर्रे के पास किस नदी का स्त्रोत है।


प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी।

ऊपर से नीचेः


सिंधु की सहायक नदी जिसका उद्गम स्थल हिमाचल प्रदेश में है।


भ्रंश अपवाह से होकर अरब सागर में मिलने वाली नदी।


दक्षिण भारतीय नदी, जो ग्रीष्म तथा सर्द दोनों ऋतुओं में वर्षा का जल प्राप्त करती है।


लद्दाख, गिलगित तथा पाकिस्तान से बहने वाली नदी।


भारतीय मरुस्थल की एक महत्त्वपूर्ण नदी।


पाकिस्तान में चेनाब से मिलने वाली नदी।


यमुनोत्री हिमानी से निकलने वाली नदी।


उत्तर :

बाएँ से दाएँ:


कृष्णा (KRISHNA)


गंगा (GANGA)


ब्यास (BEAS)


तापी (TAPI)


दामोदर (DAMODAR)


सतलुज (SATLUJ)


रावी (RAVI)


गोदावरी (GODAVARI)

ऊपर से नीचेः


चेनाब (CHENAB)


नर्मदा (NARMADA)


कावेरी (KAVERI)


सिंधु (INDUS)


लूनी (LUNI)


झेलम (JHELUM)


यमुना (YAMUNA)

NCERT Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 4 Climate (Hindi Medium)



 NCERT Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 4 Climate (Hindi Medium)



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प्रश्न अभ्यास

पाठ्यपुस्तक से

प्रश्न 1. बहुविकल्पीय प्रश्नः

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर का चयन करें:

(i) नीचे दिए गए स्थानों में किस स्थान पर विश्व में सबसे अधिक वर्षा होती है?

(क) सिलचर

(ख) चेरापूंजी

(ग) मासिनराम

(घ) गुवाहटी

(ii) ग्रीष्म ऋतु में उत्तरी मैदानों में बहने वाली पवन को निम्नलिखित में से क्या कहा जाता है?

(क) काल वैशाखी

(ख) व्यापारिक पवनें

(ग) लू

(घ) इनमें से कोई नहीं।

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा कारण भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में शीत ऋतु में होने वाली वर्षा के लिए उत्तरदायी है?

(क) चक्रवातीय अवदाब

(ख) पश्चिमी विक्षोभ

(ग) मानसून की वापसी

(घ) दक्षिण-पश्चिम मानसून

(iv) भारत में मानसून का आगमन निम्नलिखित में से कब होता है?

(क) मई के प्रारंभ में

(ख) जून के प्रारंभ में

(ग) जुलाई के प्रांरभ में

(घ) अगस्त के प्रारंभ में

(v) निम्नलिखित में से कौन-सी भारत में शीत ऋतु की विशेषता है?

(क) गर्म दिन एवं गर्म रातें

(ख) गर्म दिन एवं ठंडी रातें

(ग) ठंडा दिन एवं रातें

(घ) ठंडा दिन एवं गर्म रातें

उत्तरः

(i) (ख)

(ii) (ख)

(iii) (ग)

(iv) (ग)

(v) (ख)

प्रश्न 2. निम्न प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए।


भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से कारक हैं?


भारत में मानसूनी प्रकार की जलवायु क्यों है?


भारत के किस भाग में दैनिक तापामान अधिक होता है एवं क्यों?


किन पवनों के कारण मालाबार तट पर वर्षा हाती है?


जेट धाराएँ क्या हैं तथा वे किस प्रकार भारत की जलवायु को प्रभावित करती हैं?


मानसून को परिभाषित करें। मानसून में विराम से आप क्या समझते हैं?


मानसून को एक सूत्र में बाँधने वाला क्यों समझा जाता है?


उत्तर:

(i) भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक हैं – अक्षांश, तुंगता, ऊँचाई, वायु दाब एवं पवन तंत्र, समुद्र से दूरी, महासागरीय धाराएँ तथा उच्चावच लक्षण।

(ii) भोरत की जलवायु मानसून द्वारा अत्यधिक प्रभावित है। इसलिए इसकी जलवायु मानसून प्रकार की है।

(iii) भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में जिसमें भारत का मरुस्थल भी शामिल है तथा जहाँ सर्वाधिक दैनिक तापमान होता है। थार मरुस्थल में दिन का तापमान 50°C तक जा सकता है जबकि उसी रात में यह 15°C तक गिर सकता है। ऐसा इस कारण होता है क्योंकि रेत उष्मा को बहुत जल्दी अवशोषित करती है और छोड़ती है। इस तथ्य के कारण इस क्षेत्र में दिन और रात के तापमान में बहुत अधिक अंतर होता है।

(iv) मालाबार क्षेत्र पश्चिमी तट पर स्थित है। दक्षिण पश्चिमी पवनों के कारण मालाबार तट पर वर्षा होती है।

