Showing posts with label Summary. Show all posts

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 3 गब्बर | Class 10 Hindi Chapter 3 Summary, Question Answers, Explanation

  पाठ्य पुस्तक प्रश्न

प्रश्न 1.
इफ़्फ़न टोपी शुक्ला की कहानी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा किस तरह से है?
उत्तर:
इफ्फ़न और टोपी शुक्ला अत्यंत घनिष्ठ दोस्त थे। उनकी दोस्ती उस समय हुई जब वे चौथी कक्षा में पढ़ते थे। अलग अलग जाति धर्म के होने के बाद भी उनमें जैसी मित्रता थी, वह अपने आप में अनुकरणीय थी। उनकी मित्रता आदर्श के चरम को छू रही थी। वे एक-दूसरे को दुख-दर्द समझते हैं और एक-दूसरे के प्रति घनिष्ठ लगाव और अपनापन महसूस करते हैं। इफ्फ़न के पिता के स्थानांतरण के बाद इफ़्फ़न से बिछुड़कर टोपी शुक्ला उदास रहता है और उसी दिन ठान लेता है कि किसी ऐसे लड़के से दोस्ती नहीं करेगा जिसके पिता नौकरी करते हों। इस तरह इफ्फ़न टोपी शुक्ला कहानी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रश्न 2.
इफ्फ़न की दादी अपने पीहर क्यों जाना चाहती थीं?
उत्तर:
इफ्फन की दादी ज़मींदार की बेटी थी। पीहर का घी-दूध, फलों के पेड़, कच्ची हवेली आदि उन्हें हमेशा याद आते रहते थे। यहाँ का मौलवी परिवार का वातावरण उन्हें कभी रास नहीं आया। अतः वे अपने पीहर जाना चाहती थीं।

प्रश्न 3.
इफ्फ़न की दादी अपने बेटे की शादी में गाने-बजाने की इच्छा पूरी क्यों नहीं कर पाईं?
उत्तर:
इफ़्फ़न की दादी का विवाह लखनऊ में मौलवी के साथ हुआ था। एक मौलवी के घर में नाच-गाना, बजाना, जलसा आदि बहुत ही कम होता है। इस कारण वे अपने बेटे की शादी में गाने-बजाने की इच्छा चाहकर भी न पूरी कर पाई।

प्रश्न 4.
“अम्मी’ शब्द पर टोपी के घर वालों की क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर:
टोपी के ‘अम्मी’ शब्द कहते ही उसके घरवालों की परंपराओं की दीवारें डोलने लगीं। सभी की आँखें उसके चेहरे पर जम गईं कि उनकी संस्कृति के विपरीत यह शब्द इस घर में कैसे आ गया? जब टोपी ने बताया कि उसने यह शब्द अपने दोस्त इफ़्फ़न के घर से सीखा है, तो माँ और दादी ने उसकी खूब पिटाई की अर्थात् सभी घरवालों की प्रताड़ना भरी प्रतिक्रिया उसके खिलाफ़ थी।

प्रश्न 5.
दस अक्तूबर सन् पैंतालीस का दिन टोपी के जीवन में क्या महत्त्व रखता है?
उत्तर:
दस अक्तूबर सन् पैंतालीस का दिन टोपी की जिंदगी में विशेष महत्त्व रखता है। इसी दिन उसके सबसे प्रिय मित्र इफ़्फ़न के पिता का तबादला मुरादाबाद हो गया। इससे वह इफ्फ़न से अलग होने के लिए विवश हो गया। अब वह अकेला और उदास-सा रहने लगा।

प्रश्न 6.
टोपी ने इफ्फ़न से दादी बदलने की बात क्यों कही?
उत्तर:
इफ़्फ़न की दादी टोपी की दादी की भाँति कठोर एवं अनुशासनप्रिय नहीं थी, बल्कि वह स्नेहपूर्ण व्यवहार करती थी और टोपी को अपने पास बैठाकर बातें करती थी। उनकी भाषा तथा टोपी की माता की भाषा भी एक जैसी थी। अतः टोपी दादी बदलना चाहता था।

प्रश्न 7.
पूरे घर में इफ्फ़न को अपनी दादी से ही विशेष स्नेह क्यों था?
उत्तर:
इफ़्फ़न की दादी का स्वभाव बहुत अच्छा था। वे इफ़्फ़न को ही नहीं उसके मित्र टोपी को स्नेह देती थी। उन्होंने इफ्फ़न को कभी डाँटा नहीं। वे इफ्फ़न को रात में बहराम डाकू, अनार परी, बारह बुर्ज, अमीर हमज़ा, गुलबकावली हातिमताई पंचफुल्लारानी की कहानियाँ सुनाया करती थी। उसे अब्बू अम्मी और बाजी से कभी-कभार डाँट-फटकार मिलती थी, परंतु दादी ने उसे कभी डाँटा-डपटा नहीं। यही कारण है कि इफ्फ़न को उसकी दादी से ही विशेष स्नेह मिला।

प्रश्न 8.
इफ्फ़न की दादी के देहांत के बाद टोपी को उसका घर खाली-सा क्यों लगा?
उत्तर:
इफ़्फ़न की दादी के देहांत के बाद टोपी को उसका घर खाली-सा इसलिए लगने लगा, क्योंकि उसके घर में दादी ही उसे सबसे अच्छी लगती थी। टोपी इफ़्फ़न के घर जाने पर उसकी दादी के पास बैठा रहता था। दादी भी उसे बहुत प्यार करती थी। अब उसके घर में इफ्फ़न के अलावा उसका अपना कोई नहीं था।

प्रश्न 9.
टोपी और इफ्फ़न की दादी अलग-अलग मज़हब और जाति के थे, पर एक अनजान अटूट रिश्ते से बँधे थे। इस कथन के आलोक में अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
टोपी और इफ्फ़न की दादी अलग-अलग मजहब और जाति के थे पर एक अनजान अटूट रिश्ते से बँधे थे। वास्तव में टोपी में और इफ्फ़न की दादी प्यार के उस मज़बूत और अटूट रिश्ते से जुड़े थे, जो उम्र, जाति और धर्म का बंधन नहीं मानता है। टोपी और दादी ने एक-दूसरे का दुख समझा। उन्हें एक-दूसरे से अपनापन मिला। उनके रिश्ते में किसी तरह का स्वार्थ नहीं था। टोपी, दादी के पास आकर अपने सारे दुख भूल जाता था और दादी को भी टोपी के रूप में उन्हें समझने वाला कोई मिल जाता था।

प्रश्न 10.
टोपी नवीं कक्षा में दो बार फेल हो गया। बताइए-
(क) ज़हीन होने के बावजूद भी कक्षा में दो बार फेल होने के क्या कारण थे?
(ख) एक ही कक्षा में दो-दो बार बैठने से टोपी को किन भावात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
(ग) टोपी की भावात्मक परेशानियों को मद्देनज़र रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक बदलाव सुझाइए।
उत्तर:
(क) टोपी के ज़हीन (बुधिमान) होने के बावजूद भी नवीं कक्षा में दो बार फेल होने के निम्नलिखित कारण थे-

