Showing posts with label Chapter 7. Show all posts

NCERT Solutions — Class 10 Hindi Sparsh Chapter 7: तोप 💥 | Amresh Academy

   

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 7 तोप

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
विरासत में मिली चीजों की बड़ी सँभाल क्यों होती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
विरासत में मिली चीज़ों की बड़ी सँभाल इसलिए होती है, क्योंकि ये चीजें हमारी धरोहर हैं, जिन्हें देखकर या जानकर हमें अपने देश और समाज की प्राचीन उपलब्धियों का ज्ञान होता है, मान होता है और ये चीजें हमें तत्कालिक परिस्थिति की जानकारी देने के साथ-साथ दिशा-निर्देश भी देती हैं। नई पीढ़ी अपने पूर्वजों के बारे में जाने, उनके अनुभवों से कुछ सीखे, इसी उद्देश्य से विरासत में मिली चीज़ों को सँभाल कर रखा जाता है।

प्रश्न 2.

इस कविता से आपको तोप के विषय में क्या जानकारी मिलती है?
उत्तर-
यह कविता हमें कंपनी बाग में रखी तोप के विषय में बताती है कि यह तोप सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय अंग्रेज़ी सेना द्वारा प्रयोग की गई थी। इस तोप ने अपने गोलों से असंख्य शूरवीरों को मार डाला था। यह तोप बड़ी जबर थी परंतु अब यह तोप प्रदर्शन की वस्तु बनकर रह गई है। अब इससे कोई नहीं डरता। इस पर बच्चे घुड़सवारी करते हैं। चिड़ियाँ, गौरैयें इसके भीतर घुस जाती हैं। यह तोप हमें बताती है कि कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, एक-न-एक दिन उसे धराशायी होना ही पड़ता है।

प्रश्न 3.
कंपनी बाग में रखी तोप क्या सीख देती है?
उत्तर-
कंपनी बाग में रखी तोप सुबह-शाम बाग में आने वाले सैलानियों को यह सीख देती है कि मैं बहुत बहादुर हूँ, जबरदस्त हूँ। यद्यपि शुरू में मेरा प्रयोग देशभक्तों के विरुद्ध किया गया और मैंने इसे बेमन से स्वीकार भी किया, लेकिन बाद में मेरा जीवन धन्य हो गया, जब मैंने अपने ज़माने में बड़े-बड़े बहादुर अंग्रेज़ों की धज्जियाँ उड़ाई थीं अर्थात् उन्हें नाकों चने चबवा कर उन्हें उनकी कुटिल कूटनीति का सबक सिखाया था।

प्रश्न 4.
कविता में तोप को दो बार चमकाने की बात की गई है। ये दो अवसर कौन-से होंगे?
उत्तर
कविता में जिन दो अवसरों पर तोप को चमकाने की बात कही गई है, वे हैं

  • 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस)

  • 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस)।

ये दोनों तिथियाँ हमारे देश के लिए ऐतिहासिक दिवस की प्रतीक हैं। इन्हें हम राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाते हैं। देश पूरी तरह से राष्ट्रीय-पर्व का हिस्सा बनता है। इन्हीं दोनों तिथियों पर इस तोप को भी चमकाया जाता है क्योंकि यह तोप हमारे विजेता और आज़ादी की प्रतीक होने के कारण एक राष्ट्रीय महत्त्व की वस्तु बन चुकी है। इसलिए राष्ट्रीय महत्त्व को ध्यान में रखते हुए इस तोप को चमकाया जाता है ताकि लोगों के मन में राष्ट्रीयता की भावना को बढ़ावा | मिले और लोगों को स्वतंत्रता दिलानेवाले वीरों की याद दिलाई जा सके।

(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-
प्रश्न 1.
अब तो बहरहाल
छोटे लड़कों की घुड़सवारी से अगर यह फ़ारिग हो
तो उसके ऊपर बैठकर
चिड़ियाँ ही अकसर करती हैं गपशप।
उत्तर-
इन पंक्तियों का आशय है कि तोप पर छोटे-छोटे बच्चों को घुड़सवारी करना, चिड़ियों का बैठना तथा गौरैयों का इसके अंदर घुस जाना यह सिद्ध करता है कि कोई भी वस्तु, व्यक्ति आदि कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, एक-न-एक दिन तो उसकी शक्ति निस्तेज हो ही जाती है अर्थात् नश्वर वस्तुएँ, व्यक्ति सदा एक जैसे नहीं रह सकते। उन्हें एक-न-एक दिन तोप की तरह ही चुपचाप रहना पड़ता है।

प्रश्न 2.
वे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप
एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद।
उत्तर-
इस कविता से हमें तोप के विषय में निम्नलिखित जानकारी मिलती है-

  1. कंपनी बाग के द्वार पर रखी यह तोप ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा रखी गयी।

  2. इस तोप का प्रयोग अंग्रेजों द्वारा 1857 में स्वाधीनता सेनानियों एवं क्रांतिकारियों पर किया गया।