(v) क्षोभमंडल में अत्यधिक ऊँचाई पर एक संकरी पट्टी में स्थित हवाएँ होती हैं। इनकी गति गर्मी में 110 कि.मी. प्रति घंटा एवं सर्दी में 184 कि.मी. प्रति घंटा के बीच विचलन करती है। ग्रीष्म ऋतु में हिमालय के उत्तर-पश्चिमी जेट धाराओं का तथा भारतीय प्रायद्वीप के ऊपर उष्ण कटिबंधीय पूर्वी जेट धाराओं का प्रभाव होता है। हिमालय के दक्षिण में बहती उपोष्ण पश्चिमी जेट धाराएँ पश्चिमी विक्षोभों के लिए जिम्मेदार हैं जो कि देश के उत्तर एवं उत्तर-पश्चिमी भागों में सर्दियों के महीनों में वर्षा का कारण बनती हैं। देश के प्रायद्वीपीय भाग पर बहने वाली उपोष्ण पूर्वी जेट धाराएँ (उष्ण पूर्वी जेट धारा) ग्रीष्म ऋतु में उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के लिए जिम्मेदार हैं जो मानसून सहित अक्तूबर-नवंबर की अवधि के दौरान भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं।

(vi) ऋतुओं के अनुसार हवाओं की दिशा में परिवर्तन मानसून है। मानसून के आगमन के समय के आस-पास सामान्य वर्षा में अचानक वृद्धि हो जाती है जो कई दिनों तक होती रहती है। आर्द्रतायुक्त पवनों के जोरदार गर्जन व बिजली चमकने के साथ अचानक आगमन को मानसून ‘प्रस्फोट’ के नाम से जाना जाता है। वर्षा में विराम का अर्थ है कि मानसूनी वर्षा एक समय में कुछ दिनों तक ही होती है। मानसून में आने वाले ये विराम मानसूनी गर्त की गति से संबंधित होते हैं।

(vii) विभिन्न अक्षाशों में स्थित होने एवं उच्चावच लक्षणों के कारण भारत की मौसम संबंधी परिस्थितियों में बहुत अधिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं। किन्तु ये भिन्नताएँ मानसून के कारण कम हो जाती हैं क्योंकि मानसून पूरे भारत में बहती हैं। संपूर्ण भारतीय भूदृश्य, इसके जीव तथा वनस्पति, इसका कृषि-चक्र, मानव-जीवन तथा उनके त्योहार-उत्सव, सभी इस मानसूनी लय के चारों ओर घूम रहे हैं। मानसून के आगमन का पूरे देश में भरपूर स्वागत होता है। भारत में मानसून के आगमन का स्वागत करने के लिए विभिन्न त्योहार मनाए जाते हैं। मानसून झूलसाती गर्मी से राहत प्रदान करती है। मानसून वर्षा कृषि क्रियाकलापों के लिए पानी उपलब्ध कराती है। वायु प्रवाह में ऋतुओं के अनुसार परिवर्तन एवं इससे जुड़ी मौसम संबंधी परिस्थितियाँ ऋतुओं का एक लयबद्ध चक्र उपलब्ध कराती हैं जो पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधती है। ये मानसूनी पवनें हमें जल प्रदान कर कृषि की प्रक्रिया में तेजी लाती हैं एवं संपूर्ण देश को एक सूत्र में बाँधती हैं। नदी। घाटियाँ जो इन जलों का संवहन करती हैं, उन्हें भी एक नदी घाटी इकाई का नाम दिया जाता है। भारत के लोगों का संपूर्ण जीवन मानसून के इर्द-गिर्द घूमता है। इसलिए मानसून को एक सूत्र में बांधने वाला समझा जाता है।

प्रश्न 3. उत्तर भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा क्यों घटती जाती हैं?

उत्तरः हवाओं में निरंतर कम होती आर्द्रता के कारण उत्तर भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा कम होती जाती है। बंगाल की खाड़ी शाखा से उठने वाली आर्द्र पवनें जैसे-जैसे आगे, और आगे। बढ़ती हुई देश के आंतरिक भागों में जाती हैं, वे अपने साथ लाई गई अधिकतर आर्द्रता खोने लगती हैं। परिणामस्वरूप पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा धीरे-धीरे घटने लगती है। राजस्थान एवं गुजरात के कुछ भागों में बहुत कम वर्षा होती है।

प्रश्न 4. कारण बताएँ ।


भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन क्यों होता हैं?


भारत में अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनों में होती है।


तमिलनाडु तट पर शीत ऋतु में वर्षा होती है।


पूर्वी तट के डेल्टा वाले क्षेत्र में प्रायः चक्रवात आते हैं।


राजस्थान, गुजरात के कुछ भाग तथा पश्चिमी घाट का वृष्टि छाया क्षेत्र सूखा प्रभावित क्षेत्र है।


उत्तरः

(i) वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन कोरिआलिस बल के कारण होती है। भारत उत्तर-पूर्वी पवनों के क्षेत्र में आता है। ये पवनें उत्तरी गोलार्द्ध की उपोष्ण कटिबंधीय उच्चदाब पेटी से उत्पन्न होती हैं। ये दक्षिण की ओर बहती, कोरिआलिस बल के कारण दाहिनी ओर विक्षेपित होकर विषुवतीय निम्न दाब वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ती हैं। कोरिआलिस बल को ‘फेरल का नियम’ भी कहा जाता है तथा यह पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होता है। यह उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनों को दक्षिण गोलार्द्ध में बाएं ओर विक्षेपित कर देती हैं।