  1. पहले साल तो वह पढ़ ही नहीं पाया, क्योंकि घर का प्रत्येक सदस्य उससे अपना-अपना निजी कार्य करवाता रहता था, जिससे उसे पढ़ने का समय ही नहीं मिल पाता था।

  2. दूसरे वर्ष उसे टाइफाइड हो गया था, इसलिए वह पढ़ाई न कर सका और पास न हो सका अर्थात् दोनों साल वह किसी न किसी कारणवश पढ़ नहीं पाया, जो उसकी असफलता के कारण बने।

(ख) एक ही कक्षा में दो-दो बार बैठने से टोपी को बहुत-सी भावात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।
जैसे-मास्टर जी जब कमज़ोर लड़कों को समझाते, तो उसका ही उदाहरण दिया जाता कि क्या बात है राम अवतार (या कोई भी बच्चा) बलभद्र की तरह इसी दर्जे में टिके रहना चाहते हो?’ मास्टर जी के ऐसा कहते ही सभी जोरों से हँसने लगते। हँसने वाले वे होते, जो पिछले साल उससे पीछे थे। अगले साल भी उसे उसी कक्षा में बैठना पड़ा, तो वह बिलकुल ही भोंदू हो गया, क्योंकि उसका कोई दोस्त नहीं रह गया था। आठवीं कक्षा वाले दसवीं कक्षा में थे, तो सातवीं वाले बच्चे उसके साथ थे। वह अपने भरे-पूरे घर की तरह स्कूल में भी अकेला हो गया था। मास्टरों ने भी उसपर ध्यान देना छोड़ दिया था। उससे कक्षा में कोई सवाल न पूछा जाता था। कई लड़के ऐसे-ऐसे कटाक्ष करते कि वह बिलबिला उठता। घर में भी दादी, माँ, भाई आदि के तीखे बाण सहने पड़ते।

(ग) टोपी जैसे बालकों की भावात्मक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में जो आवश्यक बदलाव होने चाहिए, उनमें प्रमुख हैं-टोपी जैसी भावात्मक परेशानियों से पीड़ित विद्यार्थियों पर माता-पिता तथा शिक्षकगण विशेष ध्यान दें। उनके साथ माता-पिता तथा शिक्षकों का सहानुभूति तथा प्यार भरा उपचारात्मक व्यवहार होना चाहिए। विद्यालयों में हतोत्साह की जगह प्रोत्साहन होना चाहिए, सफलता और असफलता दोनों ही जीवन के पहलू हैं, यह उन्हें समझाया जाना चाहिए। शिक्षा के लिए विशेष प्रबंध होना चाहिए, जैसे-उपचारात्मक शिक्षा प्रणाली वस्तुनिष्ठ प्रश्नावली तथा दिलचस्पी से पढ़े जाने वाले विषय हो। साथ ही वैकल्पिक शिक्षा की ओर भी रुझान होना चाहिए।

प्रश्न 11.
इफ्फ़न की दादी के मायके को घर कस्टोडियन में क्यों चला गया?
उत्तर:
इफ़्फ़न की दादी की बातचीत से लगता था कि वह पूरब अर्थात् लखनऊ से पूरब किसी स्थान की रहने वाली थीं। उनका विवाह लखनऊ के एक मौलवी परिवार में हो गया। देश में जब विभाजन हुआ तब उनके मायके वाले अपना घर जमीन आदि छोड़कर पाकिस्तान जा बसे। परिवार के सभी सदस्यों के चले जाने से उनका घर लावारिस हो गया और कस्टोडियन में चला गया।



NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 2 सौदागर | Class 10 Hindi Chapter 2 Summary, Question Answers, Explanation

  पाठ्य पुस्तक प्रश्न

प्रश्न 1.
कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती-पाठ के किस अंश से सिद्ध होता है?
उत्तर:
‘कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती’—यह पाठ के निम्नलिखित अंश से सिद्ध होता है-
हमारे आधे से अधिक साथी राजस्थान या हरियाणा से आकर मंडी में व्यापार या दुकानदारी करने आए परिवारों से थे। जब बहुत छोटे थे तो उनकी बोली कम समझ पाते। उनके कुछ शब्द सुनकर हमें हँसी आने लगती, परंतु खेलते तो सभी एक-दूसरे की बात खूब अच्छी तरह समझ लेते।

प्रश्न 2.
पीटी साहब की ‘शाबाश’ फौज के तमगों-सी क्यों लगती थी ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पीटी साहब बिल्ला मार-मारकर बच्चों की चमड़ी तक उधेड़ देते थे। यहाँ तक कि तीसरी-चौथी कक्षाओं के बच्चों से थोड़ा-सा भी अनुशासन भंग हो जाने पर उन्हें कठोर सज़ा देते थे। ऐसे कठोर स्वभाव वाले पीटी साहब जब बच्चे कोई गलती न करते, तो वे अपनी चमकीली आँखें हलके से झपकाते हुए उन्हें ‘शाबाश’ कहते थे। उनकी यह ‘शाबाश’ बच्चों को फ़ौज के सारे तमगों को जीतने के समान लगती थी, अर्थात् मानों उनकी कोई बहुत बड़ी तरक्की हो गई हो, ऐसा महसूस करते थे।

प्रश्न 3.
नयी श्रेणी में जाने और नयी कापियों और पुरानी किताबों से आती विशेष गंध से लेखक का बालमन क्यों उदास हो उठता था?
उत्तर:
नई श्रेणी में जाने पर प्रायः बच्चों के मन में एक नया उल्लास, उत्साह एवं लगन रहती है। नई पुस्तकों के नए पाठ्यक्रम के प्रति उनमें एक उत्साह होना चाहिए, परंतु नई कापियों और पुरानी पुस्तकों की गंध से लेखक का मन इसलिए उदास हो जाता था, क्योंकि-

  • अगली कक्षा की कठिन पढाई मन को भयभीत करती थी।

  • नए अध्यापकों की अपेक्षा पर खरा न उतर पाने पर पिटाई का भय सताता रहता था।

प्रश्न 4.
स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्त्वपूर्ण आदमी’ फौजी जवान क्यों समझने लगता था?
उत्तर:
जब पीटी साहब स्काउटों को परेड करवाते थे, तो लेफ़्ट-राइट की आवाज़ या सीटी बजाकर मार्च करवाया करते थे तथा उनके राइट टर्न या लेफ़्ट टर्न या अबाऊट टर्न कहने पर लेखक अपने छोटे-छोटे बूटों की एड़ियों पर दाएँ-बाएँ या एकदम पीछे मुड़कर बूटों की ठक-ठक की आवाज़ करते हुए लेखक स्वयं को विद्यार्थी न समझकर एक महत्त्वपूर्ण ‘आदमी’ फ़ौजी जवान समझने लगता था।

