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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 6 दिये जल उठे 🕯️ | Class 9 Hindi Chapter 6 Question Answers

 

  1.  

  2. NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 6 दिये जल उठे

  3.     पाठ्य-पुस्तक के बोध-प्रश्न

  4. प्रश्न 1.
    किस कारण से प्रेरित हो स्थानीय कलेक्टर ने पटेल को गिरफ्तार करने का आदेश दिया? [CBSE 2012]
    उत्तर:
    स्थानीय कलेक्टर द्वारा सरदार पटेल की गिरफ्तारी की प्रेरणा का कारण था—पिछले आंदोलन के समय सरदार पटेल द्वारा इसी कलेक्टर को अहमदाबाद से भगा दिया जाना। यही कारण था कि पटेल के द्वारा दो शब्द बोले जाते ही निषेधाज्ञा लागू कर उन्हें गिरफ्तार करवा लिया।

  5. प्रश्न 2.
    जज को पटेल की सजा के लिए आठ लाइन के फैसले को लिखने में डेढ़ घंटा क्यों लगा? स्पष्ट करें।
    उत्तर:
    जज को पटेल की सजा के लिए आठ लाइन के फैसले को लिखने के लिए डेढ़ घंटा इसलिए लगा क्योंकि उसे समझ नहीं आ रहा था कि किस धारा के तहत उन पर आरोप लगाया जाए और उन्हें जेल भेजा जाए। उस समय पटेल को 500 रुपये के जुर्माने के साथ 3 महीने की जेल की सजा हुई। पुलिस पहरे में ही बोरसद की अदालत में लाया गया। जज के सामने ही उन्होंने अपना अपराध कबूल किया था। वह उन्हें कितनी और किस प्रकार कीसज़ा दें यह तथ्य उसकी समझ में नहीं आ रहा था।

  6. प्रश्न 3.
    “मैं चलता हूँ। अब आपकी बारी है।”-यहाँ पटेल के कथन का आशय उद्धत पाठ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
    उत्तर:
    सरदार पटेल को रास में अकारण गिरफ्तार कर बिना मुकदमा चलाए उन्हें 500 रुपए का जुर्माना और तीन महीने के कारावास की सजा सुना दी गई थी। जेल के रास्ते में आश्रमवासियों और गांधी से यह कहना, “मैं चलता हूँ। अब आपकी बारी है।” इस बात का संकेत था कि अंग्रेज़ सरकार मेरी गिरफ्तारी के बाद आपको भी अकारण गिरफ्तार कर सकती है।

  7. प्रश्न 4.
    ”इनसे आप लोग त्याग ओर हिम्मत सीखें”-गाँधी जी ने यह किसके लिए और किस संदर्भ में कहा?
    अथवा
    रास में गाँधी जी ने अपने भाषण में क्या कहा? अपने शब्दों में लिखिए। [CBSE 2012]
    उत्तर:
    रास में गांधी जी का भव्य स्वागत किया गया। दरबार समुदाय के लोग इसमें सबसे आगे थे। दरबार गोपालदास और रविशंकर महाराज वहाँ मौजूद थे। उन्होंने अपने भाषण में दरबारों का खासतौर पर उल्लेख किया है। ये रियासतदार होते हैं। इन्हें साहबी भी कहा गया है। ऐशो-आराम की जिंदगी भी एक तरह का राजपाट था। दरबार सभी कुछ छोड़कर यहाँ बस गए थे। कभी गांधी जी ने कहा था कि इनसे त्याग और साहस की परिभाषाएँ सीखनी चाहिए। धैर्य, त्याग और साहस के द्वारा ही अंग्रेजी शासन को बाहर खदेड़ा जा सकता है।

  8. प्रश्न 5.
    पाठ द्वारा यह कैसे सिद्ध होता है कि-‘कैसी भी कठिन परिस्थिति हो उसका सामना तात्कालिक सूझबूझ और आपसी मेलजोल से किया जा सकता है। अपने शब्दों में लिखिए।
    उत्तर:
    गांधी जी अंग्रेजों द्वारा बनाए गए नमक के कानून को तोड़ना चाहते थे। अंग्रेजों के राज्य में यह काम इतना आसान न था। गांधी जी और सत्याग्रहियों ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया और रास से चलकर मही नदी के किनारे पहुँचे। वहाँ से नाव के सहारे मही नदी पार की। इस यात्रा में उन्हें कई मील पैदल कीचड़ और पानी में चलना पड़ा और अंत में सफल रहे। इससे सिद्ध होता है कि तात्कालिक सूझबूझ और आपसी मेल-जोल से कठिन परिस्थितियों का सामना किया। जा सकता है।