(ii) विषुवत रेखा को पार करने के उपरांत, दक्षिण पूर्वी व्यापारिक पवनें दक्षिण-पश्चिम की ओर बहने लगती हैं और दक्षिणपश्चिमी मानसून के रूप में प्रायद्वीपीय भारत में प्रवेश करती हैं। ये पवनें गर्म महासागरों के ऊपर से बहते हुए आर्द्रता ग्रहण करती हैं और भारत की मुख्यभूमि पर विस्तृत वर्षण लाती हैं। इस प्रदेश में, ऊपरी वायु परिसंचरण पश्चिमी प्रवाह के प्रभाव में रहता है। भारत में होने वाली वर्षा मुख्यतः दक्षिणपश्चिमी मानसून पवनों के कारण होती हैं। मानसून की अवधि 100 से 120 दिनों के बीच होती है। इसलिए देश में होने वाली अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनों में केंद्रित हैं।

(iii) सर्द ऋतु में, देश में उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें प्रवाहित होती हैं। ये स्थल से समुद्र की ओर | बहती हैं इसलिए देश के अधिकतर भाग में शुष्क मौसम होता है। यद्यपि इन पवनों के कारण तमिलनाडु के तट पर वर्षा होती है, क्योंकि वहाँ ये पवनें समुद्र से स्थल की ओर बहती हैं और अपने साथ आर्द्रता लाती हैं।

(iv) पूर्वी तट के डेल्टा वाले क्षेत्र में प्रायः चक्रवात आते हैं। ऐसा इस कारण होता है क्योंकि अंडमान सागर पर पैदा होने वाला चक्रवातीय दबाव मानसून एवं अक्तूबर-नवंबर के दौरान उपोष्ण कटिबंधीय जेट धाराओं द्वारा देश के आंतरिक भागों की ओर स्थानांतरित कर दिया जाता है। ये चक्रवात विस्तृत क्षेत्र में भारी वर्षा करते हैं। ये उष्ण कटिबंधीय चक्रवात प्रायः विनाशकारी होते हैं। गोदावरी, कृष्णा एवं कावेरी नदियों के डेल्टा प्रदेशों में अक्सर चक्रवात आते हैं, जिसके कारण बड़े पैमाने पर जान एवं माल की क्षति होती है। कभी-कभी ये चक्रवात उड़ीसा, पश्चिम बंगाल एवं बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों में भी पहुँच जाते हैं। कोरोमंडल तट पर अधिकतर वर्षा इन्हीं चक्रवातों तथा अवदाबों से होती हैं।

(v) राजस्थान, गुजरात के कुछ भाग तथा पश्चिमी घाटों के वृष्टि छाया प्रदेश सूखा संभावित होते हैं क्योंकि इनमें मानसून के दौरान बहुत कम वर्षा होती है। पवनें पर्वतों पर आर्द्रता लिए हुए आती हैं किन्तु तापमान में कमी अधिकतर आर्द्रता घाटों की पवनमुखी ढालों पर वर्षण के रूप में खो देती हैं और जब तक वे पवनविमुखी ढाल पर पहुँचती हैं तब तक वे शुष्क हो चुकी होती हैं।

प्रश्न 5. भारत की जलवायु अवस्थाओं की क्षेत्रीय विभिन्नताओं को उदाहरण सहित समझाएँ ।

उत्तरः उत्तर दिशा में हिमालय पर्वत के निर्णायक प्रभाव तथा दक्षिण में महासागर होने के बावजूद भी तापमान,

आर्द्रता एवं वर्षण में भिन्नताएँ मौजूद हैं।

(क) उदाहरणतः, गर्मियों में राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में, उत्तर-पश्चिमी भारत में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस होता है जबकि उसी समय देश के उत्तर में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में तापमान 20 डिग्री सेल्सियस हो सकता है। सर्दियों की किसी रात में जम्मू-कश्मीर के द्रास में तापमान -45 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है, जबकि तिरुवनंतपुरम् में यह 22 डिग्री सेल्सियस हो सकता है।

(ख) अण्डमान व निकोबार एवं केरल में दिन व रात के तापमान में बहुत कम भिन्नता होती है।

(ग) एक अन्य विभिन्नता वर्षण में हैं। जबकि हिमालय के ऊपरी भागों में वर्षण अधिकतर हिम के रूप में होता है, देश के शेष भागों में वर्षा होती है। मेघालय में 400 से.मी. से लेकर लद्दाख एवं पश्चिमी राजस्थान में वार्षिक वर्षण 10 से.मी. से भी कम होती है।

(घ) देश के अधिकतर भागों में जून से सितंबर तक वर्षा होती है, लेकिन कुछ क्षेत्रों जैसे तमिलनाडु तट पर अधिकतर वर्षा अक्टूबर एवं नवंबर में होती है।

(ङ) उत्तरी मैदान में वर्षा की मात्रा सामान्यतः पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है।

प्रश्न 6. मानसून अभिक्रिया की व्याख्या करें।

उत्तरः किसी भी क्षेत्र को वायु दाब एवं उसकी पवनें उस क्षेत्र की अक्षांशीय स्थिति एवं ऊँचाई पर निर्भर करती है। इस प्रकार यह तापमान एवं वर्षण के पैटर्न को भी प्रभावित करती है। भारत में जलवायु तथा संबंधित मौसमी अवस्थाएँ निम्नलिखित वायुमंडलीय अवस्थाओं से संचालित होती हैं:

(क) वायु दाब एवं धरातलीय पवनेंः पवनें उच्च-वायुदाब क्षेत्र से कम-वायुदाब क्षेत्र की ओर बहती हैं। सर्दियों में हिमालय के उत्तर में उच्च-वायुदाब क्षेत्र होता है। ठण्डी शुष्क हवाएँ इस क्षेत्र से दक्षिण में सागर के ऊपर कम वायुदाब क्षेत्र की ओर बहती हैं। गर्मियों के दौरान मध्य एशिया के साथ-साथ उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर कम वायुदाब क्षेत्र विकसित हो जाता है। परिणामस्वरूप, कम वायुदाब प्रणाली दक्षिण गोलार्द्ध की दक्षिणपूर्वी व्यापारिक पवनों को आकर्षित करती है। ये व्यापारिक पवने विषुवत रेखा को पार करने के उपरांत कोरिआलिस बल के कारण दाहिनी ओर मुड़ते हुए भारतीय उपमहाद्वीप पर स्थित निम्न दाब की ओर बहने लगती हैं। विषुवत रेखा को पार करने के बाद ये पवनें दक्षिण-पश्चिमी दिशा में बहने लगती हैं और भारतीय प्रायद्वीप में दक्षिणपश्चिमी मानसून के रूप में प्रवेश करती हैं। इन्हें दक्षिण पश्चिमी मानसून के नाम से जाना जाता है। ये पवनें गर्म महासागरों के ऊपर से बहते हुए आर्द्रता ग्रहण करती हैं और भारत की मुख्यभूमि पर विस्तृत वर्षण लाती हैं। इस प्रदेश में, ऊपरी वायु परिसंचरण पश्चिमी प्रवाह के प्रभाव में रहता है। भारत में होने वाली वर्षा मुख्यतः दक्षिणपश्चिमी मानसून पवनों के कारण होती हैं। मानसून की अवधि 100 से 120 दिनों के बीच होती है। इसलिए देश में होने वाली अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनों में केंद्रित हैं।

(ख) जेट धाराएँ: क्षोभमंडल में अत्यधिक ऊँचाई पर एक संकरी पट्टी में स्थित हवाएँ होती हैं। इनकी गति गर्मी में 110 कि.मी. प्रति घंटा एवं सर्दी में 184 कि.मी. प्रति घंटा के बीच विचलन करती है। हिमालय के उत्तर की ओर पश्चिमी जेट धाराओं की गतिविधियों एवं गर्मियों के दौरान भारतीय प्रायद्वीप पर बहने वाली पश्चिमी जेट धाराओं की उपस्थिति मानसून को प्रभावित करती है। जब उष्णकटिबंधीय पूर्वी दक्षिण प्रशांत महासागर में उच्च वायुदाब होता है तो उष्णकटिबंधीय पूर्वी हिन्द महासागर में निम्न वायुदाब होता है। किन्तु कुछ निश्चित वर्षों में वायुदाब परिस्थितियाँ विपरीत हो जाती हैं और पूर्वी प्रशांत महासागर में पूर्वी हिन्द महासागर की अपेक्षाकृत निम्न वायुदाब होता है। दाब की अवस्था में इस नियतकालिक परिवर्तन को दक्षिणी दोलन के नाम से जाना जाता है। एलनीनो, दक्षिणी दोलन से जुड़ा हुआ एक लक्षण है। यह एक गर्म समुद्री जल धारा है, जो पेरू की ठंडी धारा के स्थान पर प्रत्येक 2 या 5 वर्ष के अंतराल में पेरू तट से होकर बहती है। दाब की अवस्था में परिवर्तन का संबंध एलनीनो से है।

हवाओं में निरंतर कम होती आर्द्रता के कारण उत्तर भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा कम होती जाती है। बंगाल की खाड़ी शाखा से उठने वाली आर्द्र पवनें जैसे-जैसे आगे, और आगे बढती हुई देश के आंतरिक भागों में जाती हैं, वे अपने साथ लाई गई अधिकतर आर्द्रता खोने लगती हैं। परिणामस्वरूप पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा धीरे-धीरे घटने लगती है। राजस्थान एवं गुजरात के कुछ भागों में बहुत कम वर्षा होती है।

(ग) पश्चिमी चक्रवाती विक्षोभः हिमालय के दक्षिण से बहने वाली उपोष्ण-कटिबंधीय पश्चिमी जेट धाराएँ सर्दी के महीनों में देश के उत्तर एवं उत्तर पश्चिमी भागों में उत्पन्न होने वाले पश्चिमी चक्रवातीय विक्षोभों के लिए जिम्मेदार हैं।