प्रश्न 5.
हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअत्तल कर दिया?
उत्तर:
हेडमास्टर साहब बच्चों की पिटाई के बिलकुल विरुद्ध थे। वे बच्चों को न दंडित करते थे और न दंड पाते उन्हें देख सकते थे। हेडमास्टर साहब ने देखा कि पीटी मास्टर फारसी पढ़ाते हुए शब्द रूप न सुना पाने के कारण अत्यंत क्रूरतापूर्वक मुरगा बना रखा है तथा उन्हें पीठ ऊँची करने का आदेश भी दे रखा है। चौथी कक्षा के छात्रों को ऐसा दंड देना हेडमास्टर को अत्यंत यातनापूर्ण लगा। उन्होंने इसे तुरंत रोकने का आदेश देते हुए पीटी मास्टर प्रीतमचंद को मुअत्तल कर दिया।

प्रश्न 6.
लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल खुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?
उत्तर:
लेखक और उसके साथियों को स्कूल ऐसी जगह कतई नही लगता था कि वे भागकर खुशी-खुशी से जाएँ, क्योंकि उनके मन में स्कूल के प्रति एक प्रकार का भय समाया हुआ था, लेकिन तीसरी-चौथी श्रेणी में इंडियाँ पकड़कर व धुली हुई वर्दी तथा चमकते हुए जूते पहनकर स्काउटिंग परेड करना, गलती न होने पर पीटी साहब से ‘शाबाश’ सुनना लेखक को विद्यालय जाने के लिए प्रेरित करता था।

प्रश्न 7.
लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुटूटियों में मिले काम को पूरा करने के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाया करता था और उसे पूरा न कर पाने की स्थिति में किसकी भाँति ‘बहादुर’ बनने की कल्पना किया करता था?
उत्तर:
लेखक के छात्र जीवन में गरमी की छुट्टियाँ डेढ़ या दो महीने की होती थी। इसके आरंभ के दो-तीन हफ़्तों तक खूब खेलकूद और मस्ती करते हुए लेखक अपने साथियों संग समय बिताता फिर नानी के घर चला जाता। जब एक महीने की छुटियाँ बचती तो लेखक अध्यापक द्वारा दिए गए दो सौ सवालों के बारे में गणना करता और सोचता कि एक दिन में । दस सवाल हल करने पर बीस दिन में पूरे हो जाएँगे। एक-एक दिन गिनते खेलकूद में दस दिन और बीत जाते तब पिटाई का डर बढ़ने लगता। तब वह डर भगाने के लिए सोचता कि एक दिन पंद्रह सवाल भी हल किए जा सकते हैं पर सवाल न होते और छुट्टियाँ समाप्त होने को आ जाती, तब वह मास्टरों की पिटाई को सस्ता सौदा समझकर बहादुरी से पिटना स्वीकार कर लेता। इस तरह वह बहादुर बनने की कल्पना किया करता।

प्रश्न 8.
पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
पीटी सर की चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. पीटी सर कठोर स्वभाव के थे, लेकिन अनुशासनप्रिय व कर्तव्यनिष्ठ थे इसीलिए तो स्काउटों को परेड करवाते हुए अनुशासन के भंग हो जाने पर बच्चों को बहुत डाँटते थे। वे बच्चों में कर्मठता व सजगता का विकास करना चाहते थे।

  2. पक्षियों के लिए उनके मन में गहरी ममता थी। तभी अपने दो तोतों को भीगे हुए बादाम छीलकर गिरियाँ खिलाते थे।

प्रश्न 9.
विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर:
बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में कठोर पिटाई के रूप में शारीरिक यातना दी जाती थी। उन्हें थोड़ी-सी गलती पर पीटा जाता था और मुरगा बना दिया जाता था। वर्तमानकाल में बच्चों को शारीरिक दंड देने पर पूर्णतया रोक है। मेरे विचार से यही पूर्णतया उपयुक्त है कि बच्चों को अनुशासन में लाने के लिए शारीरिक दंड नहीं प्यार और अपनत्वपूर्ण व्यवहार की आवश्यकता होती है। बच्चों को स्नेह, पुरस्कार तथा प्रशंसा आदि के माध्यम से अनुशासित करना बेहतर होता है।

प्रश्न 10.
बचपन की यादें मन को गुदगुदाने वाली होती हैं, विशेषकर स्कूली दिनों की। अपने अब तक के स्कूली जीवन की खट्टी-मीठी यादों को लिखिए।
उत्तर:
प्रत्येक व्यक्ति के बचपन की यादें मन को गुदगुदाने वाली होती हैं, पर ये यादें सभी की निजी होती हैं। मुझे भी पूरी तरह से याद है, जब मैं कक्षा दूसरी में थी, तो एक दिन स्कूल में बारिश के कारण मैदान में पानी ही पानी दिखाई दे रहा था। हम सभी बच्चे थोड़ी-सी दूरी पर खेल रहे थे, तो एक शरारती लड़के ने मुझे पानी में धक्का दे दिया। मेरे पानी में गिरते ही सारे बच्चे जोरों से हँसने लगे। मैं पानी में पूरी तरह से भीग गई और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी। बाद में मुझे घर भेज दिया गया था। उस समय की याद आज भी बनी हुई है।

प्रश्न 11.
प्रायः अभिभावक बयों को खेल-कूद में ज्यादा रुचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं बताइए-

  1. खेल आपके लिए क्यों ज़रूरी हैं?

  2. आप कौन-से ऐसे नियम-कायदों को अपनाएँगे, जिनसे अभिभावकों को आपके खेल पर आपत्ति न हो?

उत्तर:

  1. खेल हमारे लिए इसलिए आवश्यक हैं क्योंकि खेलों से शारीरिक और मानसिक विकास होता है। खेलों से शरीर स्वस्थ और मजबूत बनता है। खेल हमें मानवीय मूल्य अपनाने की सीख देते हुए त्याग, हार-जीत को समान समझने का भाव पारस्परिक सहयोग, मैत्री आदि को प्रगाढ़ बनाते हैं, जो हमें समाजोपयोगी नागरिक बनने में मदद करता है।

  2. अभिभावक खेलकूद को बच्चों के लिए अच्छा नहीं समझते हैं। वे इसे पढ़ाई में बाधक मानते हुए समय बरबाद करने का साधन मानते हैं। अभिभावकों को मेरे खेल पर आपत्ति न हो इसके लिए मैं-

    • खेलकूद और पढ़ाई में संतुलन बनाऊँगा।

    • पढ़ाई तथा गृहकार्य पूरा करने के बाद खेलकूद करूंगा।

    • स्कूल से अधिक कार्य मिलने पर मैं उस दिन नहीं खेलूंगा। इसकी भरपाई के लिए मैं छुट्टी वाले दिन खेलकर कर लूंगा।

    • अभिभावकों को खेलकूद की उपयोगिता एवं महत्ता बताऊँगा।



NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 1 हरिहर काका | Class 10 Hindi Chapter 1 Question Answers, Summary, Explanation