  9. प्रश्न 6.
    महिसागर नदी के दोनों किनारों पर कैसा दृश्य उपस्थित था? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
    उत्तर:
    रात 12 बजे महिसागर नदी का किनारा लोगों की भीड़ से भर गया। घना अँधेरा छाया हुआ था। सत्याग्रहियों के आने का इंतजार हो रहा था। गांधी जी बाहर निकले और घुटनों तक पानी में चलकर नाव तक पहुँचे। महात्मा गांधी जी की जय, सरदार पटेल की जय, नेहरू की जय के नारों से महिसागर नदी का किनारा पूँज रहा था। नाव रवाना हुई। उसे निषादराज चला रहे थे। कुछ ही दूर में नारों की आवाज़ नदी के दूसरे तट से भी आने लगी थी। ऐसा लग रहा था कि जैसे नदी का किनारा न हो पहाड़ की घाटी हो जहाँ प्रतिध्वनि सुनाई दे रही थी। महिसागर के दूसरे तट पर भी स्थिति बिलकुल वैसी ही थी। गांधी जी के पार करने के बाद तट पर दिये लेकर खड़े लोग खड़े ही रह गए। अभी सत्याग्रहियों को भी उस पार जाना था। शायद उन्हें पता था कि रात में कुछ और लोग आएँगे। जिन्हें नदी पार करनी होगी।

  10. प्रश्न 7.
    ”यह धर्मयात्रा है। चलकर पूरी करूंगा।”-गांधीजी के इस कथन द्वारा उनके किस चारित्रिक गुण का परिचय प्राप्त होता है?
    उत्तर:
    गांधी धर्म यात्रा को चलकर पूरी करना चाहते थे। उनका मानना था कि यात्रा में कष्ट सहकर सुख, दुख समझें तभी यात्रा सफल होती है। इससे उनके अत्यंत परिश्रमी, आत्मनिर्भर होने, अपना काम स्वयं करने तथा धार्मिक होने जैसी चारित्रिक गुणों का पता चलता है।

  11. प्रश्न 8.
    गांधी को समझने वाले वरिष्ठ अधिकारी इस बात से सहमत नहीं थे कि गांधी कोई काम अचानक और चुपके से करेंगे। फिर भी उन्होंने किस डर से और क्या एहतियाती कदम उठाए?
    उत्तर:
    गांधी जी सत्य व अहिंसा के पुजारी थे। झूठ बोलकर और चोरी से काम करना उनकी शैली में नहीं था। उनकी व्यक्तित्व की विशेषताओं से वरिष्ठ अधिकारी भी परिचित थे। ब्रिटिश शासकों में एक ऐसा वर्ग भी था जिसे लग रहा था गांधी जी और उनके सत्याग्रही मही नदी के किनारे अचानक पहुँचकर नमक बनाकर कानून तोड़ देंगे। समुद्री पानी नदी तट पर काफ़ी नमक छोड़ जाता है जिसकी रखवाली के लिए चौकीदार रखे जाते हैं। वे मानते ही नहीं हैं कि कोई काम गांधी जी अचानक या चुपके से करेंगे। इसके बावजूद भी नदी के तट से सारे नमक के भंडार हटा दिए गए और उन्हें नष्ट करा दिया गया ताकि इसका खतरा ही न रहे। गाँधी जी द्वारा बनाई गई योजना ने वरिष्ठ अधिकारियों को हैरानी में डाल दिया।

  12. प्रश्न 9.
    गांधी जी के पार उतरने पर भी लोग नदी तट पर क्यों खड़े रहे?
    उत्तर:
    गांधी जी के पार उतरने पर भी लोग नदी तट पर इसलिए खड़े थे, ताकि बाद में जो सत्याग्रही आएँगे, उन्हें भी नदी के पार पहुँचाया जा सके।



NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 5 हामिद खाँ 🕌 | Class 9 Hindi Chapter 5 Question Answers

  

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 5 हामिद खाँ

    पाठ्य-पुस्तक के बोध-प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक का परिचय हामिद खाँ से किन परिस्थितियों में हुआ?
उत्तर:
लेखक मालाबार से तक्षशिला (पाकिस्तान) के पौराणिक खंडहर देखने गया था। वह तेज धूप में भूख-प्यास से परेशान होकर एक गाँव की ओर चला गया। वहाँ चपातियों की महक महसूस कर एक दुकान में खाना खाने के लिए गया, जहाँ उसका हामिद खाँ से परिचय हुआ।

प्रश्न 2.
“काश में आपकं मुल्क में आकर यह सब अपनी आँखों से देख सकता।’-हामिद ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर:
लेखक ने हामिद खाँ को हिंदू-मुसलमान संबंधों के बारे में बताया, उन्हें पहले तो विश्वास नहीं हुआ क्योंकि पाकिस्तान में मुसलमानों को अत्याचार करनेवालों की संतान समझा जाता था। लेखक ने हामिद खाँ को बताया कि भारत में हिंदू मुसलमान मिलकर रहते हैं। एक-दूसरे के त्योहारों में सम्मिलित होते हैं। हिंदू-मुसलमानों के बीच दंगे न के बराबर होते हैं। मुसलमानों की मसजिद हिंदुओं के निवास स्थान के पास होती है। हामिद खाँ विश्वास ही नहीं कर पाया कि वे हिंदू हैं और इतने गौरव से एक मुसलिम से बात कर रहें है। मुसलमानी होटल में भी भारत में खाना खाने में किसी हिंदू को कोई फर्क नहीं पड़ता। लेखक द्वारा हिंदू-मुसलमान की एकता भरी बातों पर हामिद खाँ पहले तो भरोसा नहीं कर पाया इसलिए वे उनके देश में आकर ये सब देखना चाहता था।