प्रश्न 7. शीत ऋतु की अवस्था एवं उसकी विशेषताएँ बताएँ ।

उत्तरः उत्तरी भारत में शीत ऋतु मध्य नवंबर से आरंभ होकर फरवरी तक रहती है। इस मौसम में आसमान प्रायः साफ रहता है, तापमान कम रहता है और मन्द हवाएं चलती हैं। तापमान दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ने पर घटता जाता है। दिसंबर एवं जनवरी सबसे ठंडे महीने होते हैं। उत्तर में तुषारापात सामान्य है तथा हिमालय के उपरी ढालों पर हिमपात होता है। इस ऋतु में, देश में उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें प्रवाहित होती हैं। ये स्थल से समुद्र की ओर बहती हैं तथा इसलिए देश के अधिकतर भाग में शुष्क मौसम होता है। इन पवनों के कारण कुछ मात्रा में वर्षा तमिलनाडु के तट पर होती है, क्योंकि वहाँ ये पवनें समुद्र से स्थल की ओर बहती हैं जिससे ये अपने साथ आर्द्रता लाती हैं। देश के उत्तरी भाग में, एक कमजोर उच्च दाब का क्षेत्र बन जाता है, जिसमें हल्की पवनें इस क्षेत्र से । बाहर की ओर प्रवाहित होती हैं। उच्चावच से प्रभावित होकर ये पवन पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम से गंगा घाटी में बहती हैं। शीत ऋतु में उत्तरी मैदानों में पश्चिम एवं उत्तर-पश्चिम से चक्रवाती विक्षोभ का अंतर्वाह विशेष लक्षण है। यह कम दाब वाली प्रणाली भूमध्यसागर एवं पश्चिमी एशिया के ऊपर उत्पन्न होती है तथा पश्चिमी पवनों के साथ भारत में प्रवेश करती है। इसके कारण शीतकाल में मैदानों में वर्षा होती है तथा पर्वतों पर हिमपात, जिसकी उस समय बहुत अधिक आवश्यकता होती है। यद्यपि शीतकाल में वर्षा की कुल मात्रा कम होती है, लेकिन ये रबी फसलों के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण होती है।

प्रश्न 8. भारत में होने वाली मानसूनी वर्षा एवं उसकी विशेषताएँ बताएँ।

उत्तर: भारत में होने वाली मानसूनी वर्षा की विशेषताएँ:

(क) मानसून की अवधि जून के प्रारंभ से सितंबर के मध्य तक 100 से 120 दिन के बीच होती है।

(ख) इसके आगमन के आस-पास सामान्य वर्षण में अचानक वृद्धि हो जाती है। यह कई दिनों तक लगातार होती रहती है। आर्द्रतायुक्त पवनों के जोरदार गर्जन व बिजली चमकने के साथ अचानक आगमन को मानसून ‘प्रस्फोट’ के नाम से जाना जाता है।

(ग) मानसून में आई एवं शुष्क अवधियाँ होती हैं जिन्हें वर्षण में विराम कहा जाता है।

(घ) वार्षिक वर्षा प्रतिवर्ष अत्यधिक भिन्नता होती है।

(ङ) यह कुछ पवनविमुखी ढलानों एवं मरुस्थल को छोड़कर भारत के शेष क्षत्रों को पानी उपलब्ध कराती है।

(च) वर्षा का वितरण भारतीय भूदृश्य में अत्यधिक असमान है। मौसम के प्रारंभ में पश्चिमी घाटों की पवनमुखी ढालों पर भारी वर्षा होती है अर्थात् 250 से0मी0 से अधिक। दक्कन के पठार के वृष्टि छाया क्षेत्रों एवं मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, लेह में बहुत कम वर्षा होती है। सर्वाधिक वर्षा देश के उत्तरपूर्वी क्षेत्रों में होती है।

(छ) उष्णकटिबंधीय दबाव की आवृत्ति एवं प्रबलता मानसून वर्षण की मात्रा एवं अवधि को निर्धारित करते हैं।

(ज) भारत के उत्तर पश्चिमी राज्यों से मानसून सितंबर के प्रारंभ में वापसी शुरू कर देती हैं। अक्तूबर के मध्य तक यह देश के उत्तरी हिस्से से पूरी तरह लौट जाती है। और दिसंबर तक शेष भारत से भी मानसून लौट जाता है।

(झ) मानसून को इसकी अनिश्चितता के कारण भी जाना जाता है। जहाँ एक ओर यह देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ ला देता है, वहीं दूसरी ओर यह देश के कुछ हिस्सों में सूखे का कारण बन जाता है।

भारत में मानसूनी वर्षा के प्रभाव


(क) भारतीय कृषि मुख्य रूप से मानसून से प्राप्त पानी पर निर्भर है। देरी से, कम या अधिक मात्रा में वर्षा का फसलों पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।


(ख) वर्षा के असमान वितरण के कारण देश में कुछ सूखा संभावित क्षेत्र हैं जबकि कुछ बाढ़ से ग्रस्त रहते हैं।


(ग) मानसून भारत को एक विशिष्ट जलवायु पैटर्न उपलब्ध कराती है। इसलिए विशाल क्षेत्रीय भिन्नताओं की उपस्थिति के बावजूद मानसून देश और इसके लोगों को एकता के सूत्र में पिरोने वाला प्रभाव डालती है।


मानचित्र कौशल

भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित को दर्शाएँ

(क) 400 सें.मी. से अधिक वर्षा वाले क्षेत्र

(ख) 20 सें.मी. से कम वर्षा वाले क्षेत्र

(ग) भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दिशा

उत्तरः (क) और (ख)

NCERT Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 5 Natural Vegetation and Wildlife (Hindi Medium)


 

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प्रश्न अभ्यास

पाठ्यपुस्तक से

प्रश्न 1. वैकल्पिक प्रश्न

(i) रबड़ का संबंध किस प्रकार की वनस्पति से है?

(क) टुंड्रा

(ख) हिमालय

(ग) मैंग्रोव

(घ) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन

(ii) सिनकोना के वृक्ष कितनी वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं?

(क) 100 से.मी.

(ख) 70 से.मी.

(ग) 50 से.मी.

(घ) 50 से.मी. से कम वर्षा

(iii) सिमलीपाल जीव मंडल निचय कौन से राज्य में स्थित है?