  3. यह तोप इतनी शक्तिशाली थी कि इसने असंख्य शूरवीरों को उड़ा दिया।

  4. आज यह खिलौनामात्र बनकर रह गई है जिस पर बच्चे घुड़सवारी करते हैं।

  5. चिड़ियाँ इस पर चहचहाती हैं और इसके अंदर-बाहर घूमती-फिरती हैं।

  6. तोप हमें यह जानकारी भी देती है कि दिन सदा एक-से नहीं होते हैं।

प्रश्न 3.
उड़ा दिए थे मैंने
अच्छे-अच्छे सूरमाओं के धज्जे।
उत्तर
इसका भाव है कि सन् 1857 की तोप, जो आज भी कंपनी बाग के प्रवेश द्वार पर रखी हुई है, उसके सामने चाहे देशभक्त आया, चाहे देशद्रोही, उसने अपने जमाने के बड़े-बड़े वीर अंग्रेज़ों को भी परास्त कर दिया था, उनकी धज्जियाँ उड़ा दी थीं।

भाषा अध्ययन
प्रश्न 1.
कवि ने इस कविता में शब्दों का सटीक और बेहतरीन प्रयोग किया है। इसकी एक पंक्ति देखिए ‘धर रखी गई है यह 1857 की तोप’। ‘धर’ शब्द देशज है और कवि ने इसका कई अर्थों में प्रयोग किया है। ‘रखना’, ‘धरोहर’ और ‘संचय’ के रूप में।
उत्तर-
छात्र स्वयं इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़े और समझें।

प्रश्न 2.
‘तोप’ शीर्षक कविता का भाव समझते हुए इसका गद्य में रूपांतरण कीजिए।
उत्तर-
‘तोप’ कविता का गद्य रूपांतरण- ईस्ट इंडिया कंपनी ने कंपनी बाग के प्रवेश द्वार पर जो तोप रखवायी थी, वह आज
स्वतंत्र भारत में विरासत बनकर रह गई है। वर्ष 1857 की इस तोप को कंपनी बाग के साथ ही साल में दो अवसरों पर साफ़-सुथरा करते हुए चमकाया जाता है। जैसे कंपनी बाग हमें विरासत में मिली थी, उसी तरह ये तोप भी थी। आजकल सुबह-शाम कंपनी बाग में जो सैलानी टहलने के लिए आते हैं, उन्हें यह तोप बताती है कि किसी समय मैं बहुत ताकतवर थी। उस जमाने में मैंने अच्छे-अच्छे शूरमाओं की धज्जियाँ उड़ा दी थीं।
आज स्थिति यह है कि इस पर लड़के घुड़सवारी करते हैं। वहाँ से बच्चों के हटते ही चिड़ियाँ उसके ऊपर बैठकर गप-शप करती हैं। गौरैयें तो और भी शैतानी करती हुई इसके अंदर घुस जाती हैं। ऐसा करके वे यह बताती हैं कि कितनी भी बड़ी तोप क्यों न हो, एक दिन तो उसका मुँह बंद हो ही जाता है अर्थात् अन्यायी कितना भी बड़ा क्यों न हो एक न एक दिन अंत अवश्य होता है।

अन्य पाठेतर हल प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘तोप’ पाठ में वर्णित तोप कहाँ रखी गई है? इसको वहाँ किसने रखवाया?
उत्तर-
‘तोप’ नामक पाठ में वर्णित तोप उस बाग के प्रवेश द्वार पर रखी गई है जिसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनाया हुआ था। इसी बाग में ईस्ट इंडिया कंपनी ने सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय रखवाया ताकि वह भारतीयों का मनोबल कुचल सके।

प्रश्न 2.
कंपनी द्वारा तोप रखवाने का उद्देश्य क्या था?
उत्तर-
ईस्ट इंडिया कंपनी के माध्यम से अंग्रेज़ भारत पर शासन करते हुए अत्याचार कर रहे थे। भारतीयों द्वारा जब अपनी आजादी पाने के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति का रास्ता अपनाया गया तो उन्होंने कंपनी बाग में तोप रखकर असंख्य भारतीयों को उसी तोप से उड़ा दिया।

प्रश्न 3.
कंपनी बाग की तोप को साल में दो बार चमकाने का उद्देश्य क्या था?
उत्तर-
कंपनी बाग की तोप को साल में दो बार चमकाया जाता था। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व के अवसर इस तोप को इसलिए चमकाया जाता है ताकि हम स्वतंत्रता पाने के क्रम में लोगों द्वारा तरह-तरह की यातना सहते हुए मृत्यु को गले लगाने जैसे कार्यों को याद कर सकें तथा अपनी आज़ादी का मूल्य समझ सकें।