प्रश्न 3.
हामिद को लेखक की किन बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था?
उत्तर:
हामिद को लेखक की निम्नलिखित बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था-

  • भारत में हिंदू-मुसलमान मिल-जुलकर रहते हैं।

  • हिंदू निस्संकोच मुसलमानों के होटलों में खाना खाने जाते हैं।

  • यहाँ सांप्रदायिक दंगे न के बराबर होते हैं।

प्रश्न 4.
हामिद खाँ ने खाने का पैसा लेने से इनकार क्यों किया?
उत्तर:
हामिद खाँ पाकिस्तान का रहनेवाला था। वह एक भला आदमी था। मानवीय भावनाओं का उसके जीवन में बहुत महत्त्व था। भूख के कारण होटल ढूंढते हुए लेखक तंग गलियों में स्थित हामिद खाँ के होटल पर पहुँच गए वहाँ उनकी मेहमाननवाजी अच्छा इंसान समझ कर की गई। खाने के बदले लेखक पैसे देना चाहते थे परंतु हामिद खाँ ने उन्हें लेने से इंकार कर दिया। एक रुपये के नोट को वापिस करते हुए हामिद खाँ ने कहा कि मैंने आपसे पैसे ले लिए, लेकिन मैं चाहता हूँ कि ये पैसे आपके पास रहें। आप जब भारत पहुँचे तो उनकी मेहमाननवाजी को याद रखें। लेखक की इंसानियत व उनकी मेल-मिलाप की बातों से हामिद खाँ प्रभावित हुआ था इसलिए उसने मेहमाननवाज़ी के पैसे लेने से इंकार कर दिया।

प्रश्न 5.
मालाबार में हिंदू-मुसलमानों के परस्पर संबंधों को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
मालाबार में हिंदू-मुसलमानों के संबंध सद्भावपूर्ण थे। वे एक-दूसरे को शक की दृष्टि से नहीं देखते थे। वे आपस में लड़ते-झगड़ते नहीं थे। हिंदू इलाकों में भी मस्जिदें थीं। यहाँ सांप्रदायिक दंगे बहुत ही कम होते थे।

प्रश्न 6.
तक्षशिला में आगजनी की खबर पढ़कर लेखक के मन में कौन-सा विचार कौंधा? इससे लेखक के स्वभाव की किस विशेषता का परिचय मिलता है?
उत्तर:
तक्षशिला में धर्म के नाम पर धार्मिक झगड़े जन्म लेते रहते थे। इन झगड़ों की खबरें समाचार-पत्र में छपती रहती थीं। लेखक ने जब इस सांप्रदायिक झगड़े की खबर पढ़ी तो उसका सीधा ध्यान हामिद खाँ की ओर गया। उसने प्रार्थना की कि भगवान हामिद खाँ की दुकान को कोई नुकसान न पहुँचाए। हिंदू-मुसलिम भेद-भाव की आग उस तक न पहुँच पाए। इससे लेखक के स्वभाव की मानवीय भावना का परिचय मिलता है। उनकी दृष्टि में धर्म की प्रधानता नहीं थी। मानवीयता प्रमुख थी। हामिद खाँ उन्हें भला मानव लगा इसलिए उसके प्रति हमदर्दी व सहानुभूति की भावना उनके मन में थी।



NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 4 मेरा छोटा-सा निजी पुस्तकालय 📚 | Class 9 Hindi Chapter 4 Question Answers

 

  1.  

  2. NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 4 मेरा छोटा-सा निजी पुस्तकालय

  3.     पाठ्य-पुस्तक के बोध-प्रश्न

  4. प्रश्न 1.
    लेखक का ऑपरेशन करने से सर्जन क्यों हिचक रहे थे?
    उत्तर:
    लेखक को तीन-तीन हार्ट अटैक आए थे। कुछ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। डॉ. बोर्जेस द्वारा दिए गए 900 वोल्ट्स के शॉक्स के कारण उसका हृदय 60% तक जल गया था। 40% बचे हृदय का आपरेशन करने के बाद यदि रिवाइव नहीं हुआ तो ……………। इसलिए सर्जन आपरेशन से हिचक रहे थे।

  5. प्रश्न 2.
    ‘किताबों वाले कमरे में रहने के पीछे लेखक के मन में क्या भावना थी?
    उत्तर:
    ‘किताबों वाले कमरे में रहने के पीछे लेखक के मन में पुस्तकों का वह संकलन था जो उसके बचपन से लेकर आज तक संकलित था। जब उन्हें अस्पताल से घर लाया गया तो उन्होंने ज़िद की थी कि वे अपने आपको उनके साथ जुड़ा हुआ अनुभव कर सकें। उनके प्राण इन हज़ारों किताबों में बसे हुए थे। जो पिछले चालीस-पचास बरस में धीरे-धीरे जमा होती गई थीं।