(क) पंजाब

(ख) दिल्ली

(ग) उडीसा

(घ) पश्चिमी बंगाल

(iv) भारत में कौन-से जीव मंडल निचय विश्व के जीव मंडल निचयों के लिए नए हैं?

(क) मानस

(ख) मत्रार की खाड़ी।

(ग) दिहांग-दिबांग

(घ) नंदादेवी

उत्तर:

(i) (घ)

(ii) (क)

(iii) (ग)

(iv) (क)

प्रश्न 2. संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्नः

(क) पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं?

(ख) भारत में पादपों तथा जीवों का वितरण किन तत्त्वों द्वारा निर्धारित होता है?

(ग) जीव मंडल निचय से क्या अभिप्राय है। कोई दो उदाहरण दो।

(घ) कोई दो वन्य प्राणियों के नाम बताइए जो कि उष्ण कटिबंधीय वर्षा और पर्वतीय वनस्पति में मिलते हैं।

उत्तरः (क) किसी भी क्षेत्र के पादप तथा प्राणी आपस में तथा अपने भौतिक पर्यावरण से अंर्तसंबंधित होते हैं और एक पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण करते हैं। पारिस्थितिक तंत्र भौतिक पर्यावरण तथा इसमें निवास करने वाले जीव जंतुओं की पारस्परिक निर्भरता का तंत्र है। मनुष्य भी इस पारिस्थितिक तंत्र का अविच्छिन्न भाग है। वह वनस्पति तथा वन्य जीवों का प्रयोग करता है।

(ख) भारत में पादपों तथा जीवों का वितरण निर्धारित करने वाले तत्त्व हैं:

(ग) जीव मंडल निचय (Bio-reserve): एक संरक्षित जीव मंडल जिसका संरक्षण इस प्रकार किया जाता है कि न केवल इसकी जैविक भिन्नता संरक्षित की जाती है अपितु इसके संसाधनों का प्रयोग भी स्थानीय समुदायों के लाभ हेतु टिकाऊ तरीके से किया जाता है। उदाहरण, नीलगिरी, सुंदरबन।

(घ) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों में पाये जाने वाले पशुओं में हाथी, बंदर, लैमूर, एक सींग वाले गैंडे और हिरण हैं। पर्वतीय वनों में प्रायः कश्मीरी महामृग, चितरा हिरण, जंगली भेड़, खरगोश, तिब्बतीय बारहसिंघा, याक, हिम तेंदुआ, गिलहरी, रीछ, आइबैक्स, कहीं-कहीं लाल पांडा, घने बालों वाली भेड़ तथा बकरियाँ पाई जाती हैं।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में अंतर कीजिए:

(क) वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत

(ख) सदाबहार और पर्णपाती वन

उत्तरः (क)

(ख)

प्रश्न 4. भारत में विभिन्न प्रकार की पाई जाने वाली वनस्पति के नाम बताएँ और अधिक ऊँचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति का ब्यौरा दीजिए।

उत्तरः भारत में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की वनस्पति इस प्रकार है:

(क) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन

(ख) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन

(ग) उष्ण कटिबंधीय कंटीले वन तथा झाड़ियाँ

(घ) पर्वतीय वन

(ङ) मैंग्रोव वन

उच्च प्रदेशों की वनस्पतिः

(क) पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान की कमी तथा ऊँचाई के साथ-साथ प्राकृतिक वनस्पति में भी अंतर दिखाई देता है। वनस्पति में जिस प्रकार का अंतर हम उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों से टुंड्रा की ओर देखते हैं उसी प्रकार का अंतर पर्वतीय भागों में ऊँचाई के साथ-साथ देखने को मिलता है।

(ख) 1000 मी. से 2000 मी. तक की ऊँचाई वाले क्षेत्रों में आई शीतोष्ण कटिबंधीय वन पाए जाते हैं। इनमें चौड़ी पत्ती वाले ओक तथा चेस्टनट जैसे वृक्षों की प्रधानता होती है।

(ग) 1500 से 3000 मी. की ऊँचाई के बीच शंकुधारी वृक्ष जैसे चीड़, देवदार, सिल्वर–फर, स्पूस, सीडर आदि पाए जाते हैं।

(घ) ये वन प्रायः हिमालय की दक्षिणी ढलानों, दक्षिण और उत्तर-पूर्व भारत के अधिक ऊँचाई वाले भागों में पाए जाते हैं।

(ङ) अधिक ऊँचाई पर प्रायः शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान पाए जाते हैं। प्रायः 3600 मी. से अधिक ऊँचाई पर शीतोष्ण कटिबंधीय वनों तथा घास के मैदानों का स्थान अल्पाइन वनस्पति ले लेती है। सिल्वर–फर, जूनिपर, पाइन व बर्च इन वनों के मुख्य वृक्ष हैं।

प्रश्न 5. भारत में बहुत संख्या में जीव और पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं। उदाहरण सहित कारण दीजिए।

उत्तरः मनुष्य के लालच के कारण जीवों तथा पादपों को अति दोहन हो रहा है। मनुष्य पेड़ों को काटकर तथा पशुओं को मारकर पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन पैदा कर रहा है। इसके कारण बहुत से जीव और पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं।

प्रश्न 6. भारत वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत की धरोहर में धनी क्यों है?