  पाठ्य पुस्तक प्रश्न 

प्रश्न 1.
कथावाचक और हरिहर काका के बीच क्या संबंध है और इसके क्या कारण हैं?
उत्तर:
कथावाचक और हरिहर काका के बीच घनिष्ठ दोस्तों जैसे प्यार भरा रिश्ता था।

  • इसका कारण यह था कि ये दोनों एक ही गाँव के रहने वाले थे। लेखक उनके हर सुख-दुख में उनके पास पहुँच जाता था।

  • हरिहर काका के कोई संतान ने थी। वे लेखक को बचपन से बहुत प्यार करते थे। बड़ा होते-होते यही दुलार दोस्ती में बदल गया।

  • हरिहर काका अपनी सारी बातें लेखक से बता दिया करते थे।

प्रश्न 2.
हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी के क्यों लगने लगे?
उत्तर:
महंत एवं हरिहर काका के भाई, दोनों की स्वार्थ-लिप्सो, दोनों का अपने प्रति क्रूर दुर्व्यवहार देखकर हरिहर काका को वे एक ही श्रेणी के लगने लगे। दोनों का लक्ष्य एक ही था-हरिहर काका की जमीन हथियाला। इसके लिए दोनों ने ही छल-बल का प्रयोग किया और उनके विश्वास को ठेस पहुँचाई। दोनों में कोई अंतर नहीं था।

प्रश्न 3.
ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों के मन में अपार श्रद्धा के जो भाव हैं, उससे उनकी किस मनोवृत्ति का पता चलता है?
उत्तर:
ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों के मन में अपार श्रद्धा का भाव है। यह उनकी मनोवृत्ति से पता चलता है, क्योंकि-

  • लोग पुत्र प्राप्ति, लड़की की शादी अच्छे घर में तय होने, लड़के को नौकरी मिलने आदि को ठाकुर जी की कृपा मानते थे।

  • वे खुशी के अवसर पर ठाकुर जी पर रुपये, जेवर, अनाज आदि चढ़ाते थे तथा अधिक खुशी होने पर अपनी जमीन का एक भाग ठाकुर जी के नाम लिख देते थे।

  • वे बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा में राहत पाने के लिए ठाकुर जी से प्रार्थना करते थे।

  • वे अपनी मनोकामना की पूर्ति हेतु ठाकुर जी से प्रार्थना करते थे।

प्रश्न 4.
अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं। कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझे इसलिए रखते हैं, क्योंकि जिंदगी में उन्हें जो अनुभव हुए, उन अनुभवों ने उनकी समझ को निखार दिया। परिवार वाले और मठाधीश दोनों ही उनके लिए काल-विकराल बन जाते हैं। इन दोनों ने हरिहर काका से 15 बीघे जमीन हथियाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए तथा उनपर बहुत ज़ुल्म और अत्याचार किए। इन सबके बावजूद हरिहर काका ने जीते जी अपनी जमीन किसी के नाम नहीं लिखी, क्योंकि अपनी जमीन इनके नाम करके वे अपना जीवन ‘रमेसर की विधवा की तरह नर्क में नहीं झोंकना चाहते थे तथा न ही जीते जी कुत्ते की मौत मरना चाहते थे। ये सभी बातें यही स्पष्ट करती हैं कि अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं।

प्रश्न 5.
हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले कौन थे? उन्होंने उनके साथ कैसा बर्ताव किया?
उत्तर:
हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले लोग ठाकुरबारी के साधु-संत और महंत के पक्ष के लोग थे। हरिहर काका अपनी जमीन ठाकुरबारी के नाम लिखने को तैयार न थे। वे अपने भाइयों के घेरे में रह रहे थे तब काका से बलपूर्वक जमीन-जायदाद की वसीयत करने का एकमात्र यही उपाय नजर आया। ठाकुरबारी में महंत के लोगों ने काका के साथ बुरा बरताव किया। उन्होंने काका के मुँह में कपड़ा ढूंस दिया। उन्होंने अनेक जगह सादे कागजों पर अँगूठा लगवाया और उनके हाथ-पैर बाँधकर एक कमरे में डालकर ताला बंद कर दिया और भाग गए।

प्रश्न 6.
हरिहर काका के मामले में गाँव वालों की क्या राय थी और उसके क्या कारण थे?
उत्तर:
हरिहर काका के मामले में गाँव वालों की राय के रूप में दो वर्ग बन गए थे और दोनों वर्गों की राय भी भिन्न-भिन्न थी। पहले वर्ग का कहना था कि हरिहर काका को अपनी जमीन ठाकुर जी के नाम लिख देनी चाहिए। इससे उत्तम उनके लिए कुछ न होगा, क्योंकि ऐसा करने से उनकी कीर्ति अचल बनेगी तथा ठाकुरबारी का महत्त्व गाँव की सीमा के बाहर भी फैलेगा। पहले वर्ग की राय इसलिए ऐसी थी, क्योंकि यह वर्ग धार्मिक प्रवृत्ति का था, ठाकुरबारी से जुड़ा था तथा यह वर्ग ठाकुरबारी में प्रसाद के बहाने हलुआ-पूरी का भोग लगाता था। दूसरे वर्ग की राय यह थी कि भाइयों के परिवार भी तो अपने ही होते हैं, इसलिए हरिहर काका को अपनी सारी ज़मीन उनके नाम लिख देनी चाहिए। अन्यथा वे लोग उनके साथ अन्याय करेंगे। दूसरे वर्ग की राय प्रगतिशील विचारों के कारण ऐसी थी।

प्रश्न 7.
कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने यह क्यों कहा-“अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरण करने के लिए तैयार हो जाता है।”
उत्तर:
‘अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरण करने के लिए तैयार हो जाता है। लेखक ने ऐसा इसलिए कहा है, क्योंकि काका जिस भयावह स्थिति से गुजर रहे थे उस स्थिति में फँसा हर आदमी यही सोचता है कि इस तरह घुट-घुटकर जीने से तो एक बार मरना ही अच्छा है। काका भली प्रकार जानते थे कि महंत या भाइयों के नाम ज़मीन कर देने से उनका जीवन वैसे भी नरक बन जाएगा। उन्होंने मौत का भय दिखाने वाले भाइयों को भी जमीन लिखने के बजाय मौत को गले लगाना उचित समझा और वे मरने के लिए तैयार हो गए।

प्रश्न 8.
समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है? इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर:
समाज में रिश्तों की बहुत बड़ी तथा विशेष अहमियत है, क्योंकि संसार को चलाने के लिए रिश्ते-नातों का, संबंधों का बहुत महत्त्व है। रिश्तों के कारण ही बहुत-से पाप-अत्याचार, अनाचारों का शमन हो जाता हैं। वंशपरंपराएँ चलती हैं तथा रिश्तों की डोर मज़बूत होती है। व्यक्ति कई बदनामी के कार्य करने से बच जाता है तथा सीख देने में रिश्तों की अहमियत बहुत बड़ी मदद करती है। लेकिन आज रिश्तों की अहमियत कम होती जा रही है। भौतिक सुखों की होड़ और दौड़, स्वार्थ लिप्सा तथा धर्म की आड़ में फलने-फूलने वाली हिंसावृत्ति ने रिश्तों की अहमियत को औपचारिकता तथा आडंबर का जामा पहना दिया है। आज रिश्तों से ज़्यादा धन-दौलत को अहमियत दी जा रही है।