प्रश्न 4.
कंपनी बाग में आने वाले सैलानियों को तोप अपने बारे में क्या बताती प्रतीत होती है?
उत्तर-
कंपनी बाग में अब न तोप का आतंक है और न अंग्रेजों का। वह लोग सुबह-शाम घूमने के लिए आते हैं। पर्यटन के लिए आने वालों को तोप अपने बारे में यह बताती है कि कभी वह (तोप) बहुत शक्तिशाली थी। उसने उस समय अच्छे-अच्छे वीरों को मौत की नींद सुला दी थी। उस समय लोगों के मन में इसका खौफ़ था। वे तोप के पास आने से बचते थे।

प्रश्न 5.
‘अच्छे-अच्छे सूरमाओं के धज्जे अपने ज़माने में यह किन सूरमाओं और ज़माने की बात की जा रही है?
उत्तर-
तोप कविता में ‘अच्छे-अच्छे सूरमाओं’ और ‘जमाने’ के माध्यम से उने भारतीय वीरों स्वतंत्रता प्रेमियों और क्रांतिकारियों की बात की गई है जिन्होंने अंग्रेजों की गुलामी और अत्याचार का विरोध करते हुए बगावत कर दिया था। उन्होंने अंग्रेजों के साथ युद्ध किया। इसमें हजारों वीर मारे गए। जिन वीरों को अंग्रेजों ने बंदी बनाया उन्हें तोपों से उड़ा दिया। कविता में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय अर्थात् सन् 1857 और उसके आसपास की बात कही गई है।

प्रश्न 6.
अंग्रेजी शासन काल और स्वतंत्रता के बाद कंपनी बाग की स्थिति में क्या बदलाव आया है?
उत्तर-
अंग्रेजी शासन काल और स्वतंत्रता के बाद कंपनी बाग की दशा में बहुत बदलाव आया है। अंग्रेजों के समय कंपनी में अंग्रेजों का आतंक छाया रहता था। इस बाग के मुहाने पर रखी तोप गरज उठती थी। लोग वहाँ जाने से डरते थे और बचते थे। आज़ादी के बाद कंपनी बाग की स्थिति विरासत जैसी हो गई। अब वहाँ आने-जाने के लिए न कोई प्रतिबंध और न डर। लोग पर्यटन स्थल मानकर यहाँ घूमने आते हैं और बच्चे खेलते हैं।

प्रश्न 7.
कवि तोप को बच्चों और चिड़ियों के खेलने की वस्तु मात्र बताना चाहता है। इस बहाने कवि क्या दर्शाना चाहता है?
उत्तर
कवि ने ‘तोप’ कविता के माध्यम से बताया है कि वर्ष 1857 में जिस तोप ने बड़े-बड़े शूरमाओं को मौत की नींद सुला
दिया था, आज वह तोप खुद दयनीय हालत में है। जिस तोप के पास लोग फटकने से भी डरते थे, उसी तोप पर आज बच्चे घुड़सवारी करते हैं और उनके उतरते ही चिड़िया अपनी मनपसंद जगह बना लेती हैं। इनके माध्यम से कवि यह दर्शाना चाहता है कि भारतीयों के मन में अब अंग्रेजों के तोप के प्रति कोई डर नहीं रह गया है। आतंक या डरा धमकी कर मनुष्यता को नहीं जीता जा सकता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कंपनी बाग और तोप को विरासत में मिली हुई क्यों बताया गया है?
उत्तर-
कंपनी बाग ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बनाया गया बाग था जिसकी अंग्रेजों के शासन काल में बड़ी चर्चा थी। इसी बाग के मुहाने पर एक तोप रखी गई थी जिसका उपयोग भारतीयों के स्वतंत्रता के लिए किए गए विद्रोह को कुचलने में किया जाता था। भारत से अंग्रेजों के चले जाने के बाद यह तोप और बाग विरासत में भारतीयों को मिली। जिस प्रकार विरासत में मिली वस्तुएँ आने वाली पीढ़ी को तत्कालीन परिस्थितियों से अवगत कराती हैं तथा उस समय की यादें तरोताजा कराती हैं तो दूसरी ओर प्रेरणा स्रोत के रूप में गलती न करने या उसे न दोहराने की सीख भी देती हैं। कंपनी बाग और तोप की विरासत के समान ही हमें अंग्रेज़ों के अत्याचार की याद दिलाती है तो हमें अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करने की प्रेरणा भी देती है।

प्रश्न 2.
‘तोप’ कविता द्वारा कवि क्या संदेश देना चाहता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
‘तोप’ कविता के माध्यम से कवि हमें कई संदेश देना चाहता है; जैसे-हमें अपनी विरासतों की रक्षा करते हुए उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। इसके अलावा हमें अपनी शक्ति और धन का घमंड किए बिना सभी के साथ विनम्रतापूर्ण व्यवहार करना चाहिए। अपनी शक्ति से कभी भी दूसरों पर अत्याचार नहीं करना चाहिए क्योंकि समय सदा एक-सा नहीं रहता। शक्ति के बल पर मानव को अधिक दिनों तक दबाया नहीं जा सकता है। बुरे कार्यों में प्रयुक्त शक्ति का अंत करने के लिए लोगों को एकजुट होने और बलिदान देने के लिए तैयार रहने का भी संदेश देना चाहता है।