उत्तरः भारत में पृथ्वी की लगभग सभी भौतिक विशेषताएं मौजूद हैं। जैसे–पर्वत, मैदान, मरुस्थल, पठार एवं द्वीप आदि। ये पांचों कारक भारत में वनस्पति जगत एवं प्राणी जगत की वृद्धि एवं विकास के लिए या जैविक विविधता के लिए अनुकूल हैं। हमारा देश भारत विश्व के मुख्य 12 जैव विविधता वाले देशों में से एक है। लगभग 47000 विभिन्न जातियों के पौधे पाए जाने के कारण यह देश विश्व में दसवें स्थान पर और एशिया के देशों में चौथे स्थान पर है। भारत में लगभग 15000 फूलों के पौधे हैं जो कि विश्व में फूलों के पौधे का 6 प्रतिशत है। इस देश में बहुत से बिना फूलों के पौधे हैं। जैसे फर्न, शवाल (एलेगी) तथा कवक (फंजाई) भी पाए जाते हैं। भारत में लगभग 89000 जातियों के जानवर तथा ताजे तथा समद्री पानी की विभिन्न प्रकार की मछलियाँ पाई जाती हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की मृदा, आर्द्रता एवं तापमान में अत्यधिक भिन्नता के साथ अलग-अलग प्रकार का वातावरण पाया जाता है। पूरे देश में वर्षा का वितरण भी असमान है। वनस्पति जगत एवं प्राणी की जगत की विभिन्न प्रजातियों को अलग-अलग प्रकार की वातावरण संबंधी परिस्थितियाँ, विभिन्न प्रकार की मृदा चाहिए होती है। इसलिए भारत वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत की धरोहर में धनी है।

मानचित्र कौशल

प्रश्न 1. भारत के मानचित्र पर निम्नलिखित दिखाएँ और अंकित करें

(क) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन

(ख) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन

(ग) दो जीव मंडल निचय भारत के उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी भागों में।

उत्तरः (क) और (ख)।

NCERT Solutions for Class 9 Social Science Geography Chapter 6 Population (Hindi Medium)


 

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प्रश्न अभ्यास

पाठ्यपुस्तक से

प्रश्न 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में सही विकल्प चुनिए:

(i) निम्नलिखित में से किसी क्षेत्र में प्रवास, आबादी की संख्या, वितरण एवं संरचना में परिवर्तन लाता है।

(क) प्रस्थान करने वाले क्षेत्र में

(ख) आगमन वाले क्षेत्र में

(ग) प्रस्थान एवं आगमन दोनों क्षेत्रों में

(घ) इनमें से कोई नहीं।

(ii) जनसंख्या में बच्चों का एक बहुत बड़ा अनुपात निम्नलिखित में से किसका परिणाम है?

(क) उच्च जन्म दर

(ख) उच्च मृत्यु दर

(ग) उच्च जीवन दर

(घ) अधिक विवाहिता जोडे

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक जनसंख्या वृद्धि का परिमाण दर्शाता है?

(क) एक क्षेत्र की कुल जनसंख्या

(ख) प्रत्येक वर्ष लोगों की संख्या में होने वाली वृद्धि

(ग) जनसंख्या वृद्धि की दर

(घ) प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या

(iv) 2001 की जनसंख्या के अनुसार एक साक्षर व्यक्ति वह है।

(क) जो अपने नाम को पढ़ एवं लिख सकता है।

(ख) जो किसी भी भाषा में पढ़ एवं लिख सकता है।

(ग) जिसकी उम्र 7 वर्ष है तथा वह किसी भी भाषा को समझ के साथ पढ़ एवं लिख सकता है।

(घ) जो पढ़ना-लिखना एवं अंकगणित, तीनों जानता है।

उत्तरः

(i) (ग)

(ii) (क)

(iii) (ख)

(iv) (ग)

प्रश्न 2. निम्नलिखित के उत्तर संक्षेप में दें।

(क) जनसंख्या वृद्धि के महत्त्वपूर्ण घटकों की व्याख्या करें।

(ख) 1981 से भारत में जनसंख्या की वृद्धि दर क्यों घट रही है?

(ग) आयु संरचना, जन्म दर एव मृत्यु दर को परिभाषित करें।

(घ) प्रवास, जनसंख्या परिवर्तन का एक कारक।

उत्तर : (क) जनसंख्या वृद्धि के महत्त्वपूर्ण घटक जन्म दर, मृत्यु दर एवं प्रवास हैं।


जन्म दर (Birth Rate): एक वर्ष के दौरान 1000 लोगों पर जीवित पैदा हुए बच्चों की संख्या। यह जनसंख्या के आकार तथा घनत्व दोनों में वृद्धि करती है। यदि किसी वर्ष के दौरान जन्मों की संख्या मृतकों की संख्या से अधिक हो तो उस वर्ष के दौरान कुल जनसंख्या में वृद्धि हो जाएगी।


मृत्यु दर (Death rate): यह एक वर्ष के दौरान 1000 लोगों पर मृतकों की संख्या को प्रदर्शित करती है। यह जनसंख्या के आकार तथा घनत्व दोनों में कमी ला देता है। यदि किसी वर्ष के दौरान मृतकों की संख्या जन्मों की संख्या से अधिक हो तो उस वर्ष के दौरान कुल जनसंख्या में कमी हो जाएगी।