प्रश्न 9.
यदि आपके आसपास हरिहर काका जैसी हालत में कोई हो तो आप उसकी किस प्रकार मदद करेंगे?
उत्तर:
यदि हमारे समाज में हरिहर काका जैसा व्यक्ति है तो अपने व्यस्ततम समय से कुछ समय निकालकर उसके साथ बातें करेंगे ताकि उसका एकाकीपन दूर हो सके। उसकी आवश्यकता के बारे में पूछेगे तथा यथासंभव उसको पूरा करने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा उसके खाने-पीने संबंधी आवश्यकता पूरी करने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा खुश रखने का हर संभव प्रयास करेंगे।

प्रश्न 10.
हरिहर काका के गाँव में यदि मीडिया की पहुँच होती, तो उनकी क्या स्थिति होती? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
हरिहर काका के गाँव में यदि मीडिया की पहुँच होती, तो उनकी ऐसी दयनीय स्थिति इस तरह से कदापि न होती, जैसी उनके भाइयों और ठाकुरबारी के महंत ने की। मीडिया उनकी दयनीय स्थिति को दूरदर्शन पर दिखाकर सरकार और जनता का ध्यान इस ओर खींचता और हरिहर काका की घटना सारे देश की घटना बन जाती, जिससे उनके भाई हरिहर काका की अच्छी तरह से देखभाल करने के लिए बाध्य हो जाते। ठाकुरबारी के महंत सहित अन्य सभी । लोगों का भी पर्दाफाश हो जाता, जिससे हरिहर काका भयमुक्त हो जाते और उनका जीना सरल हो जाता तथा पूरी जनता की सहानुभूति उन्हें मिल जाती।



NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 17 कारतूस | Class 10 Hindi Chapter 17 Summary, Question Answers, Explanation

   

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 17 कारतूस

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

मौखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

प्रश्न 1.
कर्नल कालिंज का खेमा जंगल में क्यों लगा हुआ था?
उत्तर-
कर्नल कालिंज का खेमा जंगल में वज़ीर अली की गिरफ़्तारी के लिए लगा हुआ था। कर्नल कालिंज को यह लग रहा थी कि वज़ीर अली अवश्य ही जंगल में कहीं-न-कहीं छिपा होगा। बरसों से वह कर्नल की पूरी फौज की आँखों में धूल झोंक रहा था। यद्यपि वह इन्हीं जंगलों में घूम रहा था।

प्रश्न 2.

वज़ीर अली से सिपाही क्यों तंग आ चुके थे?
उत्तर-
सिपाही वज़ीर अली से तंग आ चुके थे। क्योंकि हफ़्ते से डेरा डालने और उसे ढूँढ़ने के बाबजूद भी वज़ीर अली पकड़ा नहीं जा रहा था। वे जंगल में रहते-रहते परेशान हो चुके थे।

प्रश्न 3.
कर्नल ने सवार पर नज़र रखने के लिए क्यों कहा?
उत्तर-
कर्नल ने लेफ्टीनेंट को सवार पर नज़र रखने के लिए इसलिए कहा, ताकि वह यह देख सके कि सवार किस दिशा की तरफ जा रहा है और उसकी गतिविधियों की जाँच हो सके।

प्रश्न 4.
सवार ने क्यों कहा कि वज़ीर अली की गिरफ़्तारी बहुत मुश्किल है?
उत्तर-
सवार ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि सवार स्वयं वज़ीर अली था। वह एक जाँबाज़ सिपाही था जिसे अंग्रेज़ अधिकारी साधारण सवार समझ रहे थे। कर्नल के साथ पूरी फौज़ थी फिर भी सवार ने ऐसा कहा क्योंकि उसे कर्नल के खेमे में कोई भी पहचान नहीं पाया था।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-

प्रश्न 1.
वज़ीर अली के अफ़साने सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद क्यों आ जाती थी?
उत्तर-
वज़ीर अली के अफ़साने सुनकर कर्नल को रॉबिन हुड की याद आ जाती थी, क्योंकि उनको जंगल में डेरा डाले हफ़्तों हो गए थे, फिर भी वज़ीर अली भूत की तरह हाथ ही नहीं लगता था। इसी प्रकार रॉबिन हुड भी जंगलों में घूमता रहता था, पर किसी के भी हाथ नहीं लगता था।

प्रश्न 2.
सआदत अली कौन था? उसने वज़ीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों समझा?
उत्तर-
सआदत अली अवध के नवाब आसिफउद्दौला का भाई और वज़ीर अली को चाचा था। आसिफ अली को जब तक संतान न थी तब तक सआदत अली के अवध का नवाब बनने की पूरी संभावना थी लेकिन वज़ीर अली के पैदा होते ही उसका सपना टूट गया उसे अपनी नवाबी खतरे में लगने लगी। अतः उसने वज़ीर अली की पैदाइश को अपनी मौत समझा।

प्रश्न 3.
सआदत अली को अवध के तख्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का क्या मकसद था?
उत्तर-
सआदत अली को अवध के तख्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का विशेष मकसद था। दोस्त होने के कारण उसे उसपर पूर्ण विश्वास था कि स्वयं तो वह ऐशो-आराम का जीवन बिताएगा ही, साथ ही उन्हें भी अर्थात् कर्नल को भी दौलत तथा संपत्ति देकर मालामाल कर देगा और उनकी जरूरतों के अनुसार हर तरह की मदद करेगा।

प्रश्न 4.
कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वजीर अली ने अपनी हिफ़ाज़त कैसे की?
उत्तर-
वज़ीर अली को उसके पद से हटाने के बाद अंग्रेज़ों ने उसे बनारस भेज दिया और तीन लाख रुपया सालाना वज़ीफा तय कर दिया। कुछ महीने बाद गवर्नर जनरल ने वज़ीर अली को कलकत्ता बुलाया। वज़ीर अली इस बुलावे से चिढ़कर कंपनी के वकील के पास गया जो बनारस में ही रहता था। वकील ने वजीर अली की शिकायत की कोई परवाह नहीं की, उल्टा उसे बुरा-भला सुना दिया। वज़ीर अली को गुस्सा आ गया और उसने खंजर निकालकर वकील का कत्ल कर दिया। इसके बाद वज़ीर अली अपने सैनिकों के साथ आज़मगढ़ की ओर भाग गया। वहाँ के बादशाह ने उन लोगों को अपनी हिफाज़त में घाघरा तक पहुँचा दिया। तब से वह जंगलों में छिपकर अपनी शक्ति बढ़ाने लगा।