NCERT Solutions — Class 10 Hindi Kshitij Chapter 7: छाया मत छूना 🌿 | Amresh Academy

   पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है? [Imp. [केंद्रीय बोर्ड प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2009] |
उत्तर:
कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात इसलिए कही है क्योंकि यही सत्य है। मनुष्य को आखिरकार अपने वास्तविक सच का सामना करना पड़ता है। उसे अपनी परिस्थितियों में जीना पड़ता है। भूली-बिसरी यादें या भविष्य के सपने उसे दुखी ही करते हैं, किसी मंजिल पर नहीं ले जाते।

प्रश्न 2.
भाव स्पष्ट कीजिए
प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,
हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।
उत्तर:
बड़प्पन का अहसास, महान होने का सुख भी एक छलावा है। मनुष्य बड़ा आदमी होकर भी मन से प्रसन्न हो, यह आवश्यक नहीं। हर सुख के साथ एक दुख भी जुड़ा रहता है। जैसे हर चाँदनी रात के बाद एक काली रात भी लगी रहती है, पूर्णिमा के बाद अमावस भी आती है, उसी तरह सुख के पीछे दुख भी छिपे रहते हैं।

प्रश्न 3.
‘छाया’ शब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है? कवि ने उसे छूने के लिए मना क्यों किया है? [Imp.] [CBSE 2008 C; A.I. CBSE 2008 C; केंद्रीय बोर्ड प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2009]
अथवा
‘छाया मत छूना मन’ पंक्ति में ‘छाया’ से कवि का क्या तात्पर्य है? [CBSE]
उत्तर:
यहाँ ‘छाया’ शब्द अवास्तविकताओं के लिए प्रयुक्त हुआ है। ये छायाएँ अतीत की भी हो सकती हैं और भविष्य की भी। ये छायाएँ पुरानी मीठी यादों की भी हो सकती हैं और मीठे सपनों की भी।

प्रश्न 4.
कविता में विशेषण के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में विशेष प्रभाव पड़ता है, जैसे कठिन यथार्थ
कविता में आए ऐसे अन्य उदाहरण छाँटकर लिखिए और यह भी लिखिए कि इससे शब्दों के अर्थ में क्या विशिष्टता पैदा हुई?
उत्तर:
इस कविता में प्रयुक्त अन्य विशेषण हैं
सुरंग सुधियाँ सुहावनी–यहाँ ‘सुधियाँ’ विशेष्य के लिए दो विशेषण प्रयुक्त हुए हैं-‘सुरंग’ और ‘सुहावनी’। इनके प्रयोग से बीती हुई यादों के दृश्य बड़े मीठे, मनमोहक और रंगीन बन पड़े हैं। यह पदबंध शादी या मिलन जैसे अवसर का रंगीन दृश्य प्रस्तुत करता जान पड़ता है।
जीवित क्षण–यहाँ ‘ क्षण’ के लिए ‘जीवित’ विशेषण प्रयुक्त हुआ है। इसके प्रयोग से पिछली यादों का भूला हुआ क्षण सामने इस तरह साकार हो उठा है मानो वह क्षण पुराना न होकर वर्तमान में चल रहा हो।
केवल मृगतृष्णा-‘मृगतृष्णा’ के साथ ‘केवल’ विशेषण लगने से भ्रम और छलावा और अधिक सधन, गहरा और निश्चित हो गया है। इससे यह बोध जाग उठा है कि बड़प्पन का अहसास छलावे के सिवा कुछ है ही नहीं।
दुविधा-हत साहस-‘साहस’ के साथ ‘दुविधा-हत’ विशेषण साहस को स्पष्ट रूप से दबाए हुए प्रतीत होता है। यहाँ ‘मृत साहस’ का भाव मुखर हो उठा है।
शरद-रात–यहाँ ‘रात’ के साथ ‘शरद’ शब्द रात की रंगीनी और मोहकता को उजागर कर रहा है। रस-बसंत-‘बसंत’ के साथ ‘रस’ विशेषण बसंत को और अधिक रसीला, मनमोहक और मधुर बना रहा है।

प्रश्न 5.
‘मृगतृष्णा’ किसे कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है? [Imp.][CBSE 2012]
उत्तर:
गर्मी की चिलचिलाती धूप में दूर सड़क पर पानी की चमक दिखाई देती है। हम वहाँ जाकर देखते हैं तो कुछ नहीं होता। प्रकृति के इस भ्रामक रूप को ‘मृगतृष्णा’ कहा जाता है। इस कविता में इसका अर्थ छलावे और भ्रम के लिए किया गया है। कवि कहना चाहता है कि लोग प्रभुता अर्थात् बड़प्पन में सुख मानते हैं। किंतु बड़े होकर भी कोई सुख नहीं मिलता। अतः बड़प्पन का सुख दूर से ही दिखाई देता है। यह वास्तविक सच नहीं है।