  6. प्रश्न 3.
    लेखक के घर कौन-कौन-सी पत्रिकाएँ आती थीं?
    उत्तर:
    लेखक के घर में नियमित रूप से आर्य मित्र ‘साप्ताहिक’, ‘वेदोदम’, ‘सरस्वती’ ‘गृहिणी’ तथा दो बाल पत्रिकाएँ खास उसके लिए-‘बालसखा’ और ‘चमचम’ आती थीं।

  7. प्रश्न 4.
    लेखक को किताबें पढ़ने और सहेजने का शौक कैसे लगा?
    उत्तर:
    लेखक को किताबें पढ़ने और सहेजने का शौक बचपन से था। उसके घर में कई पुस्तकें थीं। वह घर में सत्यार्थ-प्रकाश
    और दयानंद सरस्वती की जीवनी बड़ी रुचि से पढ़ता था। उनकी रोमांचक घटनाएँ उसे बड़ा प्रभावित करती थीं। वह बाल-सखा और चमचम की कथाएँ पढ़ता था। उसी से उसे किताबें पढ़ने का शौक लगा। पाँचवीं कक्षा में प्रथम आने पर अंग्रेज़ी की दो किताबें इनाम में मिली थीं। इन दो किताबों ने उसके लिए नई दुनिया का द्वार खोल दिया था। पिता जी की प्रेरणा से उसने किताबों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया था। इससे उसके निजी पुस्तकालय की शुरुआत हो गई।

  8. प्रश्न 5.
    माँ लेखक की स्कूली पढ़ाई को लेकर क्यों चिंतित रहती थी? [CBSE 2012]
    उत्तर:
    लेखक पाठ्यक्रम की पुस्तकों से अधिक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ पढ़ता था। इससे ऊबने पर वह बार-बार ‘बालसखा’ और ‘चमचम’ पढ़ता था। ऐसे में माँ को लगा कि यह लड़का पास कैसे होगा। ऐसे में वह लेखक की स्कूली पढ़ाई के बारे में चिंतित रहती थी।

  9. प्रश्न 6.
    स्कूल से इनाम में मिली अंग्रेजी की दोनों पुस्तकों ने किस प्रकार लेखक के लिए नई दुनिया के द्वार खोल दिए?
    उत्तर:
    स्कूल से इनाम में मिली अंग्रेज़ी की दोनों पुस्तकों ने लेखक के लिए नई दुनिया के द्वार खोल दिए। एक पुस्तक में पक्षियों के बारे में काफी जानकारी थी। विभिन्न पक्षियों की जातियों, उनकी बोलियों, उनकी आदतों की जानकारी उसमें दी गई थी। दूसरी किताब थी ‘टुस्टी द रग’ जिसमें पानी के जहाजों की कथाएँ थीं। जहाज कितने प्रकार के होते हैं कौन-कौन सा माल लादकर लाते हैं, कहाँ से लाते हैं, कहाँ जाते हैं आदि की जानकारी से भरी पड़ी थी। इन दो किताबों से लेखक पक्षियों से भरे आकाश और रहस्यों से भरे समुद्र के बारे में जानकारी प्राप्त किया।

  10. पिता ने अलमारी के एक खाने से अपनी चीजें हटाकर जगह बनाई और मेरी दोनों किताबें उस खाने में रखकर लेखक से कहा-“आज से यह खाना तुम्हारी अपनी किताबों का। यह तुम्हारी अपनी लाइब्रेरी है।” इस प्रकार लेखक का नया मार्ग प्रशस्त हो गया।

  11. प्रश्न 7.
    ‘आज से यह खाना तुम्हारी अपनी किताबों को यह तुम्हारी अपनी लाइब्रेरी है-पिता के इस कथन से लेखक को क्या प्रेरणा मिली?
    उत्तर:
    “आज से यह खाना तुम्हारी अपनी किताबों का। यह तुम्हारी अपनी लाइब्रेरी है।” पिता के इस कथन से लेखक में पुस्तकों का संकलन एवं सहेजकर रखने के प्रति रुचि पैदा कर दी। फिर तो बीतते समय के साथ-साथ किताबें पढ़ने के अलावा किताबें इकट्ठी करने की सनक पैदा हुई, जिससे उसका अपना निजी पुस्तकालय बन सका।

  12. प्रश्न 8.
    लेखक द्वारा पहली पुस्तक खरीदने की घटना का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
    अथवा
    भारती जी ने देवदास कैसे और किन हालातों में खरीदा? [CBSE 2012]
    उत्तर:
    लेखक के पिता के देहावसान के बाद तो आर्थिक संकट इतना बढ़ गया कि फीस जुटाना तक मुश्किल था। अपने शौक की किताबें खरीदना तो संभव ही नहीं था। एक ट्रस्ट से असहाय छात्रों को पाठ्यपुस्तकें खरीदने के लिए कुछ रुपये सत्र के आरंभ में मिलते थे। उनसे लेखक प्रमुख पाठ्यपुस्तकें सेकेंड-हैंड’ खरीदता था। बाकी अपने सहपाठियों से लेकर पढ़ता और नोट्स बना लेता।