प्रश्न 5.
सवार के जाने के बाद कर्नल क्यों हक्का-बक्का रह गया?
उत्तर-
सवार के जाने के बाद कर्नल हक्का-बक्का इसलिए रह गया, क्योंकि जिस वज़ीर अली को पकड़ने के लिए वह जंगल में लावलश्कर के साथ लंबे समय से डेरा डाले हुए था, वही वज़ीर अली ऐसा वेश बदलकर आया कि कर्नल को उसके किसी भी हाव-भाव से नहीं पता चला कि वह वज़ीर अली है। इसके अतिरिक्त उसने बड़ी ही होशियारी से अपना परिचय देकर कर्नल से कारतूस लेकर उसकी जान भी बख्श दी और देखते-ही-देखते घोड़े पर सवार होकर चला गया। कर्नल केवल घोड़ों की टापों का शोर ही सुनता रह गया।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-

प्रश्न 1.
लेफ्टीनेंट को ऐसा क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है?
उत्तर-
देश में अलग-अलग अनेक स्थानों पर राजा एवं नवाब कंपनी का विरोध कर रहे थे। जब लेफ़्टीनेंट ने देखा कि वज़ीर अली, टीपू सुल्तान तथा बंगाल के नवाब शमसुद्दौला ने बाहरी देशों जैसे अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहे-ज़मा को हिंदुस्तान पर हमला करने की दावत दे दी है, तो उसे ऐसा लगा कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है अर्थात् हिंदुस्तान में चारों ओर से कंपनी के खिलाफ युद्ध की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं।

प्रश्न 2.
वज़ीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया?
उत्तर-
वज़ीर अली को अंग्रेज़ों ने रहने के लिए बनारस भिजवा दिया था और उसे तीन लाख रुपया सलाना वजीफा देना तय किया था। कुछ महीने बाद गवर्नर जनरल ने वज़ीर अली को कलकत्ता बुलवाया। वज़ीर अली वहाँ जाना नहीं चाहता था। कंपनी का वकील भी बनारस में रहता था। इसलिए वह गवर्नर की शिकायत लेकर कंपनी के वकील के पास गया। शिकायत पर ध्यान न देकर वकील ने वज़ीर अली को भला-बुरा सुना दिया। इससे वज़ीर अली के स्वाभिमान को गहरा धक्का लगा। दूसरा वज़ीर अली कंपनी सरकार से नफ़रत करता था। इन दोनों कारणों के जुड़ जाने से वज़ीर अली ने वकील का कत्ल कर दिया।

प्रश्न 3.
सवार ने कर्नल से कारतूस कैसे हासिल किए?
उत्तर-
सवार, जो कि स्वयं वज़ीर अली था, ने कर्नल से अपनी जाँबाजी और सूझ-बूझ से उसके खेमे में घुसकर, उसकी । जान बख्शकरे, कारतूस हासिल किए अर्थात् कर्नल और उसकी फ़ौज से बिना डरे वज़ीर अली ने कर्नल को उसकी औकात दिखाने के लिए उसी से कारतूस हासिल कर लिए।

प्रश्न 4.
वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
वज़ीर अली सचमुच एक जाँबाज सिपाही था। वह बहुत हिम्मती और साहसी था। उसे अपना लक्ष्य पाने के लिए जान की बाजी लगानी आती थी। जब उससे अवध की नवाबी ले ली गई तो उसने अंग्रेज़ों के विरुद्ध संघर्ष करना शुरू कर दिया। उसने गवर्नर जनरल के सामने पेश होने को अपना अपमान माना और पेश होने से साफ मना कर दिया। गुस्से में आकर उसने कंपनी के वकील की हत्या कर डाली। यह हत्या शेर की माँद में जाकर शेर को ललकारने जैसी थी। इसके बाद वह आज़मगढ़ और गोरखपुर के जंगलों में भटकता रहा। वहाँ भी निडर होकर अंग्रेज़ों के कैंप में घुस गया था। उसे अपनी जान की भी परवाह नहीं थी। उसके जाँबाज़ सिपाही होने का परिचय उस घटना से मिलता है जब वह अंग्रेज़ों के कैंप में घुसकर कारतूस लेने में सफल हो जाता है तथा कर्नल उसे देखता रह जाता है। इन घटनाओं से पता चलता है कि वह सचमुच जाँबाज़ आदमी था।

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

प्रश्न 1.
मुट्ठीभर आदमी और ये दमखम।
उत्तर-
इसका आशय है कि वज़ीर अली के पास मुट्ठी भर आदमी थे, अर्थात् बहुत कम आदमियों की सहायता या साथ था, फिर भी इतनी शक्ति और दृढ़ता का परिचय देना कमाल की बात थी। सालों से जंगल में रहने पर भी स्वयं कर्नल, उनकी सेना का बड़ा समूह; जो बहु-संख्या में युद्ध-सामग्री से लैस था, मिलकर भी उसे पकड़ नहीं पाए थे। उसकी अदम्य शक्ति और दृढ़ता को जीत नहीं पाए थे। वह हर काम इतनी सावधानी तथा होशियारी से करता था कि मुट्ठी भर आदमियों ने ही कर्नल के इतने बड़े सेना समूह की नाक में दम कर दिया था।

प्रश्न 2.
गर्द तो ऐसे उड़ रही है जैसे कि पूरा एक काफ़िला चला आ रहा हो मगर मुझे तो एक ही सवार नजर आता है।
उत्तर-
यह कथन अंग्रेज़ों की फौज़ के लेफ़्टीनेंट का है। वज़ीर अली अकेला ही पूरे काफ़िले के समान था। वह तूफान की तरह शक्तिशाली और गतिशील था। उसके घोड़े की टापों से उड़ने वाली धूल ऐसा आभास देती थी मानो पूरी फौज़ चली आ रही है। इस वाक्य से आने वाले सवार के व्यक्तित्व की महानता की झलक मिलती है जो अकेले होते हुए भी अकेला नहीं दिखता। यह सवार वज़ीर अली था जिसका पता किसी को न चला।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का एक-एक पर्याय लिखिए-
खिलाफ़, पाक, उम्मीद, हासिल, कामयाब, वजीफ़ा, नफ़रत, हमला, इंतेज़ार, मुमकिन
उत्तर-
विरुद्ध, पवित्र, आशा, प्राप्त, सफल, छात्रवृत्ति, घृणा, आक्रमण, प्रतीक्षा, संभव

प्रश्न 2.
निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
आँखों में धूल झोंकना, कूट-कूटकर भरना, काम तमाम कर देना, जान बख्श देना, हक्का-बक्का रह जाना।
उत्तर
मुहावरा – वाक्य प्रयोग
आँखों में धूल झोंकना – तात्याँटोपे अंग्रेजों की आँखों में धूल झोककर रानी लक्ष्मीबाई की मदद करते रहे।
कूट-कूटकर भरना – चंद्रशेखर में देशभक्ति और देशप्रेम की भावना कूट-कूटकर भरी थी।
काम तमाम कर देना – पठानकोट में सुरक्षाबलों ने चार आतंकियों का काम तमाम कर दिया।
जान बख्श देना – मुहम्मद गोरी को बंदी बनाने के बाद भी पृथ्वीराज चौहान ने उसकी जान बख्श दी।
हक्का-बक्का रह जाना – पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों का पक्ष लेते देख विश्व के कई राष्ट्र हक्के-बक्के रह गए।