प्रश्न 6.
‘बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले’ यह भाव कविता की किस पंक्ति में झलकता है?
उत्तर:
निम्न पंक्ति में जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण।

प्रश्न 7.
कविता में व्यक्त दुख के कारणों को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
‘छाया मत छूना’ कविता के कवि ने मानव की किन वृत्तियों को जीवन के लिए दुखदायी माना है? [A.I. CGBSE 2008 C]
उत्तर:
इस कविता में दुख के निम्नलिखित कारण बताए गए हैं

  1. छाया अर्थात् बीती हुई मीठी यादें जिन्हें याद कर-करके हम अपने वर्तमान को और अधिक दुखी कर लेते हैं।

  2. छाया अर्थात् भविष्य के सपने, जिनके पूरा न होने पर हम दुखी रहते हैं।

  3. वर्तमान जीवन में उचित अवसर पर लाभ न मिलना। बसंत के समय फूल का न खिलना या शरद्-रात में चाँद का न खिलना। आशय यह है कि उचित अवसर पर सुख न मिलना।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 8.
‘जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी’ से कवि का अभिप्राय जीवन की मधुर स्मृतियों से है। आपने अपने जीवन की कौन-कौन सी स्मृतियाँ संजो रखी हैं?
उत्तर:
मेरे जीवन की सबसे मधुर स्मृति: पहली बार एक निबंध प्रतियोगिता में भाग लिया प्रथम आया। 26 जनवरी की परेड में सम्मानित।

प्रश्न 9.
‘क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?’ कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। क्या आप ऐसा मानते हैं? तर्क सहित लिखिए। [ केंद्रीय बोर्ड प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2008]
उत्तर:
यह सच है कि सभी उपलब्धियाँ उचित समय पर ही अच्छी लगती हैं। जैसे-सर्दी बीतने पर रजाई का क्या लाभ? बारिश खत्म होने पर छाता मिला तो क्या लाभ? मनुष्य के मरने के बाद मकान बन सका तो क्या लाभ? फसलें नष्ट होने के बाद सुरक्षा का प्रबंध हुआ तो क्या लाभ? डकैती होने के बाद पुलिस आ पाई तो क्या लाभ? आग बुझने के बाद फायर-ब्रिगेड आ पाया तो क्या लाभ? रोगी मरने के बाद डॉक्टर आ पाया तो क्या लाभ! ये सब उदाहरण बताते हैं कि उचित अवसर और आवश्यकता के समय ही उपलब्धियाँ अच्छी लगती हैं।

पाठेतर सक्रियता

प्रश्न
आप गर्मी की चिलचिलाती धूप में कभी सफ़र करें तो दूर सड़क पर आपको पानी जैसा दिखाई देगा पर पास पहुँचने एर वहाँ कुछ नहीं होता। अपने जीवन में भी कभी-कभी हम सोचते कुछ हैं, दिखता कुछ है लेकिन वास्तविकता कुछ और होती है। आपके जीवन में घटे ऐसे किसी अनुभव को अपने प्रिय मित्र को पत्र लिखकर अभिव्यक्त कीजिए।

उत्तर:

प्रिय रमेश!
एक अनुभव सुनाने का मन कर रहा है। हमारा नौकर दो दिन पहले अचानक गायब हो गया। पता चला कि पिताजी ने उसे 500 रु. का नोट देकर बाजार से मीठे-मीठे आम लाने को कहा था। जब वह वापस नहीं आया तो सभी सदस्य पिताजी की लापरवाही को कोसने लगे। मैंने भी यही किया। परंतु आज पुलिस थाने से पता चला की वह नौकर एक सड़क दुर्घटना में मारा गया है। उसकी जेब से 300 रु. और थेले में 5 किलो मीठे आम मिले हैं।
भाई रमेश! यह समाचार सुनते ही मेरी आँखों में आँसू उमड़ आए हैं। पता नहीं, हम भय और द्वेष वश कुछ का कुछ सोच लेते हैं किंतु सत्य कुछ और ही होता है।

प्रश्न
कवि गिरिजाकुमार माथुर की ‘पंद्रह अगस्त’ कविता खोजकर पढ़िए और उस पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
आज जीत की रात, पहरुए सावधान रहना।
खुले देश के द्वार, अचल दीपक समान रहना। ऊँची हुई मशाल हमारी आगे कठिन डगर है। शत्रु हट गया लेकिन उसकी छायाओं का डर है। शोषण से मृत है समाज, कमज़ोर हमारा घर है। किंतु आ रही नई जिंदगी, यह विश्वास अमर है। जन-गंगा में ज्वार, लहर, तुम प्रवहमान रहना।
पहरुए! सावधान रहना।



NCERT Solutions — Class 9 Hindi Sparsh Chapter 7: धर्म की आड़ ⚖️ | Amresh Academy

  