  13. एक बार जाने कैसे पाठ्यपुस्तकें खरीदकर भी दो रुपये बच गए थे। उसने देवदास फ़िल्म देखने का निर्णय किया। तभी पुस्तक की दुकान पर शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की पुस्तक ‘देवदास’ को देखा। उसने वह पुस्तक खरीद ली और बाकी के बचे पैसे खर्च करने की बजाए माँ को लौटा दिए। इस प्रकार लेखक ने अपनी पहली पुस्तक खरीदी।

  14. प्रश्न 9.
    ‘इन कृतियों के बीच अपने को कितना भरा-भरा महसूस करता हूँ’-का आशय स्पष्ट कीजिए।
    उत्तर:
    आशय-लेखक के पास अपने पुस्तकालय में चेखव, मोपाँसा, टालस्टाय जैसे विदेशी लेखकों के साथ कबीर, सूर, तुलसी, रहीम जैसे महापुरुषों की रचनाएँ थीं। लेखक को लगता था कि इन कृतियों के रूप में उसे ये महापुरुष उसके आसपास ही खड़े हैं। इनके बीच वह स्वयं को अकेला नहीं महसूस करता था।



NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 3 कल्लू कुम्हार की उनाकोटी 🏺 | Class 9 Hindi Chapter 3 Question Answers

 

  1.  

  2. NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 3 कल्लू कुम्हार की उनाकोटी

  3.     पाठ्य-पुस्तक के बोध-प्रश्न

  4. प्रश्न 1.
    ‘उनाकोटी’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए बतलाएँ कि यह स्थान इस नाम से क्यों प्रसिद्ध है? [CBSE]
    उत्तर:
    उन’ का अर्थ है-एक कम और कोटि का अर्थ है-करोड़। इस प्रकार उनाकोटी का शाब्दिक अर्थ है-एक करोड़ से एक कम। इस नाम के संबंध में एक पौराणिक कथा यह है कि पहले यहाँ कल्लू नामक कुम्हार रहता था। वह पार्वती का भक्त था। एक बार जब शिव और पार्वती आए तो कल्लू भी उनके निवास कैलाश पर्वत पर जाना चाहता था। पार्वती के कहने पर शिव उसे ले जाने को तैयार हो गए परंतु एक रात में एक लाख मूर्तियाँ बनाने की शर्त रख दी। कल्लू ने रात भर परिश्रम से मूर्तियाँ बनाई परंतु वे एक करोड़ से एक कम निकली। इसी बात से शिव कल्लू को वहीं छोड़कर चले गए। तब से इसका नाम उनाकोटी पड़ गया।

  5. प्रश्न 2.
    पाठ के संदर्भ में उनाकोटी में स्थित गंगावतरण की कथा को अपने शब्दों में लिखिए। [CBSE]
    उत्तर:
    पहाड़ों को अंदर से काटकर यहाँ विशाल आधार मूर्तियाँ बनी हैं। एक विशाल चट्टान ऋषि भागीरथ की प्रार्थना पर स्वर्ग से पृथ्वी पर गंगा अवतरण की पौराणिकता को चित्रित करती है। गंगा अवतरण के धक्के से कहीं पृथ्वी धंसकर पाताल लोक में न चली जाए। शिव को इसके लिए तैयार किया गया कि वे गंगा को अपनी जटाओं में उलझा लें और इसके बाद उसे धीरे-धीरे पृथ्वी पर बहने दें। शिव का चेहरा एक चट्टान पर बना हुआ है और उनकी जटाएँ तो पहाड़ों की चोटियों पर फैली हैं। भारत में यह शिव की सबसे बड़ी आधार मूर्ति है। पूरे साल बहनेवाला एक जल प्रपात पहाड़ों से उतरता है जिसे गंगा जितना ही पवित्र माना जाता है।

  6. प्रश्न 3.
    कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी से किस प्रकार जुड़ गया? [CBSE]
    उत्तर:
    उनाकोटी में पार्वती भक्त कल्लू नामक कुम्हार रहता था। एक बार शिव पार्वती सहित वहाँ पधारे। कल्लू ने शिव के साथ उनके आवास स्थान कैलाश पर्वत पर जाने की जिद की। तब पार्वती ने शिव से कहा कि उसे साथ ले चलें। इस पर शिव तैयार हो गए परंतु एक शर्त रख दी कि वह रात भर में उनकी एक कोटि मूर्ति तैयार करे। कल्लू ने रातभर मूर्तियाँ तैयार की परंतु वे संख्या में एक कम निकली। शिव को उसे साथ न ले जाने का बहाना मिल गया। वे कल्लू और मूर्तियों को छोड़कर चले गए। इस प्रकार कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी के साथ जुड़ गया।