प्रश्न 3.
कारक वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ संबंध बताता है। निम्नलिखित वाक्यों में कारकों को रेखांकित कर उनके नाम लिखिए-

  1. जंगल की जिंदगी बड़ी खतरनाक होती है।

  2. कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई।

  3. वज़ीर को उसके पद से हटा दिया गया।

  4. फ़ौज के लिए कारतूस की आवश्यकता थी।

  5. सिपाही घोड़े पर सवार था।

उत्तर-

  1. संबंध कारक

  2. संबंध कारक, अधिकरण कारक

  3. कर्म कारक, अपादान कारक

  4. संप्रदान कारक, संबंध कारक

  5. अधिकरण कारक

प्रश्न 4.
क्रिया का लिंग और वचन सामान्यतः कर्ता और कर्म के लिंग और वचन के अनुसार निर्धारित होता है। वाक्य में कर्ता और कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार जब क्रिया के लिंग, वचन आदि में परिवर्तन होता है तो उसे अन्विति कहते हैं।
क्रिया के लिंग, वचन में परिवर्तन तभी होता है जब कर्ता या कर्म परसर्ग रहित हों;
जैसे- सवार कारतूस माँग रहा था। (कर्ता के कारण)
सवार ने कारतूस माँगे। (कर्म के कारण)
कर्नल ने वज़ीर अली को नहीं पहचाना। (यहाँ क्रिया, कर्ता और कर्म किसी के भी कारण प्रभावित नहीं है)

अतः कर्ता और कर्म के परसर्ग सहित होने पर क्रिया कर्ता और कर्म से किसी के भी लिंग और वचन से प्रभावित नहीं होती और वह एकवचन पुल्लिंग में ही प्रयुक्त होती है। नीचे दिए गए वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए-

  1. घोड़ा पानी पी रहा था।

  2. बच्चे दशहरे का मेला देखने गए।

  3. रॉबिनहुड गरीबों की मदद करता था।

  4. देशभर के लोग उसकी प्रशंसा कर रहे थे।

उत्तर-

  1. घोड़े ने पानी पीना जारी रखा।

  2. बच्चों ने दशहरे का मेला देखने के लिए प्रस्थान किया।

  3. रॉबिन हुड ने गरीबों की मदद की।

  4. देशभर के लोगों ने उसकी प्रशंसा की।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम-चिह्न लगाइए-

  1. कर्नल ने कहा सिपाहियों इस पर नजर रखो ये किस तरफ़ जा रहा है।

  2. सवार ने पूछा आपने इस मकाम पर क्यों खेमा डाला है इतने लाव लश्कर की क्या जरूरत है।

  3. खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बातें कर रहे थे चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे एक व्यक्ति
    कह रहा था दुश्मन कभी भी हमला कर सकता है।

उत्तर-

  1. कर्नल ने कहा “सिपाहियों इस पर नज़र रखो। ये किस तरफ़ जा रहा है?”

  2. सवार ने पूछा, “आपने इस मकाम पर क्यों खेमा डाला है? इतने लाव-लश्कर की क्या जरूरत है?

  3. खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बातें कर रहे थे। चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे। एक व्यक्ति कह रहा था, “दुश्मन कभी भी हमला कर सकता है।”

योग्यता विस्तार

प्रश्न 1.
पुस्तकालय से रॉबिनहुड के साहसिक कारनामों के बारे में जानकारी हासिल कीजिए।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
वृंदावनलाल वर्मा की कहानी इब्राहिम गार्दी पढ़िए और कक्षा में सुनाइए।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

परियोजना

प्रश्न 1.
‘कारतूस’ एकांकी का मंचन अपने विद्यालय में कीजिए।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
‘एकांकी’ और ‘नाटक’ में क्या अंतर है? कुछ नाटकों और एकांकियों की सूची तैयार कीजिए।
उत्तर-
‘एकांकी’ नाम से ही स्पष्ट है- एक + अंकी, अर्थात् एक अंक वाली। ऐसा छोटा-सा नाटक जिसमें एक अंक हो तथा जिसमें जीवन की किसी समस्या या घटना का चित्रण हो, उसे एकांकी कहते हैं। इसके मंचन के लिए कम पात्रों, कम समय तथा कम साज-सज्जा की आवश्यकता होती है। नाटक एक दृश्य-श्रव्य रचना होती है। इसमें पाँच या उससे अधिक अंक होते हैं।

नाटक में एक मुख्य कहानी तथा उससे जुड़ी अन्य कहानियाँ भी हो सकती हैं। यह एक बड़ी रचना होती है जिसमें जीवन के विभिन्न पहलुओं का चित्रण अनेक दृश्यों और अंकों में किया जाता है। इसके मंचन के लिए अनेक पात्रों, अधिक समय तथा ढेर सारी साज-सज्जा की आवश्यकता होती है।

अन्य पाठेतर हल प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वजीर अली कौन था? अंग्रेज़ उसे क्यों पकड़ना चाहते थे?
उत्तर-
वज़ीर अली अवध के शासक आसिफउद्दौला का पुत्र था। अंग्रेजों ने वजीर अली को सत्ता से हटाकर उसके चाचा सआदत अली को अवध की गद्दी पर बिठाया था। वज़ीर अली के मन में अंग्रेजों के प्रति घृणा भरी थी। उसने कंपनी के वकील की हत्या कर दी थी, इसलिए अंग्रेज़ उसे पकड़ना चाहते थे।

प्रश्न 2.
अंग्रेज़ सैनिक वजीर अली को पकड़ने का प्रयास कब और कहाँ कर रहे थे?
उत्तर-
सन् 1799 के आसपास का समय होगा जब अंग्रेजों ने वज़ीर अली को शासन से हटाया था और उसे काशी भेज दिया था। वजीर अली अंग्रेजों से नफ़रत करता था। उसने कंपनी के वकील की हत्या कर दी और गोरखपुर के जंगलों में जा छिपा। अंग्रेज़ सैनिक वहीं जंगल में खेमा डालकर वज़ीर अली को पकड़ने का प्रयास कर रहे थे।

प्रश्न 3.
शाहे-जमा कौन था? उसे वजीर अली ने भारत आने के लिए क्यों आमंत्रित किया?
उत्तर-
शाहे-जमा अफगानिस्तान का शक्तिशाली शासक था। उसे वज़ीर अली ने भारत आने के लिए इसलिए आमंत्रित किया ताकि वह भारत पर हमला करे। इसी समय वजीर अली भी उसका साथ पाकर अंग्रेजों पर हमला कर दे। इस तरह उसकी योजना थी कि वह शाहे-ज़मा के सहयोग से अंग्रेजों को भारत से भगा देगा और अपनी खोई सत्ता हासिल कर लेगा।