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 7  धर्म की आड़

    पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

मौखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

प्रश्न 1.
आज धर्म के नाम पर क्या-क्या हो रहा है?
उत्तर:
आज धर्म के नाम पर कुछ स्वार्थी लोगों द्वारा उत्पात किया जा रहा है और भोले-भाले लोगों को आपस में लड़ाया जा रहा है।

प्रश्न 2.
धर्म के व्यापार को रोकने के लिए क्या उद्योग होने चाहिए?
उत्तर:
धर्म के व्यापार को रोकने के लिए साहस और दृढ़ता के साथ उसका विरोध होना चाहिए।

प्रश्न 3.
लेखक के अनुसार स्वाधीनता आंदोलन का कौन-सा दिन सबसे बुरा था?
उत्तर:
स्वाधीनता आंदोलन का वह दिन सबसे बुरा था जब स्वाधीनता के काम में मुल्ला, मौलवी, शंकराचार्य जैसे धर्म के आचार्यों को अधिक महत्त्व दिया गया।

प्रश्न 4.
साधारण से साधारण आदमी तक के दिल में क्या बात अच्छी तरह घर कर बैठी है?
उत्तर:
साधारण से साधारण आदमी तक के दिल में यह बात अच्छी तरह घर करके बैठी है कि धर्म और ईमान के नाम पर अपनी जान दे देना उचित है।

प्रश्न 5.
धर्म के स्पष्ट चिह्न क्या हैं?
उत्तर:
शुद्ध आचरण और सदाचार करना धर्म के स्पष्ट चिह्न हैं।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए

प्रश्न 1.
चलते पुरजे लोग धर्म के नाम पर क्या करते हैं?
उत्तर:
चलते पुरज़े लोग धर्म के नाम पर लोगों को बेवकूफ़ बनाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं। वे चाहते हैं कि उनका नेतृत्व कायम रहे। उनका प्रभाव बना रहे।

प्रश्न 2.
चालाक लोग साधारण आदमी की किस अवस्था का लाभ उठाते हैं? [CBSE 2012]
उत्तर:
चालाक लोग साधारण आदमी की धार्मिक भावनाएँ भड़काते हैं। साधारण आदमी धर्माध होकर धर्म के नाम पर मरने-मिटने को तैयार हो जाता है। उसकी इसी स्थिति का लाभ चालाक लोग उठाते हैं।

प्रश्न 3.
आनेवाला समय किस प्रकार के धर्म को नहीं टिकने देगा?
उत्तर:
जो लोग धर्म के प्रति दिखावा मात्र करके लोगों को आपस में लड़वाते हैं, आनेवाला समय उन्हें टिकने नहीं देगा। जन साधारण की समझ में आ गया है कि ऐसे धार्मिक नेता उनकी भावनाओं से खेलते हैं।

प्रश्न 4.
कौन-सा कार्य देश की स्वाधीनता के विरुद्ध समझा जाएगा?
उत्तर:
प्रत्येक व्यक्ति किसी धर्म को मानने और पूजा-उपासना की कोई भी रीति अपनाने को स्वतंत्र है। उसकी इस स्वाधीनता में हस्तक्षेप करने के कार्य को देश की स्वाधीनता के विरुद्ध समझा जाएगा।

प्रश्न 5.
पाश्चात्य देशों में धनी और निर्धन लोगों में क्या अंतर है?
उत्तर:
पाश्चात्य देशों में धनी लोगों के पास पैसा है, ऊँची-ऊँची इमारतें हैं, सुख-सुविधा है। गरीब लोग रोटी के लिए संघर्ष करते हैं और झोंपड़ियों में रहते हैं।

प्रश्न 6.
कौन-से लोग धार्मिक लोगों से अधिक अच्छे हैं?
उत्तर:
जिन लोगों का आचरण अच्छा है, जो दूसरों का कल्याण करते हैं, अपने आचरण से दूसरों को दुख नहीं पहुंचाते हैं तथा जो अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए भोले-भाले लोगों का शोषण नहीं करते हैं, वे धार्मिक लोगों से अधिक अच्छे हैं।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए

प्रश्न 1.
धर्म और ईमान के नाम पर किए जाने वाले भीषण व्यापार को कैसे रोका जा सकता है? [CBSE 2012]
उत्तर:
धर्म और ईमान के नाम परं दंगे-फसाद हो रहे हैं। कुछ स्वार्थी आदमी धर्म के नाम पर लोगों को आपस में लड़वाते हैं। अपने निजी स्वार्थों के लिए आम आदमी के प्राण ले लिए जाते हैं। इसको रोकने का उपाय है कि लोगों को उन आदमियों और धर्म की सही शिक्षा के लिए जानकारी दी जाए। लोगों को समझाया जाए कि दंगा करके खून बहाने वालों का कोई धर्म नहीं होता।