  7. प्रश्न 4.
    ‘मेरी रीढ़ में एक झुरझुरी-सी दौड़ गई’-लेखक के इस कथन के पीछे कौन-सी घटना जुड़ी है? [CBSE 2012]
    उत्तर:
    त्रिपुरा के हिंसाग्रस्त मुख्य भाग में प्रवेश करने से पहले अंतिम पड़ाव टीलियामुरा ही है। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर अगले 83 किलोमीटर यानी मनु तक की यात्रा के दौरान ट्रैफिक सी०आर०पी०एफ० की सुरक्षा में काफिले की शक्ल में चलता है। मुख्य सचिव और आईजी० सी०आर०पी०एफ० से मैंने निवेदन किया था कि वे हमें घेरेबंदी में लेकर चलनेवाले काफिले के आगे-आगे चलें। काफिला दिन में 11 बजे के आसपास चलना शुरू हुआ। सभी काम में मस्त थे उस समय तक डर की कोई गुंजाइश ही नहीं थी। पहाड़ियों पर इरादतन रखे दो पत्थरों की तरफ मेरा ध्यान आकृष्ट नहीं हुआ। दो दिन पहले हमारा एक जवान यहीं विद्रोहियों द्वारा मारा गया था’ मेरी रीढ़ में एक झुरझुरी सी दौड़ गई। मनु तक की अपनी शेष यात्रा में, मैं यह ख्याल अपने दिल से निकाल नहीं पाया कि हमें घेरे हुए सी०आर०पी०एफ० के जवान हैं अन्यथा शांतिपूर्ण प्रतीत होनेवाले जंगलों में किसी जगह बंदूकें लिए विद्रोही भी छिपे हो सकते हैं।

  8. प्रश्न 5.
    त्रिपुरा ‘बहुधार्मिक समाज’ का उदाहरण कैसे बना? [CBSE]
    उत्तर:
    त्रिपुरा तीन ओर बाँग्लादेश से तथा एक ओर भारत से घिरा है। यहाँ बाँग्लादेश से पश्चिम बंगाल से लोग घुसपैठ करके आए और यहाँ बस गए। ये लोग विभिन्न धर्मों को मानने वाले थे। त्रिपुरा में विश्व के चार बड़े धर्मों का प्रतिनिधित्व मौजूद है। इस तरह त्रिपुरा बहुधर्मी समाज का उदाहरण बनता गया।

  9. प्रश्न 6.
    टीलियामुरा कस्बे में लेखक का परिचय किन दो प्रमुख हस्तियों से हुआ? समाज-कल्याण के कार्यों में उनका क्या योगदान था?
    उत्तर:
    टीलियामुरा कुछ ज्यादा बड़ा गाँव है। यहाँ लेखक की मुलाकात हेमंत कुमार जमातिया से हुई, जो यहाँ के एक प्रसिद्ध लोक गायक हैं और जो 1996 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा पुरस्कृत भी हो चुके हैं। हेमंत कोकबारोक बोली में गाते हैं। टीलियामुरा शहर के वार्ड नं 3 में लेखक की मुलाकात एक और गायक मंजु ऋषिदास से हुई। ऋषिदास मोचियों के एक समुदाय का नाम है। लेकिन जूते बनाने के अलावा इस समुदाय के कुछ लोगों की । विशेषता थाप वाले वाद्यों जैसे तबला और ढोल के निर्माण और उनकी मरम्मत के काम में भी है।

  10. मंजु ऋषिदास आकर्षण महिला थीं और रेडियो कलाकार होने के अलावा नगर पंचायत में अपने वार्ड का प्रतिनिधित्व भी करती थीं। वे निरक्षर थीं लेकिन अपने वार्ड की सबसे बड़ी आवश्यकता यानी पेयजल के बारे में उन्हें पूरी जानकारी थी। नगर पंचायत को वे अपने वार्ड में नल का पानी पहुँचाने और इसकी मुख्य गलियों में ईंटें बिछाने के लिए राजी कर चुकी थीं।

  11. प्रश्न 7.
    कैलासशहर के जिलाधिकारी ने आलू की खेती के विषय में लेखक को क्या जानकारी दी? [CBSE]
    उत्तर:
    कैलाश नगर के जिलाधिकारी केरल से आए तेज़-तर्रार जवान थे। उन्होंने चाय के दौरान लेखक को टी.पी.एस. (तरू पोटैटो सीड) की खेती की सफलता के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि आलू की परंपरागत खेती में जहाँ दो मीट्रिक टन बीज कल्लू कुम्हार की उनाकोटी की प्रतिहेक्टेयर जरूरत पड़ती है, वहीं टी.पी.एस. की मत्र 100 ग्राम बीज की ज़रूरत होती है। त्रिपुरा से टी.पी.एस. का निर्यात असम, मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के अलावा वियतनाम, बांग्लादेश और मलेशिया को भी किया जा रहा है।