प्रश्न 4.
वज़ीर अली सआदत अली को क्यों पसंद नहीं करता था? उत्तर- सआदत अली रिश्ते में वज़ीर अली का चाचा था। उसकी नजर अवध की सत्ता पर थी जिसे हथियाने के लिए उसने अंग्रेज़ों का सहारा लिया। इससे वज़ीर अली के मन में अंग्रेजों के प्रति घृणा भर गई। सआदत अली और अंग्रेजों के इस व्यवहार से उसे दर-दर भटकना पड़ा, इसलिए वज़ीर अली सआदत अली को पसंद नहीं करता था।

प्रश्न 5.
अवध की सत्ता सआदत अली को सौंपने से क्या लाभ हुआ?
उत्तर-
अवध की सत्ता सआदत अली के हाथों सौंपने से अंग्रेजों को कई लाभ हुए-

  1. अंग्रेजों ने कंपनी के शासन की राह में बाधा बने वजीर अली को शक्तिहीन कर दिया।

  2. अंग्रेजों को अवध की आधी जायदाद और दौलत के अलावा दस लाख रुपये नकद भी मिले।

  3. अंग्रेज़ों को अनेक सुविधाएँ मिलीं।

  4. सआदत अली अंग्रेजों का चाटुकार था। वह अंग्रेजों की किसी बात का विरोध नहीं कर सकता था। इस तरह अवध पर अप्रत्यक्ष रूप में अंग्रेज़ों का ही शासन हो गया।

प्रश्न 6.
सआदत अली सत्ता लोलुप था? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
सआदत अली अवध के नवाब आसिफउद्दौला का भाई था। उसकी निगाह अवध की सत्ता पर थी। वजीर अली के रूप में जब आसिफउद्दौला को पुत्र प्राप्ति हुई तो इससे सआदत अली को अपने सपने टूटते नजर आए। सत्ता पाने के लिए ही वह अंग्रेजों की चापलूसी करने लगा और उनसे हाथ मिला लिया। अंग्रेजों ने वजीर अली को सत्ता से हटाकर उसे शासक बना दिया और अवध की जायदाद व संपत्ति को आधा-आधा बाँट लिया।

प्रश्न 7.
वज़ीर अली ने गवर्नर जनरल से अपनी नराजगी का बदला वकील से लिया?
उत्तर-
वज़ीर अली एक देशभक्त एवं स्वाभिमानी शासक था। वह अंग्रेजों को पसंद नहीं करता था, पर जब से गवर्नर जनरल ने उससे सत्ता छीनकर सआदत अली को सौंपी तभी से गवर्नर जनरल से बेहद नाराज था। गवर्नर जनरल ने जब उसे काशी से कोलकाता बुलवाया तो उसकी यह नाराजगी और भी बढ़ गई। मौका मिलते ही उसने इस नाराजगी का बदला वकील की हत्या करके लिया।

प्रश्न 8.
वज़ीर अली ने किस तरह कर्नल को मात दी?
उत्तर-
वज़ीर अली को पकड़ने के लिए कर्नल ने पूरे लाव-लशकर के साथ खेमा डाल रखा था। वह इसी अवसर में था कैसे भी वज़ीर अली को पकड़ा जाए पर एक रात्रि स्वयं वज़ीर अली कर्नल के खेमे में आया और उससे दस कारतूस ही नहीं लिया बल्कि कारतूस देने के बदले उसकी जान बख्शने की बात कहकर चला गया। इस तरह वज़ीर अली ने अपने साहस और चतुराई से कर्नल को मात दी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भारतीय नवाबों ने अंग्रेज़ों से पीछा छुड़ाने के लिए विदेशी शासकों का भी सहारा लिया इसमें वे कितना सफल रहे। पाठ के आलोक में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
भारतीय नवाबों को जब अंग्रेजों की कुटिल नीतियाँ समझ में आईं तो उन्होंने अंग्रेजों का विरोध करना शुरू कर दिया पर शायद तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अंग्रेज़ ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति अपनाते हुए संपूर्ण भारत पर शासन करने का हर संभव हथकंडा अपना रहे थे। भारतीय नवाब भी उनकी नीतियों का विरोध करते हुए उनसे युद्ध किया। इसमें सफलता न मिलती देखकर उन्होंने अफगानिस्तान के शासक शाहे-जमा को भी भारत पर हमला करने के लिए आमंत्रित किया। इस क्रम में टीपू सुल्तान ने सबसे पहले इस अफ़गान शासक को बुलावा भेजा। फिर बंगाल के नवाब शमसुद्दौला और अवध के नवाब वजीर अली ने शाहे-जमा को बुलावा भेजा पर इस प्रयास से भी अंग्रेजों से पीछा छुड़ाने में असफल रहे।

प्रश्न 2.
वज़ीर अली की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख ‘कारतूस’ पाठ के आधार पर कीजिए।
उत्तर-
‘कारतूस’ पाठ से ज्ञात होता है कि वज़ीर अली अत्यंत साहसी, वीर, महत्त्वाकांक्षी और स्वाभिमानी शासक था। अवध की सत्ता छिनने के बाद उसके इन गुणों को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उसकी चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. साहसी – वज़ीर अली के साहस की जितनी भी प्रशंसा की जाए वह कम ही है। वह कर्नल के कैंप में घुसकर उससे कारतूस लाता है वह कंपनी के वकील की हत्या पहले ही कर चुका था। ये उसके साहसी होने के प्रमाण हैं।

  2. वीर – वज़ीर अली इतना वीर है कि अवध की सत्ता छिनने के बाद भी अंग्रेजों को देश से खदेड़ने के लिए कटिबद्ध रहता है।

  3. महत्त्वाकांक्षी – वज़ीर अली महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति है। वह अवध का शासक बनने की महत्त्वाकांक्षा सदा बनाए रखता है।

  4. स्वाभिमानी – वज़ीर अली इतना स्वाभिमानी है कि वह कंपनी के वकील की अपमानजनक बातों को सह नहीं पाता। है और उसकी हत्या कर देता है।

प्रश्न 3.
‘कारतूस’ पाठ में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
‘कारतूस’ नामक एकांकी के माध्यम से खोई आज़ादी की कीमत पहचानने, उसकी रक्षा करने का संदेश दिया गया है। पाठ के माध्यम से बताया गया है कि हम यदि समय रहते सचेत न हुए तो हमें गुलाम होने से कोई भी नहीं बचा सकता है। हमें देश प्रेम, देशभक्ति, साहस, त्याग जैसी मानवीय भावनाएँ सदा प्रगाढ़ रखनी चाहिए। जिस तरह कुछ नवाबों ने अंत तक देश को आजाद कराने का प्रयास किया तथा अंग्रेजों की दासता स्वीकार नहीं की उसी प्रकार हमें भी किसी लोभ या स्वार्थ के वशीभूत हुए बिना आज़ादी बनाए रखना चाहिए।