प्रश्न 2.
‘बुद्धि को मार’ के संबंध में लेख़क के क्या विचार हैं?” [CBSE 2012]
उत्तर:
बुधि की मार के संबंध में लेखक का विचार है-कुछ चलते-पुरज़े लोगों द्वारा साधारण लोगों के मस्तिष्क में ऐसे विचार भर देना कि वे अपनी बुधि से कुछ भी सोचने-समझने योग्य न रह जाएँ। ऐसे लोगों की धार्मिक भावनाएँ भड़काकर अपने हित साधने योग्य बना लेना ताकि स्वार्थी लोग अपना स्वार्थ आसानी से पूरा कर सकें।

प्रश्न 3.
लेखक की दृष्टि में धर्म की भावना कैसी होनी चाहिए?
उत्तर:
लेखक के अनुसार, धर्म के विषय में मानव स्वतंत्र होना चाहिए। हर व्यक्ति आजाद हो। वह जो धर्म अपनाना चाहे, अपनाए। कोई किसी की स्वतंत्रता में बाधा न खड़ी करे। धर्म का संबंध हमारे मन से, ईमान से, ईश्वर और आत्मा से होना चाहिए। वह मन को शुद्ध करने का मार्ग होना चाहिए, अपने जीवन को ऊँचा उठाने का साधन होना चाहिए, दूसरे को कुचलने का नहीं।

प्रश्न 4.
महात्मा गाँधी के धर्म संबंधी विचारों पर प्रकाश डालिए। [CBSE 2012]
उत्तर:
गांधी जी धर्म को मानने वाले थे। इसके बिना वे एक कदम भी नहीं चलते थे। वे पूजा-पाठ, नमाज पढ़ने जैसी दिखावापूर्ण धार्मिक क्रियाओं को सच्चा धर्म नहीं मानते थे। उनका धर्म पवित्र भावनाओं से भरपूर था। वे धर्म को लोगों के कल्याण का साधन समझते थे। उनका मानना था कि धर्म ऊँचे और उदार तत्वों का हुआ करता है, जिसे अपनाने में किसी को आपत्ति नहीं हो सकती।

प्रश्न 5.
सबके कल्याण हेतु अपने आचरणा को सुधारना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
जब तक हम स्वयं का आचरण ठीक नहीं रखेंगे, दूसरे लोगों को उसकी प्रेरणा नहीं दे सकते। समाज में उदाहरण बनने के लिए हमें स्वयं का आचरण सुधारना होगा। मानव मात्र की भलाई तभी हो सकती है, जब हम निजी स्वार्थ को छोड़कर पूरे समाज की भलाई के बारे में सोचें।

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए

प्रश्न 1.
उबल पड़ने वाले साधारण आदमी को इसमें केवल इतना ही दोष है कि वह कुछ भी नहीं समझता-बूझता, और दूसरे लोग उसे जिधर जोत देते हैं, उधर जुत जाता है।
उत्तर:
कुछ चालू-पुरज़े लोग तथा धर्म के तथाकथिक ठेकेदार साधारण लोगों के दिमाग में यह बात अच्छी तरह बिठा देते हैं कि धर्म और ईमान ही तुम्हारे लिए सब कुछ हैं। इसी से तुम्हारा कल्याण होने वाला है। इसकी रक्षा करते हुए तुम्हें अपनी ज्ञान की परवाह नहीं करनी चाहिए। ये अनपढ़ साधारण भोले लोग धर्म क्या है, यह जाने-समझे बिना तनिक-सा उकसाए जाते ही मरने-कटने के लिए तैयार हो जाते हैं। वे दूसरों के बहकावे में जल्दी आ जाते हैं। इससे उनकी शक्ति और साहस का दुरुपयोग स्वार्थी लोग अपने हित के लिए करते हैं।

प्रश्न 2.
यहाँ है बुद्धि पर परदा डालकर पहले ईश्वर और आत्मा का स्थान अपने लिए लेना, और फिर धर्म, ईमान, ईश्वर और आत्मा के नाम पर अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए लोगों को लड़ाना-भिड़ाना।
उत्तर:
भारत में धार्मिक नेता लोगों की बुद्धि का शोषण करते हैं। पहले वे अपने प्रति अंध श्रद्धा उत्पन्न करते हैं। लोग उन्हें ईश्वर, आत्मा और धर्म का पूज्य प्रतीक मान बैठते हैं। जब लोगों की श्रद्धा उन पर जम जाती है तो वे ईमान, धर्म, ईश्वर या आत्मा का नाम लेकर उन्हें दूसरे धर्म वालों से लड़ाते-भिड़ाते हैं तथा अपने स्वार्थ सिद्ध करते हैं।

प्रश्न 3.
अब तो, आपका पूजा-पाठ न देखा जाएगा, आपकी भलमनसाहत की कसौटी केवल आपका आचरण होगी।
उत्तर:
धर्म और ढोंग में अंतर है। धर्म ईश्वर तक पहुँचाने की कड़ी है। कुछ लोग धर्म का आडंबर करते हुए दो-दो घंटे तक पूजा-पाठ करते हैं, शंख बजाते हैं, नमाज़ पढ़ते हैं। ऐसा करके वे समझते हैं कि वे कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र हैं। ऐसे लोग यदि अपना आचरण नहीं सुधारते हैं, तो यह पूर्जा-पाठ सब व्यर्थ हो जाएगा। उनके आचरण-व्यवहार में सज्जनता और दूसरों के कल्याण की भावना निहित होनी चाहिए।