  12. प्रश्न 8.
    त्रिपुरा के घरेलू उद्योगों पर प्रकाश डालते हुए अपनी जानकारी के कुछ अन्य घरेलु उद्योगों के विषय में बताइए?
    उत्तर:
    त्रिपुरा में आलू की खेती के साथ-साथ अगरबत्तियों के लिए बाँस की पतली सींकें तैयार की जाती हैं। अगरबत्तियाँ बनाने के लिए इन्हें कर्नाटक और गुजरात भेजा जाता है। अन्य घरेलू उद्योगों में माचिस, साबुन, प्लास्टिक, स्टील, लकड़ी आदि के घरेलू उद्योग सर्वप्रसिद्ध हैं। घरेलू आवश्यकता प्रतिदिन बढ़ती चली जा रही है। उद्योगों में भी बहुसंख्यक दौड़ में प्रतियोगी भावनाएँ बढ़ती जा रही हैं। जूते, सीमेंट, कपड़ा उद्योग जैसे घरेलू उद्योग लघु व विशाल रूपों में फैले हुए दिखाई देते हैं।



NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 2 स्मृति 🕊️ | Class 9 Hindi Chapter 2 Question Answers

  

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 2 स्मृति

    पाठ्य-पुस्तक के बोध-प्रश्न

प्रश्न 1.
भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में किस बात का डर था?
उत्तर:
भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में पिटाई की आशंका थी। वह पिटाई और उसके संभावित कारणों के बारे में सोच रहा था कि कहीं इस कड़ी सरदी में झरबेरी के बेर खाने चले आने के कारण बड़े भाई उसे पिटाई करने के लिए तो नहीं बुला रहे हैं।

प्रश्न 2.
मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढेला क्यों फेंकती थी? [CBSE]
उत्तर:
मक्खनपुर पढ़ने जानेवाले बच्चों की टोली पूरी वानर टोली थी। उन बच्चों को पता था कि कुएँ में साँप है। वे ढेला फेंककर कुएँ में से आनेवाली उसकी क्रोधपूर्ण फुफकार सुनने में मजा लेते थे। कुएँ में ढेला फेंककर उसकी आवाज़ सुनने के बाद अपनी बोली की प्रतिध्वनि सुनने की लालसा उनके मन में रहती थी।

प्रश्न 3.
‘साँप ने फुसकार मारी या नहीं, ढेला उसे लगा या नहीं, यह बात अब तक स्मरण नहीं’-यह कथन लेखक की किस मनोदशा को स्पष्ट करता है?
उत्तर:
साँप की फुफकार होने या उसे ढेला लगने या न लगने की बात लेखक को अब तक याद नहीं, क्योंकि कुएँ में ढेला मारते समय उसकी टोपी में रखी चिट्ठियाँ चक्कर काटती हुई कुएँ में गिर रही थीं। चिठियों को यूँ गिरते देखकर लेखक अपनी भावी पिटाई को सोचकर भयभीत हो गया। उक्त कथन लेखक की भयाक्रांत, निराश और घबराहट भरी मनोदशा को स्पष्ट करता है।

प्रश्न 4.
किन कारणों से लेखक ने चिट्ठियों को कुएँ से निकालने का निर्णय लिया? [CBSE]
उत्तर:
लेखक को चिठियाँ बडे भाई ने दी थीं। यदि वे डाकखाने में नहीं डाली जातीं तो घर पर मार पडती। सच बोलकर पिटने का भय और झूठ बोलकर चिट्ठियों के न पहुँचने की जिम्मेदारी के बोझ से दबा वह बैठा सिसक रहा था। वह झूठ भी नहीं बोल सकता था। चिट्ठियाँ कुएँ में गिरी पड़ी थीं। उसका मन कहीं भाग जाने को करता था, फिर पिटने का भय और जिम्मेदारी की दुधारी तलवार कलेजे पर फिर रही थी। उसे चिट्ठियाँ बाहर निकालकर लानी थीं। अंत में उसने कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने का निर्णय कर ही लिया।

प्रश्न 5.
साँप का ध्यान बँटाने के लिए लेखक ने क्या-क्या युक्तियाँ अपनाई? [CBSE]
उत्तर:
साँप का ध्यान बँटाने के लिए लेखक ने कुएँ की दीवार पर अपना पैर लगाकर कुछ मिट्टी गिराई। इससे साँप का ध्यान बँट गया और उसने मिट्टी पर जोर से मुँह मारा। लेखक ने डंडे से चिट्ठियों को सरकाया, इससे उसका ध्यान डंडे की ओर चला गया और उसने डंडे पर भरपूर वार किया। इस तरह उसने साँप का ध्यान बँटाकर चिट्ठियाँ उठाने में सफल हो गया।