प्रवास (Migration): लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाने को प्रवास कहते हैं। जनसंख्या वितरण एवं उसके घटकों को परिवर्तित करने में प्रवास की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि यह आगमन तथा प्रस्थान दोनों ही स्थानों के जनसांख्यिकीय आंकड़ों को प्रभावित करता है। प्रवास आंतरिक (देश के भीतर) या अंतर्राष्ट्रीय (देशों के बीच) हो सकता है। आंतरिक प्रवास जनसंख्या के आकार में परिवर्तन नहीं करता लेकिन देश में जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करता है।


(ख) 1981 से भारत में जन्म दर धीरे-धीरे घट रही है। इसके परिणामस्वरूप जनसंख्या वृद्धि में धीरे-धीरे कमी आ रही है।

(ग) आयु संरचनाः किसी देश में जनसंख्या की आयु संरचना वहाँ के विभिन्न आयु समूहों के लोगों की संख्या को बताता है। यह जनसंख्या की मूल विशेषताओं में से एक है।


जन्म दर (Birth rate): एक वर्ष के दौरान 1000 लोगों पर जीवित पैदा हुए बच्चों की संख्या ।


मृत्यु दर (Death rate): एक वर्ष के दौरान 1000 लोगों पर मृतकों की संख्या को प्रदर्शित करता है।


(घ) प्रवास (Migration): लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाने को प्रवास कहते हैं। जनसंख्या वितरण एवं उसके घटकों को परिवर्तित करने में प्रवास की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि यह आगमन तथा प्रस्थान दोनों ही स्थानों के जनसांख्यिकीय आंकड़ों को प्रभावित करता है। प्रवास आंतरिक (देश के भीतर) या अंतर्राष्ट्रीय (देशों के बीच) हो सकता है। आंतरिक प्रवास जनसंख्या के आकार में परिवर्तन नहीं करता लेकिन देश में जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करता है।


प्रवास जनसंख्या के गठन एवं वितरण में बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


भारत में अधिकतर प्रवास ग्रामीण क्षेत्रों से ‘अपकर्षण (Push) कारक प्रभावी होते हैं। ये ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी एवं बेरोजगारी की प्रतिकूल अवस्थाएँ हैं तथा नगर का ‘कर्षण’ (Pull) प्रभाव रोजगार में वृद्धि एवं अच्छे जीवन स्तर को दर्शाता है। 1951 में शहरी जनसंख्या 17.29 प्रतिशत थी जो 2001 में बढ़कर 27.78 प्रतिशत हो गई।


1991 से 2001 के बीच एक ही दशक के दौरान “दस लाख से अधिक” की जनसंख्या वाले महानगर 23 से बढकर 35 हो गए हैं।


प्रश्न 3. जनसंख्या वृद्धि एवं जनसंख्या परिवर्तन के बीच अंतर स्पष्ट करें।

उत्तरः

प्रश्न 4. व्यावसायिक संरचना एवं विकास के बीच क्या संबंध है?

उत्तरः विभिन्न प्रकार के व्यवसायों के अनुसार किए गए जनसंख्या के वितरण को व्यावसायिक संरचना कहा जाता है। व्यवसायों को सामान्यतः प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। व्यवसायों को प्रायः प्राथमिक (कृषि, खनन, मछलीपालन आदि) द्वितीयक (उत्पादन करने वाले उद्योग, भवन एवं निर्माण कार्य) एवं तृतीयक (परिवहन, संचार, वाणिज्य, प्रशासन तथा सेवाएँ) श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। विकसित एवं विकासशील देशों में द्वितीयक एवं तृतीयक व्यवसायों में कार्य करने वाले लोगों का अनुपात अधिक होता है। विकासशील देशों में प्राथमिक क्रियाकलापों में कार्यरत लोगों का अनुपात अधिक होता है। भारत में कुल जनसंख्या का 64 प्रतिशत भाग केवल कृषि कार्य करता है। द्वितीयव, एवं तृतीयक क्षेत्रों में कार्यरत लोगों की संख्या का अनुपात क्रमशः 13 तथा 20 प्रतिशत है। वर्तमान समय में बढ़ते हुए औद्योगीकरण एवं शहरीकरण में वृद्धि होने के कारण द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों में व्यावसायिक परिवर्तन हुआ है।

प्रश्न 5. स्वस्थ जनसंख्या कैसे लाभकारी है?

उत्तरः स्वास्थ्य जनसंख्या की संरचना का एक महत्त्वपूर्ण घटक है जो कि विकास की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। स्वस्थ जनसंख्या राष्ट्र के लिए एक परिसंपत्ति होती है। एक अस्वस्थ व्यक्ति की अपेक्षाकृत स्वस्थ व्यक्ति अधिक उत्पादनशील तथा दक्ष होता है। वह अपने सामर्थ्य को क्रियान्वित कर सकता/सकती है तथा समाज एवं देश के विकास में अपना योगदान दे सकता/सकती है। सरकारी कार्यक्रमों के निरंतर प्रयास के द्वारा भारत की जनसंख्या के स्वास्थ्य स्तर में महत्त्वपूर्ण सुधार हुआ है। परिणामस्वरूप, मृत्यु दर जो 1951 में (प्रति हजार) 25 थी, 2001 में घटकर (प्रति हजार) 8.1 रह गई है। जीवन प्रत्याशा जो कि 1951 में 36.7 वर्ष थी, बढ़कर 2001 में 64.6 वर्ष हो गई है।