प्रश्न 4.
तुम्हारे मानने ही से मेरा ईश्वरत्व कायम नहीं रहेगा, दया करके, मनुष्यत्व को मानो, पशु बनना छोड़ो और आदमी बनो! [CBSE 2012]
उत्तर:
स्वयं ईश्वर भटके हुए लोगों को कहता है-लोगों को धर्म के नाम पर लड़वाना छोड़ो। अपवित्र काम छोड़ो, खुद की पूजा करवाना छोड़ दो। मानवता को समझो। आदमी बनो और पशु वाला आचरण त्याग दो। आशय यह है कि धर्म के नाम पर कट्टरता त्याग दो और मनुष्य के साथ उदारतापूर्वक सहयोग और स्नेह से व्यवहार करो।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
उदाहरण के अनुसार शब्दों के विपरीतार्थक लिखिए

          सुगम            –      दुर्गम

  1. धर्म              –       …………………..

  2. ईमान           –       …………………..

  3. साधारण       –       …………………..

  4. स्वार्थ           –       …………………..

  5. दुरुपयोग     –        …………………..

  6. नियंत्रित       –       …………………..

  7. स्वाधीनता    –       …………………..

उत्तर:

  1. धर्म             –        अधर्म

  2. ईमान          –         बेईमान

  3. साधारण      –        असाधारण

  4. स्वार्थ          –        निस्वार्थ

  5. दुरुपयोग    –        सदुपयोग

  6. नियंत्रित      –        अनियंत्रित

  7. स्वाधीनता   –       पराधीनता

प्रश्न 2.
निम्नलिखित उपसर्गों का प्रयोग करके दो-दो शब्द बनाइए-

  1. ला,

  2. बिला,

  3. बे,

  4. बद,

  5. ना,

  6. खुश,

  7. हर,

  8. गैर

उत्तर:

  1. ला – लापता, लाजवाब, लापरवाही।

  2. बिला – बिलावजह, बिलानागा।

  3. बे – अदब, बेवज़ह, बेवफ़ा, बेशक ।

  4. बद – बदनाम, बदसूरत, बदतमीज़ ।

  5. ना – नासमझ, नादानी, नामर्द ।

  6. खुश – खुशफहमी, खुशगवार।

  7. हर – हररोज़, हरदम।

  8. गैर – गैरकानूनी, गैरहाज़िर।

प्रश्न 3.
उदाहरण के अनुसार ‘त्व’ प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाइए-
उदाहरण : देव + त्व = देवत्व
उत्तर:

  1. लघु + त्व = लघुत्व

  2. प्रभु + त्व = प्रभुत्व

  3. महत् + त्व = महत्त्व

  4. नारी + त्व = नारीत्व

  5. मनुष्य + त्व = मनुष्यत्व।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित उदाहरण को पढ़कर पाठ में आए संयुक्त शब्दों को छाँटकर लिखिए-
उदाहरण : चलते पुरजे
उत्तर:

  1. समझता – बूझता,

  2. पढ़े – लिखे,

  3. इने – गिने,

  4. मन – माना,

  5. स्वार्थ – सिद्धि,

  6. लड़ाना – भिड़ाना,

  7. दीन – दीन,

  8. नित्य – प्रति,

  9. भली – भाँति,

  10. दिन – भर,

  11. पूजा – पाठ,

  12. देश – भर,

  13. सुख – दुःख।

प्रश्न 5.
‘भी’ का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाइए-
उदाहरण : आज मुझे बाज़ार होते हुए अस्पताल भी जाना है।
उत्तर:

  1. यह भोजन मेरे साथ तुम्हें भी करना है।

  2. गाँधीजी के साथ नेहरू भी आए हैं।

  3. आज सब्जीमंडी से आम भी लाना।

  4. नौकरी के लिए मेहनत ही नहीं, सिफ़ारिश भी करनी पड़ती है।

  5. हम मसूरी-नैनीताल ही नहीं, कौसानी भी गए थे।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
‘धर्म एकता का माध्यम है-इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।
उत्तर:

  1. एक छात्र – धर्म से एकता बढ़ती है। धार्मिक आयोजनों में लोग ऊँच-नीच भूलकर मित्र भाव से भाग लेते हैं।

  2. दूसरा छात्र – परंतु कुछ लोग धर्म के नाम पर ही स्वयं को अलग मानते हैं। कोई खुद को सिख कहता है, कोई बौद्ध कहता है, कोई हिंदू तो कोई मुसलमान।।

  3. तीसरा छात्र – परंतु वे सब हैं तो आदमी ही। चौथा छात्र-परंतु धर्म का नाम लेते ही वे स्वयं को इनसान नहीं हिंदू, ईसाई या मुसलमान कहने लगते हैं।