प्रश्न 6.
कुएँ में उतरकर चिट्ठियों को निकालने संबंधी साहसिक वर्णन को अपने शब्दों में लिखिए। [CBSE]
अथवा
चिट्ठियों को कुएँ से निकालना मौत का सामना करना था। कैसे? स्पष्ट कीजिए। [CBSE]
उत्तर:
लेखक की चिट्ठियाँ कुएँ में गिरी पड़ी थीं। कुएँ में उतरकर चिट्ठियों को निकाल लाना साहस का कार्य था। लेखक ने इस चुनौती को स्वीकार किया और उसने छह धोतियों को जोड़कर डंडा बाँधा और एक सिरे को कुएँ में डालकर उसके दूसरे सिरे को कुएँ के चारों ओर घुमाने के बाद उसमें गाँठ लगाकर छोटे भाई को पकड़ा दिया। धोती के सहारे जब वह कुएँ के धरातल से चार-पाँच गज ऊपर था, उसने साँप को फन फैलाए देखा। वह कुछ हाथ ऊपर लटक रहा था। साँप के पास पैर लटकते थे। वह आक्रमण करने की तैयारी में था।

साँप को धोती में लटककर नहीं मारा जा सकता था। डंडा चलाने के लिए काफी जगह चाहिए थी इसलिए उसने डंडा चलाने का इरादा छोड़ दिया। उसने डंडे से चिट्ठियों को खिसकाने का प्रयास किया कि साँप डंडे से चिपक गया। साँप का पिछला भाग लेखक के हाथों को छू गया। लेखक ने डंडे को एक ओर पटक दिया। देवी कृपा से साँप के आसन बदल गए और वह चिट्ठियों को उठाने में कामयाब हो गया।

प्रश्न 7.
इस पाठ को पढ़ने के बाद किन-किन बाल-सुलभ शरारतों के विषय में पता चलता है? [CBSE]
अथवा
बच्चे किस प्रकार की शरारतों में आनंद लेते हैं? [CBSE 2012]
उत्तर:
इस पाठ को पढ़ने के बाद अनेक बाल सुलभ शरारतों का पता चलता है; जैसे-

  • बच्चे सरदी आदि की परवाह किए बिना पेड़ से फल आदि तोड़कर खाते रहते हैं।

  • उन्हें पिटाई से डर लगता है।

  • वे काम को जिम्मेदारी से करते हुए भी शरारतों में शामिल हो जाते हैं।

  • जीव-जंतुओं को सताने में उन्हें मज़ा आता है।

  • वे नासमझी में साँप जैसे जहरीले जीव से भी छेड़छाड़ करते हैं।

प्रश्न 8.
‘मनुष्य का अनुमान और भावी योजनाएँ कभी-कभी कितनी मिथ्या और उलटी निकलती हैं’-का आशय स्पष्ट कीजिए। [CBSE]
उत्तर:
मनुष्य हर स्थिति से निबटने के लिए अपना अनुमान लगाता है। वह अपने अनुसार भविष्य के लिए योजनाएँ बनाता है, पर ये योजनाएँ हर बार सफल नहीं हो पातीं। ये कई बार झूठी सिद्ध होती हैं। कई बार तो स्थिति बिलकुल उल्टी होती है। जिस प्रकार लेखक के साथ बचपन में घटित हुआ। मक्खनपुर जाते समय जब लेखक की चिट्ठियाँ गिर गईं। उस समय की स्थिति का लेखक ने अनुमान नहीं लगाया था। कुएँ में उतरकर चिट्ठियों को लाना साहस का काम था। लेखक धोती के सहारे कुएँ में उतरा था। सामने साँप फन फैलाए बैठा था। धोती पर लटककर साँप को मारना बिलकुल असंभव था।

वहाँ डंडा चलाने की भी जगह नहीं थी। लेखक ने डंडे से चिट्ठियों को खिसकाने का प्रयास किया तो साँप ने डंडे से चिपककर आसन बदल लिया और लेखक चिट्ठियाँ उठाने में सफल हुआ। लेखक इन सब बातों के लिए पहले से तैयार नहीं था, लेकिन स्थिति के साथ वह अपनी योजना में परिवर्तन करता गया।
इस प्रकार मनुष्य की कल्पना और वास्तविकता में बहुत अंतर होता है। यह बात इस घटना से सिद्ध हो जाती है।

प्रश्न 9.
‘फल तो किसी दूसरी शक्ति पर निर्भर है’-पाठ के संदर्भ में इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। [CBSE]
उत्तर:
लेखक ने अपने बड़े भाई की पिटाई से बचने एवं चिट्ठियाँ डाकखाने में पहुँचाने की जिम्मेदारी के कारण उसने कुएँ में उतरने का निर्णय किया। वह कुएँ में पड़े विषैले साँप से होने वाले भावी खतरों को भी जानता था। इस जोखिमपूर्ण कार्य में उसकी मृत्यु भी हो सकती थी। उसने परिणाम पर कम ध्यान देकर चिट्ठियाँ उठाने में अपना पूरा ध्यान लगाया। उसने अपने उद्देश्य को सामने रखकर कार्य किया, क्योंकि फल तो किसी दूसरी शक्ति पर निर्भर करता है।